करहल से ही चुनाव लड़ेंगे अखिलेश: मैनपुरी की बाकी तीन विधानसभा सीटों पर भी सपा प्रत्याशी घोषित
मैनपुरी जिले में कुल चार विधानसभा सीटें हैं। इनमें मैनपुरी, भोगांव, किशनी और करहल शामिल हैं। वर्तमान में भोगांव को छोड़कर तीन पर सपा काबिज हैं।
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समाजवादी पार्टी (सपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव सपा का गढ़ कहे जाने वाले मैनपुरी जिले की करहल विधानसभा सीट से ही चुनाव लड़ेंगे। सपा ने शनिवार को उनके नाम की औपचारिक घोषणा कर दी है। साथ ही जिले की तीन विधानसभा सीटों पर सपा ने एक बार फिर पुराने प्रत्याशियों पर ही दांव खेला है। इसमें से दो वर्तमान में सपा के टिकट पर विधायक हैं तो वहीं एक पूर्व विधायक हैं।
सपा ने मैनपुरी से सदर विधायक राजकुमार यादव को और किशनी से विधायक बृजेश कठेरिया को विधानसभ चुनाव में अपना प्रत्याशी घोषित किया है। वहीं भोगांव से पूर्व विधायक आलोक कुमार शाक्य को प्रत्याशी बनाया गया है। उधर, बृजेश कठेरिया का टिकट घोषित होते ही विरोध शुरू हो गया है। किशनी में सपा कार्यकर्ताओं ने बृजेश कठेरिया के खिलाफ नारेबाजी करते हुए उनका पुतला फूंका। पार्टी हाईकमान से प्रत्याशी बदले जाने की मांग की है।
पहली बार विधानसभा चुनाव लड़ेंगे अखिलेश
सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव पहली बार विधानसभा का चुनाव लड़ने जा रहे हैं। उन्होंने खुद चुनाव लड़ने के लिए करहल सीट को चुनकर पश्चिमी और मध्य यूपी की सीटों पर पकड़ बनाए रखने की रणनीति अपनाई है। उनके लिए यह सीट सियासी समीकरण के लिहाज से काफी सुरक्षित भी है।
करहल विधानसभा क्षेत्र को समाजवादियों का गढ़ माना जाता है। 1957 में करहल को सुरक्षित विधानसभा क्षेत्र बनाया गया। 1974 में करहल सामान्य विधानसभा क्षेत्र घोषित किया गया। 1995 में करहल सीट से सपा ने पहली बार बाबूराम यादव को चुनाव लड़ाया था। वह लगातार तीन बार विधायक रहे हैं।
वर्ष 2002 में भाजपा के सोबरन सिंह यादव चुनाव जीते। 2007 में वह सपा के टिकट पर चुनाव लड़े और जीते। अब तक तीन बार सपा की टिकट पर सोबरन सिंह यादव ही चुनाव जीते हैं। वर्तमान सपा विधायक ने खुद अखिलेश यादव से करहल से चुनाव लड़ने का आग्रह भी किया था।
तीन सीटों पर मैनपुरी में काबिज है सपा
मैनपुरी में कुल चार विधानसभा सीटें हैं, इसमें मैनपुरी, भोगांव, किशनी और करहल शामिल हैं। वर्तमान में भोगांव को छोड़कर तीन पर सपा काबिज हैं। वहीं भोगांव सीट बीते चुनाव में भाजपा के खाते में चली गई थी। इससे पहले ये सीट लगातार पांच बार सपा के खाते में रह चुकी है। ऐसे में ये सीटी भी वापस पाने के लिए सपा इस बार पुरजोर कोशिश करेगी।