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मैनपुरी: पति की हत्या की आरोपी पत्नी सहित सभी ससुरालीजन बरी, सात साल पहले की है घटना

Wed, 06 Apr 2022 11:42 PM IST
आगरा ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, मैनपुरी
संवाद न्यूज एजेंसी, मैनपुरी Published by: आगरा ब्यूरो Updated Wed, 06 Apr 2022 11:42 PM IST
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All in-laws including wife accused of killing husband acquitted
सात साल पहले इटावा में एसपी आवास के पास हुई युवक की हत्या में उसकी पत्नी को मैनपुरी की  एफटीसी (द्वितीय) जज तरन्नुम खान ने आरोप से बरी कर दिया गया है। सास, ससुर और साले सहित एक अन्य पर भी हत्या का आरोप लगाया गया था।
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थाना बरनाहल के गांव हकीमपुर निवासी सुशील मोहन पांडेय की 28 मई 2015 को इटावा के थाना सिविल लाइन क्षेत्र में एसपी आवास के पास हत्या कर दी गई थी। सुशील की मां मालती देवी ने हत्या की रिपोर्ट मृतक की पत्नी अमृता, सास नीलम, ससुर महेश मिश्रा, साले ब्रजेश मिश्रा, विमल तिवारी सभी निवासी इटावा के खिलाफ दर्ज कराई थी। इटावा पुलिस ने जांच कर चार्जशीट इटावा की कोर्ट में भेज दी थी।
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मुकदमे की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष घटना को साबित नहीं कर सका। बचाव पक्ष के वकील पूर्व डीजीसी सुभाषचंद्र यादव ने अभियोजन की कहानी में कमियां बताते हुए आरोपियों को बरी करने की दलील दी। दलीलों से सहमत होकर एफटीसी जज तरन्नुम खान ने सभी आरोपियों को हत्या के आरोप से बरी कर दिया है।
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हाईकोर्ट के आदेश पर हुई सुनवाई
मालतीदेवी ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी, इसमें कहा कि आरोपियों के इटावा के होने के कारण उसको मुकदमे में न्याय नहीं मिल सकेगा। आरोपियों के डर से वह मुकदमे की पैरवी भी नहीं कर सकेगी। उसका मुकदमे की किसी दूसरे जिले में सुनवाई कराई जाए। हाईकोर्ट ने हत्या का मुकदमा मैनपुरी में सुनवाई के लिए स्थानांतरित कर दिया।

सिविल कोर्ट में लिपिक हैं महेश
ससुर महेश मिश्रा सिविल कोर्ट इटावा में लिपिक हैं। हत्या की रिपोर्ट दर्ज होने के बाद से वह निलंबित चल रहे हैं। निलंबन अवधि के दौरान ही उन्होंने पूरा मुकदमा लड़ा। बरी होने के बाद वह बहाली के लिए पैरवी करेंगे।

जेल में रहकर लड़ा मुकदमा
साला ब्रजेश मिश्रा घटना के बाद से जेल में बंद हैं। उनकी किसी भी न्यायालय से जमानत मंजूर नहीं हुई है। उनको पूरा मुकदमा जेल में रहकर लडना पड़ा है। निर्णय सुनने के लिए उसको जेल से ही पुलिस अभिरक्षा में अदालत में लाया गया था।

मुकदमे की पैरवी के लिए गया था मृतक
मृतक सुशील और पत्नी अमृता के बीच चल रहे घरेलू विवाद के चलते अमृता मायके में रहने लगी थी। सुशील ने ससुराल से छह माह के पुत्र का अपहरण फायरिंग करके किया था। फायरिंग में अमृता की मां घायल हुई थी। अपहरण की रिपोर्ट सुशील सहित उसके साथी विजय बहादुर और नरसिंह के खिलाफ दर्ज हुई थी। इस मुकदमे में पैरवी के लिए जाते समय सुशील की हत्या की गई थी।
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