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राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा: मुगलिया काल के अपने राम, सम्राट अकबर ने फारसी में कराया था रामायण का अनुवाद

Sun, 14 Jan 2024 06:02 PM IST
धीरेन्द्र सिंह अखिलेश कुमार, आगरा
अखिलेश कुमार, आगरा Published by: धीरेन्द्र सिंह Updated Sun, 14 Jan 2024 06:02 PM IST
सार

मुगल भी भगवान श्री राम के कायल रहे। यही वजह थी कि  रामायण का फारसी में अनुवाद करवाया गया था। तब मुल्ला शेख सादुल्ला और गुलामदास ने अनुवाद किए थे।
 

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Akbar had got Valmiki's Ramayana translated into Persian work was done between 1584 and 1588
मुगलकालीन रामायण - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

मुगल काल में भी राम की आभा रही। इस दौर में बादशाहों से लेकर ओहदेदारों के अपने राम और अपनी रामायण रही। रामायण को किसी से साझा नहीं किया। अकबर ने रामायण का फारसी में अनुवाद कराया था। इसी समय रामचरित मानस भी फारसी में अनूदित होकर आई थी। शाहजहां की हुकूमत में भी राम का काम हुआ। तब मुल्ला शेख सादुल्ला और गुलामदास ने अनुवाद किए थे। यह भी फारसी में थे। अब अयोध्या शोध संस्थान (अंतरराष्ट्रीय रामायण एवं वैदिक शोध संस्थान) इन्हें एक जगह लाने की तैयारी कर रहा है।
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राम की मर्यादा, त्याग, युद्ध कौशल और राज करने की कला के मुगल भी कायल रहे। अकबर ने वाल्मीकि रामायण का फारसी में अनुवाद करवाया था। 1584 से 1588 के बीच यह काम हुआ। मुल्ला अब्दुल कादिर को इसके लिए चुना गया था। इसमें चित्र भी बनवाए गए हैं। इन्हें बासवान, केशव लाल और मिस्कीन ने डिजाइन किया था। इसमें 176 चित्र हैं। यह महाराजा सवाई मानसिंह द्वितीय संग्रहालय जयपुर में है।
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365 पेज की इस रामायण को शाहजहां और औरंगजेब ने भी पढ़ा था। दोनों की मुहरें इसकी तस्दीक भी करती हैं। अकबर ने मां से इसे साझा नहीं किया। हमीदा बानो बेगम के लिए 1593 में नए सिरे से अनुवाद करवाया था। इसका जिक्र मुंतखाब उत तवारीख में है। अकबर ने रामायण और दूसरे धार्मिक ग्रंथों के अनुवाद के लिए फतेहपुर सीकरी में मकतबखाना शुरू किया था।

 

अकबर के मंत्री अब्दुल रहीम खानखाना ने रामायण को बादशाह से हासिल करने के बजाय खुद अनुवाद करवाया था। यह फ्रिर गैलरी ऑफ आर्ट, वाशिंगटन में है। जहांगीर भी इस मायने मुगलों की परंपरा का हिस्सा रहे। जहांगीर ने गिरिधरदास से वाल्मीकि रामायण का अनुवाद करवाया था। यह भी फारसी में है।

 
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रामायण फैजी और मसीही
शाहजहां के दौर में रामायण फैजी लिखी गई। इसी दौरान मुल्ला मसीही की रामायण मसीही सामने आई थी। शेख साद मसीह ने दास्तान-ए- राम व सीता को लिखा था। औरंगजेब के समय तर्जुमाई रामायण रची गई।

 

ये बोले अयोध्या शोध संस्थान के निदेशक
अयोध्या शोध संस्थान के निदेशक डॉक्टर लवकुश द्विवेदी ने बताया कि दूसरी भाषाओं में लिखी और अनूदित रामायण को एक जगह लाया जाएगा। इसके लिए संस्थान प्रयास कर रहा है।
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