फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Agra News ›   Agra University More than 60 percent students failed in BHMS passed

आगरा विश्वविद्यालय: BHMS में फेल 60 फीसदी से अधिक छात्र-छात्राएं हो गए पास, इस तरह हुआ ये खेल

Fri, 04 Nov 2022 01:08 PM IST
धीरेन्द्र सिंह अमर उजाला ब्यूरो, आगरा
अमर उजाला ब्यूरो, आगरा Published by: धीरेन्द्र सिंह Updated Fri, 04 Nov 2022 01:08 PM IST
सार

डीन के पत्र पर प्रभारी कुलपति ने बीएचएमएस छात्रों को सुविधा दे दी। इस प्रकरण को परीक्षा समिति में रखने की जरूरत भी नहीं समझी गई।

विज्ञापन
Agra University More than 60 percent students failed in BHMS passed
डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय में एक और बड़ा खेल सामने आया है। बीएचएमएस की परीक्षा में 60 फीसदी से अधिक छात्र-छात्राएं फेल हो गए। कॉलेजों के कहने पर बिना परीक्षा समिति में प्रस्ताव रखे और छात्र-छात्राओं की ओर से चुनौती मूल्यांकन का आवेदन हुए बिना कॉपियों का पुनर्मूल्यांकन करा दिया गया। अधिकतर फेल छात्र इसमें पास हो गए। 

विज्ञापन

 
बीएचएमएस प्रथम, द्वितीय, तृतीय और चतुर्थ वर्ष की मुख्य और पूरक परीक्षा जून 2021 में कराई गई थी। इसमें 11 बीएचएमएस कॉलेजों के छात्र-छात्राएं शामिल हुए। विश्वविद्यालय में कॉपियों का मूल्यांकन कराया गया। सूत्रों के मुताबिक करीब 60 फीसदी छात्र-छात्राएं कुछ विषयों में फेल हो गए। कॉलेजों की ओर से विश्वविद्यालय के अधिकारियों से संपर्क किया गया। इसके बाद संकायाध्यक्ष, होम्योपैथी के 10 जुलाई 2022 के पत्र के आधार पर प्रभारी कुलपति प्रो. विनय कुमार पाठक की ओर से परीक्षा नियंत्रक को कॉपियों का डिजिटल मूल्यांकन तत्काल कराने के निर्देश दिए गए। मूल्यांकन के समन्वयक बदलकर दोबारा डिजिटल मूल्यांकन करा दिया गया। इसमें अधिकतर फेल छात्र पास हो गए। परीक्षा नियंत्रक डॉ. ओमप्रकाश का कहना है कि बीएचएमएस के छात्र-छात्राओं की कॉपियों का पुनर्मूल्यांकन संकायाध्यक्ष (डीन) के पत्र और कुलपति के आदेश पर कराया गया था। 
विज्ञापन

  
ये भी पढ़ें- Roadways Bus Accident: तीन बार झपकी आने पर बस रोकी होती तो नहीं होता हादसा, एक ही चालक कर रहा था दो शिफ्ट

विज्ञापन
विज्ञापन

यह है नियम 

 विश्वविद्यालय के नियमानुसार कॉपियों का पुनर्मूल्यांकन सीधे किसी अधिकारी के आदेश पर नहीं हो सकता है। इसे परीक्षा समिति में पास कराना अनिवार्य है। दूसरे विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से व्यवस्था बनाई गई है कि यदि छात्र-छात्राएं मूल्यांकन से संतुष्ट नहीं है तो वह आरटीआई के तहत अपनी कॉपी देख सकते हैं और चुनौती मूल्यांकन के लिए आवेदन कर सकते हैं। इसके लिए फीस निर्धारित है और परीक्षा के बाद निर्धारित अवधि में चुनौती मूल्यांकन के लिए आवेदन कर सकते हैं। नियमानुसार ही पुनर्मूल्यांकन शिक्षकों के पैनल से कराया जाता है। बीएचएमएस की कॉपियों के पुनर्मूल्यांकन में दोनों ही व्यवस्थाओं पर अमल नहीं किया गया। 

डीन ने दिया था यह तर्क

डीन की ओर से यह तर्क दिया गया था कि कॉपियों का मूल्यांकन प्राइवेट कॉलेजों के शिक्षकों से कराया गया, जबकि उनकी ओर से भेजे गए पैनल में प्राइवेट शिक्षकों का नाम नहीं था। छात्र-छात्राओं का परिणाम संतोषजनक नहीं है। वहीं सूत्रों के अनुसार मूल्यांकन में महज दो प्राइवेट कॉलेज के शिक्षक थे। किसी स्थिति में परीक्षा समिति में रखे बिना पुनर्मूल्यांकन नहीं कराया जाना चाहिए था। 8 अगस्त 2022 को परीक्षा समिति की बैठक हुई, उसमें भी प्रकरण को रखा नहीं गया।  

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed