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लॉकडाउन 4.0: राहत मिलते ही बढ़ा वायु प्रदूषण, अस्थमा मरीजों के लिए खतरा
Thu, 28 May 2020 04:19 AM IST
Abhishek Saxena
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कासगंज
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कासगंज
Published by: Abhishek Saxena
Updated Thu, 28 May 2020 04:19 AM IST
सार
वायु गुणवत्ता सूचकांक 52 से 130 चिंताजनक स्थिति पर पहुंचा
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कासगंज (फाइल फोटो)
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
लॉकडाउन के शुरुआती 21 दिनों में हुए प्रकृति को जो ऑक्सीजन मिली वह लॉकडाउन 3.0 के शुरू होने के बाद से ही प्रभावित होने लगी है। भीषण गर्मी और लू के थपेड़ों के साथ वायु-गुणवत्ता सूचकांक भी तीन गुना रफ्तार से बढ़ा है। लॉकडाउन के शुरूआती दौर में 52 पर आया वायु गुणवत्ता सूचकांक 130 पर आ पहुंचा है। जो स्वास्थ्य के लिहाज से खतरनाक स्तर पर आ पहुंचा है।
लॉकडाउन 4.0 के समाप्त होने के पास ही यातायात का दवाब और बढ़ने की उम्मीद है, जिससे वायु प्रदूषण गुणवत्ता सूचकांक के ओर भी खतरनाक स्तर पर पहुंचने की संभावना बनी है। वायु प्रदूषण का बढ़ता स्तर अस्थमा, एलर्जी मरीजों के साथ सामान्य नागरिकों की भी परेशानी का सबब बना है।
लॉकडाउन का असर: साफ हुई हवा...खिल उठा ताजमहल, स्वच्छ हुआ यमुना का जल
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जनपद में कोरोना काल से पूर्व सामान्य दिनों में वायु प्रदूषण गुणवत्ता सूचकांक 150 से 200 तक रहता है। आमतौर पर 50 तक ही वायु प्रदूषण गुणवत्ता सूचकांक शुद्घ वायु का सूचक होता है। 50 से ऊपर का सूचकांक चिंताजनक व प्रदूषण का स्तर 200 पार करने पर खतरनाक हालात में पहुंच जाता है।
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लॉकडाउन 4.0 के समाप्त होने के पास ही यातायात का दवाब और बढ़ने की उम्मीद है, जिससे वायु प्रदूषण गुणवत्ता सूचकांक के ओर भी खतरनाक स्तर पर पहुंचने की संभावना बनी है। वायु प्रदूषण का बढ़ता स्तर अस्थमा, एलर्जी मरीजों के साथ सामान्य नागरिकों की भी परेशानी का सबब बना है।
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लॉकडाउन का असर: साफ हुई हवा...खिल उठा ताजमहल, स्वच्छ हुआ यमुना का जल
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जनपद में कोरोना काल से पूर्व सामान्य दिनों में वायु प्रदूषण गुणवत्ता सूचकांक 150 से 200 तक रहता है। आमतौर पर 50 तक ही वायु प्रदूषण गुणवत्ता सूचकांक शुद्घ वायु का सूचक होता है। 50 से ऊपर का सूचकांक चिंताजनक व प्रदूषण का स्तर 200 पार करने पर खतरनाक हालात में पहुंच जाता है।
लॉकडाउन में शुरुआती दौर में राहत देने वाला यह वायु प्रदूषण लू व तापमान बढ़ने के साथ बढने लगा है। लू और गर्मी के अलावा वायु प्रदूषण से प्राइवेट व सरकारी अस्पतालों में सांस व एलर्जी के मरीजों की संख्या यकायक बढ़ी है। ऐसे मरीजों को दिक्कतें होने पर वह चिकित्सकों से परामर्श लेकर उपचार पा रहे हैं।
आंकड़ों पर गौर करें तो जनपद में 16 लाख की अबादी पर कॉमर्शियल व प्राइवेट वाहन मिलाकर करीब आठ लाख वाहन हैं। लॉकडाउन के शुरुआती दिनों में जब लोग घरों में कैद थे और कारखाने भी बंद थे, वाहनों की भी संख्या सड़कों पर न के बराबर थी। तब प्रदूषण भी लॉकडाउन था, लेकिन अब लॉकडाउन 4.0
मेंमिली राहतों से वाहनों व लोगों के सड़कों पर आने से वायु प्रदूषण गुणवत्ता सूचकांक भी उछाल मार रहा है।
वायु प्रदूषण का स्तर बढ़ने से परेशानी होती है। खासकर अस्थमा व एलर्जी के मरीजों की परेशानी बढ़ती है। लॉकडाउन-4 में यातायात संचालित हो रहा है। औद्योगिक गतिविधियां भी शुरू हुई हैं। ऐसे में वायु प्रदूषण बढ़ना लाजमी है। लोगों को इससे बचाव रखना चाहिए - डा. राजकुमार माहेश्वरी
आंकड़ों पर गौर करें तो जनपद में 16 लाख की अबादी पर कॉमर्शियल व प्राइवेट वाहन मिलाकर करीब आठ लाख वाहन हैं। लॉकडाउन के शुरुआती दिनों में जब लोग घरों में कैद थे और कारखाने भी बंद थे, वाहनों की भी संख्या सड़कों पर न के बराबर थी। तब प्रदूषण भी लॉकडाउन था, लेकिन अब लॉकडाउन 4.0
मेंमिली राहतों से वाहनों व लोगों के सड़कों पर आने से वायु प्रदूषण गुणवत्ता सूचकांक भी उछाल मार रहा है।
वायु प्रदूषण का स्तर बढ़ने से परेशानी होती है। खासकर अस्थमा व एलर्जी के मरीजों की परेशानी बढ़ती है। लॉकडाउन-4 में यातायात संचालित हो रहा है। औद्योगिक गतिविधियां भी शुरू हुई हैं। ऐसे में वायु प्रदूषण बढ़ना लाजमी है। लोगों को इससे बचाव रखना चाहिए - डा. राजकुमार माहेश्वरी