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अक्षय तृतीया पर बन रहा चार ग्रहों का महासंयोग, यह दुर्लभ योग होगा बेहद फलदायी
Fri, 03 May 2019 12:42 PM IST
मुकेश कुमार
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मथुरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मथुरा
Published by: मुकेश कुमार
Updated Fri, 03 May 2019 12:42 PM IST
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अक्षय तृतीया
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अक्षय तृतीया का पर्व सात मई को मनाया जाएगा। इस बार अक्षय तृतीया पर चार ग्रहों का महासंयोग बन रहा है। इसे बेहद शुभ माना गया है। ऐसा दुर्लभ योग 16 साल बाद बन रहा है। इससे पहले वर्ष 2003 में ऐसा योग बना था।
दीपक ज्योतिष भागवत संस्थान के निदेशक ज्योतिषाचार्य कामेश्वर चतुर्वेदी के अनुसार सात मई को अक्षय तृतीया को अबूझ मुहूर्त रहेगा। चंद्रमा के उच्च राशि में रहने से शहनाई सुनने को मिलेंगी। साथ ही वेद मंत्रों के सस्वर पाठ होंगे।
ज्योतिषाचार्य के अनुसार हिंदू पंचांग गणना के अनुसार 16 साल बाद अक्षय तृतीया पर चार बड़े ग्रहों का महासंयोग बन रहा है। इस दिन चार बड़े ग्रह सूर्य, शुक्र, चंद्र और राहू अपनी उच्च राशि में होंगे। इसे बेहद शुभ माना गया है।
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दीपक ज्योतिष भागवत संस्थान के निदेशक ज्योतिषाचार्य कामेश्वर चतुर्वेदी के अनुसार सात मई को अक्षय तृतीया को अबूझ मुहूर्त रहेगा। चंद्रमा के उच्च राशि में रहने से शहनाई सुनने को मिलेंगी। साथ ही वेद मंत्रों के सस्वर पाठ होंगे।
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ज्योतिषाचार्य के अनुसार हिंदू पंचांग गणना के अनुसार 16 साल बाद अक्षय तृतीया पर चार बड़े ग्रहों का महासंयोग बन रहा है। इस दिन चार बड़े ग्रह सूर्य, शुक्र, चंद्र और राहू अपनी उच्च राशि में होंगे। इसे बेहद शुभ माना गया है।
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यह है मान्यता
अक्षय तृतीया का पावन पर्व वैशाख महीने की शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को मनाया जाता है। इसे आखातीज और वैशाख तीज भी कहा जाता है। मान्यता है कि इस दिन कोई भी शुभ कार्य करने के लिए पंचागं देखने की जरूरत नहीं है।
ज्योतिषाचार्यों के अनुसार अक्षय तृतीया पर दान-पुण्य करने से अक्षय फल की प्राप्ति होती है। यह दिन विवाह आदि शुभ कार्यों के लिए अबूझ मुहूर्त माना जाता है यानी बिना किसा से पूछे आप किसी भी कार्य का शुभारंभ कर सकते हो।
इसी दिन हुआ था परशुराम अवतार
आचार्य श्याम चतुर्वेदी के अनुसार सतयुग और त्रेता युग का प्रारंभ इसी तिथि से हुआ था। भगवान विष्णु के श्री परशुराम अवतार का अवतरण भी इसी दिन हुआ था। इस दिन भगवान श्रीगणेश और माता लक्ष्मी की भी पूजा की जाती है।
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन जो भी शुभ कार्य किए जाते हैं उनका अनेक गुना फल मिलता है। इस दिन दान-पुण्य करने से धन और वैभव में बढ़ोतरी होती है। इसी मान्यता के चलते अक्षय तृतीया पर कई शुभ कार्य किए जाते हैं। ।
ज्योतिषाचार्यों के अनुसार अक्षय तृतीया पर दान-पुण्य करने से अक्षय फल की प्राप्ति होती है। यह दिन विवाह आदि शुभ कार्यों के लिए अबूझ मुहूर्त माना जाता है यानी बिना किसा से पूछे आप किसी भी कार्य का शुभारंभ कर सकते हो।
इसी दिन हुआ था परशुराम अवतार
आचार्य श्याम चतुर्वेदी के अनुसार सतयुग और त्रेता युग का प्रारंभ इसी तिथि से हुआ था। भगवान विष्णु के श्री परशुराम अवतार का अवतरण भी इसी दिन हुआ था। इस दिन भगवान श्रीगणेश और माता लक्ष्मी की भी पूजा की जाती है।
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन जो भी शुभ कार्य किए जाते हैं उनका अनेक गुना फल मिलता है। इस दिन दान-पुण्य करने से धन और वैभव में बढ़ोतरी होती है। इसी मान्यता के चलते अक्षय तृतीया पर कई शुभ कार्य किए जाते हैं। ।