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बीएड फर्जीवाड़ा: सेवानिवृत्त जज की जांच में सात दोषी, तीन कुलसचिव की भूमिका संदिग्ध

Mon, 21 Nov 2022 06:11 AM IST
धीरेन्द्र सिंह अमर उजाला ब्यूरो, आगरा
अमर उजाला ब्यूरो, आगरा Published by: धीरेन्द्र सिंह Updated Mon, 21 Nov 2022 06:11 AM IST
सार

कुलसचिव डॉ. विनोद कुमार सिंह ने बताया कि पूर्व के मामले की जांच रिपोर्ट परीक्षा समिति में रखी थी, इसमें कुछ बिंदु और जोड़कर, इनकी भी जांच करने के लिए समिति के अध्यक्ष से अपील की है। इन बिंदुओं पर जांच होने के बाद कार्रवाई तय होगी।
 

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Agra University BEd Scam Seven convicted in investigation of retired judge role of three registrars suspected
फर्जीवाड़ा

विस्तार

डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय के बीएड 2012-13 सत्र के फर्जीवाड़ा में सात शिक्षक-कर्मचारी दोषी पाए हैं। पूर्व में तैनात रहे तीन कुलसचिवों की भूमिका भी संदिग्ध बताई है। जांच पूरी होने के बाद समिति ने इसे परीक्षा समिति की बैठक में रखा था, जहां कुछ और बिंदुओं पर जांच करने की संस्तुति करते हुए समिति को भेजा है। 

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बीएड 2012-13 में 250 से अधिक कॉलेजों के करीब 18 हजार छात्रों ने परीक्षा थी। इनके मूल्यांकन में धांधली की। प्राप्तांकों से छेड़छाड़ करते हुए मनमाने अंक दर्ज कर दिए। रिकार्ड के तौर पर सुरक्षित रखे जाने वाली फोइल और चार्ट भी गायब कर दिए थे। इस पर छात्र संगठनों ने जमकर विरोध किया, इस पर तत्कालीन कुलपति ने 2014-15 से सेवानिवृत्त जज से जांच करवाई। करीब सात साल बाद जांच पूरी हुई और इसे शनिवार को हुई परीक्षा समिति की बैठक में रखा।

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25 पेज की है रिपोर्ट 

25 पेज की इस रिपोर्ट में मूल्यांकन करवाने की जिम्मेदारी संभाल रहे चार शिक्षक और तीन कर्मचारियों को दोषी बताया है। उस दौरान तैनात रहे तीन कुलसचिवों ने सकी जांच नहीं की और उनकी भूमिका भी संदिग्ध मिली है। शनिवार को परीक्षा समिति की बैठक में रिपोर्ट पढ़ने के बाद समिति के सदस्यों ने कुछ और बिंदुओं पर जांच करने के लिए सिफारिश की है। कुलसचिव डॉ. विनोद कुमार सिंह ने बताया कि पूर्व के मामले की जांच रिपोर्ट परीक्षा समिति में रखी थी, इसमें कुछ बिंदु और जोड़कर, इनकी भी जांच करने के लिए समिति के अध्यक्ष से अपील की है। इन बिंदुओं पर जांच होने के बाद कार्रवाई तय होगी।

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कोर्ट के आदेश पर दी जा रही हैं अंकतालिका 

बीएड 2012-13 की कापियों में छेड़छाड़ के बाद परिणाम भी रुक गया था। इस पर छात्रों ने 2019 में फरवरी में 32 दिन तक छात्रों ने धरना दिया। इस पर विश्वविद्यालय की ओर से बनी आंतरिक समिति ने जिन कापियों में कोई गड़बड़ी नहीं मिली थी, उनका परिणाम तैयार कर दिया। कोर्ट से अनुमति लाने वाले छात्र को अंकतालिका और डिग्री दी जाने लगी। बाकी के 6674 कापियों में छेड़छाड़ मिलने के बाद इन पर शिक्षकों ने हस्ताक्षर करने से इंकार कर दिया था। 

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