मिशन-2022 : ताजनगरी में भाजपा ने ठाकुर मतदाताओं को साधने के लिए लगाया बड़ा दांव
भाजपा की रणनीति को इसलिए भी सफल माना जा रहा है कि पंचायत चुनाव में बसपा समर्थित प्रत्याशी सबसे ज्यादा जीतकर आए थे लेकिन वे नामांकन के लिए एकजुट भी नहीं हो सके। माना जा रहा है कि भाजपा इनमें सेंध लगाने में कामयाब रही।
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जिला पंचायत अध्यक्ष पद पर भाजपा ने ठाकुर प्रत्याशी पर दांव लगा अपने मिशन-2022 की रणनीति का एक प्रकार से खुलासा कर दिया है। एक ओर जहां बहुमत नहीं होने के बाद भी भाजपा ने प्रत्याशी मंजू भदौरिया को मैदान में उतार दिया वहीं दूसरी ओर अन्य दलों को साध कर दबदबा भी कायम रखा। ऐसे में साफ है कि भाजपा ने विधानसभा चुनाव के लिए कमर कस ली है और सुनियोजित रणनीति के तहत आगे बढ़ रही है।
आगरा जिले की नौ विधानसभा सीटें हैं। उनमें से चार सीटों फतेहाबाद, बाह, खेरागढ़ और एत्मादपुर पर ठाकुर मतदाता निर्णायक भूमिका में हैं। भाजपा चाहती है कि ये सीटें उसके खाते में बरकरार रहें। इसके लिए ठाकुर मतदाताओं का एकजुट करना भाजपा के लिए जरूरी है। मंजू भदौरिया के ससुर डॉ. राजेंद्र सिंह भाजपा से फतेहाबाद विधायक रहे हैं और क्षेत्र के सभी वर्गों में पकड़ रखने वाले जनप्रतिनिधि के रूप में अपनी पहचान रखते हैं।
राजेंद्र सिंह वर्ष 2007 में भाजपा से विधायक बने। इसके बाद 2012 और 2017 में सपा से चुनाव लड़े लेकिन हार गए। इसके बाद 2019 में लोकसभा चुनाव से दौरान भाजपा में शामिल हो गए। अब भाजपा ने उनकी पुत्रवधू को जिला पंचायत अध्यक्ष के लिए मैदान में उतार कर ठाकुर मतदाताओं को साधा है। माना जा रहा है कि इससे क्षेत्र से सवर्ण मतदाताओं को भी अच्छा संदेश जाएगा। भाजपा की रणनीति को इसलिए भी सफल माना जा रहा है कि पंचायत चुनाव में बसपा समर्थित प्रत्याशी सबसे ज्यादा जीतकर आए थे लेकिन वे नामांकन के लिए एकजुट भी नहीं हो सके। माना जा रहा है कि भाजपा इनमें सेंध लगाने में कामयाब रही।
बहुमत की चाबी लेकर नामांकन दाखिल करने पहुंची थीं मंजू
बहुमत नहीं होने के बाद भी जिला पंचायत अध्यक्ष पद पर भाजपा की उम्मीदवार का नामांकन दाखिल करना और इसके बाद किसी विपक्षी दल या निर्दल प्रत्याशी के मैदान में नहीं आने से साफ है कि पार्टी ने नामांकन से पहले ही आवश्यक बहुमत जुटा लिया था। प्रमुख विपक्षी दल बसपा के मैदान छोड़ने से रास्ता पूरी तरह साफ हो गया। इसे भाजपा के पूर्व विधायक डॉ. राजेंद्र सिंह की कुशल रणनीति माना जा रहा है।
जिला पंचायत के चुनाव में जिले में भाजपा समर्थित प्रत्याशियों को बसपा समर्थित प्रत्याशियों ने कड़ी टक्कर दी। नतीजे में 51 पंचायत सदस्यों में से 18 ही जीत सकी। वहीं बसपा के 20 समर्थित प्रत्याशी जीते। इसके बाद माना जा रहा था कि आगरा में भाजपा व बसपा के बीच जिला पंचायत अध्यक्ष पद के लिए रस्साकशी होगी और निर्दल प्रत्याशी बड़ी भूमिका निभाएंगे। लेकिन भाजपा अध्यक्ष पद की दावेदार मंजू भदौरिया के खेमे ने बहुमत का आंकड़ा जुटा लिया। यही कारण रहा कि पार्टी में भी उनके सामने दूसरे दावेदार टिक नहीं सके। इसे पार्टी ने मिशन 2022 की तैयारी से जोड़ा और विरोध को दरकिनार कर दिया। भाजपा प्रत्याशी शनिवार को कलक्ट्रेट में नामांकन दाखिल करने पहुंचीं तो उनके साथ सांसद, विधायक और पार्टी पदाधिकारी भी पहुंचे।
बालिका शिक्षा और विकास के लिए काम करूंगी: मंजू भदौरिया
मंजू भदौरिया ने कहा कि जीत के बाद उनका उद्देश्य बालिका शिक्षा और विकास के लिए काम करना होगा। उन्होंने कहा कि शिक्षा से ही बालिकाएं सशक्त समाज के निर्माण में भागीदारी निभा सकती हैं। जिला योजना के माध्यम से विकास की इबारत लिखी जाएगी। ग्रामीण अंचल में सड़क, स्वास्थ्य, शिक्षा के मदों पर व्यय किया जाएगा।
बहुजन समाज पार्टी के आगरा-अलीगढ़ मंडल कोआर्डिनेटर गोरेलाल ने बताया कि बसपा के सबसे ज्यादा जिला पंचायत सदस्य चुनाव में जीतकर आए। हमने अंत समय तक प्रयास किया कि उनमें से कोई भी अध्यक्ष पद के लिए नामांकन दाखिल करे, लेकिन हमारा कोई सदस्य चुनाव लड़ने के लिए तैयार नहीं हुआ। ऐसे में तय किया गया कि पंचायत सदस्यों को उनके विवेक पर छोड़ दिया जाए। अगर वह अध्यक्ष पद का चुनाव नहीं लड़ना चाहते तो कैसे लड़वाते? वह अपने विवेक से उचित फैसला लेंगे।
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