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जनता कर्फ्यू में घर से निकलना आकाश को पड़ा भारी, घर लाने को चार महीने से दादी मांग रहीं अफसरों से इजाजत

Wed, 22 Jul 2020 11:39 AM IST
Abhishek Saxena न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा Published by: Abhishek Saxena Updated Wed, 22 Jul 2020 11:39 AM IST
सार

  • एयरफोर्स स्टेशन के अंदर दादी तड़प रही
  • बाहर पोता, अजीत नगर के लोगों ने दिया बच्चे को सहारा

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Akash Leave Home In Janta Curfew Now Air Force Not Give permission for come back in home
आकाश - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

विगत 22 मार्च को जनता कर्फ्यू के दिन 12 साल का आकाश घूमता हुआ बाहर क्या निकला, चार महीने से घर वापस नहीं जा पा रहा है। पिता लापता है, मां की मृत्यु हो चुकी है। दादी एयरफोर्स स्टेशन के अंदर सर्वेंट क्वार्टर में रहती हैं, उन्हीं के पास रहता था। घर वापसी के लिए अफसरों की इजाजत चाहिए।
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चार महीने से वह पास की कॉलोनी अजीत नगर के लोगों के पास रह रहा है। कॉलोनी के लोगों ने उसे दादी के पास भेजने के लिए प्रशासन से गुहार लगाई है। समाजसेवी बादल उपाध्याय ने बताया कि 22 मार्च को आकाश उन्हें ईदगाह बस स्टैंड के पास एक चाय की दुकान पर मिला। उसी दिन जनता कर्फ्यू लगा। फिर लॉकडाउन हो गया।
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उन्हें आकाश ने बताया कि वह एयरफोर्स स्टेशन के गेट के अंदर दादी के पास रहता है। वहीं चाचा व बुआ भी रहते हैं। ये सभी अफसरों के यहां घरेलू काम करते हैं। वह गलती से बाहर आ गया। तब से वापस नहीं जा पा रहा, क्योंकि उसे अनुमति नहीं मिल रही।
 

संक्रमण के डर से नहीं आने दे रहे
अजीत नगर बाजार कमेटी के अध्यक्ष राजेश यादव ने बताया कि जब हमें पता चला कि बच्चा घर से बिछुड़ गया है तो पुलिस व अन्य लोगों के सहयोग से दादी शीला लाल से संपर्क किया।

उन्होंने कहा कि एयरफोर्स वालों को डर है कहीं बच्चा संक्रमित न हो गया हो। इसलिए वह उसे अंदर नहीं आने दे रहे, जब आने देंगे तब हम रख लेंगे। आकाश के चाचा सुधीर लाल का भी यही कहना है कि इजाजत मिलने पर ही आकाश को लाएंगे।

दादी की बहुत याद आ रही है
आकाश अचानक कभी भी रोने लगता है। पूछने पर बताता है कि उसे दादी की याद आ रही है। उसे दादी ही सुलाती थी। चार महीने हो गए, आखिर दादी के पास कब जाएगा।

मैं पोते से कब मिल पाऊंगी
कॉलोनी के लोगों ने आकाश की दादी से बात की। उन्होंने कहा कि उन्हें इस बात की तसल्ली है कि आकाश ठीक से रह रहा है, उसे कोई तकलीफ नहीं है। पता नहीं, पोते से कब मिल पाऊंगी। जब इजाजत मिलेगी, तभी उसे ला सकती हूं।

बीमार है बच्चा, परिजनों को आना चाहिए
क्षेत्रीय निवासी बीएस राना, संगीता, ज्योति ने कहा कि कुछ दिनों से बच्चा बीमार है। शरीर में दर्द बता रहा है। हमने इलाज कराया है। उपचार के लिए घर वालों की स्वीकृति जरूरी होती है। अगर बच्चा नहीं जा पा रहा है तो उसके परिजनों को चाहिए कि वे उसके पास आएं।
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