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UP: आगरा में बनेगी एडवांस बाल रोग यूनिट, 200 बेड की होगी क्षमता; शासन से मिल गई मंजूरी
Thu, 06 Nov 2025 09:47 AM IST
धीरेन्द्र सिंह
अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
Published by: धीरेन्द्र सिंह
Updated Thu, 06 Nov 2025 09:47 AM IST
सार
आगरा के एसएन मेडिकल कॉलेज में 200 बेड की क्षमता वाली एडवांस बाल रोग यूनिट बनेगी। बाल रोग विभाग के प्रस्ताव को शासन से मंजूरी मिल गई है।
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एसएन मेडिकल कॉलेज
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
एसएन मेडिकल कॉलेज के एडवांस बाल रोग विभाग के प्रस्ताव को शासन से मंजूरी मिल गई है। इसका निर्माण लोक निर्माण विभाग करेगा। आठ मंजिला इमारत होगी। इसके लिए पीडब्ल्यूडी की टीम ने भूमि का सर्वे कर रिपोर्ट भी बना ली है। अगले महीने से निर्माण प्रक्रिया शुरू हो जाएगी। इसमें बाल रोग की जांच, इलाज और सर्जरी समेत सभी सुविधाएं एक ही इमारत में मिलने लगेंगी।
इंटीग्रेटेड योजना में आठ मंजिला भवन का निर्माण करीब 70 करोड़ रुपये से होगा। इसमें 200 बेड की क्षमता होगी। अभी 120 बेड की क्षमता है। 50 बेड के एनआईसीयू और पीआईसीयू होंगे। इनमें जीवनरक्षक उपकरण लगाए जाएंगे। वेंटिलेटर की भी सुविधा होगी, जिससे गंभीर बच्चों का इलाज हो सकेगा। जांच के लिए पैथोलॉजी लैब सेंटर होगा। बच्चों में अस्थमा-टीबी के इलाज के लिए ब्रोंकोस्कॉपी लैब भी होगी। पेट रोग की बीमारियों की जांच के लिए एंडोस्कॉपी लैब भी होगी। दो एडवांस मॉड्यूलर ऑपरेशन थिएटर होंगे, जिसमें आधुनिक मशीनें और उपकरण लगेंगे। सर्जरी में आर्टिफिशयल इंटेलीजेंस की मदद ली जाएगी। ओपीडी परिसर के साथ चिकित्सकों के चैंबर बनाए जाएंगे। इस भवन में सेमिनार हॉल भी होगा। यह पूरी इमारत 18 महीने में बनकर तैयार हो जाएगी।
अति गंभीर रोगों का भी मिल सकेगा इलाज
प्राचार्य डॉ. प्रशांत गुप्ता ने बताया कि लोक निर्माण विभाग की इंजीनियरिंग, प्रोक्योरमेंट और कंस्ट्रक्शन की टीम ने सर्वे कर लिया है। इसके बनने से बच्चों की अति गंभीर बीमारियों का इलाज और सर्जरी की सुविधा मिल सकेगी। दूसरे शहरों में इलाज के लिए जाने की जरूरत नहीं पड़ेगी। विशेषज्ञ चिकित्सकों की भी नियुक्ति की जाएगी।
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बाल रोग, प्रसूति रोग विभाग से होगी कनेक्टिविटी
एडवांस बाल रोग विभाग एसएन मेडिकल कॉलेज के स्त्री एवं प्रसूति रोग विभाग के नजदीक बनेगा। इसके आगे मेटरनिटी होम भी है। इन तीनों इमारतों को छत के जरिये से एक दूसरे से जोड़ा जाएगा। प्रसव के बाद किसी नवजात की हालत गंभीर होने पर उसे तत्काल एनआईसीयू में शिफ्ट कर दिया जाएगा। तीनों विभाग के चिकित्सक आपसी समन्वय से इलाज कर सकेंगे।
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इंटीग्रेटेड योजना में आठ मंजिला भवन का निर्माण करीब 70 करोड़ रुपये से होगा। इसमें 200 बेड की क्षमता होगी। अभी 120 बेड की क्षमता है। 50 बेड के एनआईसीयू और पीआईसीयू होंगे। इनमें जीवनरक्षक उपकरण लगाए जाएंगे। वेंटिलेटर की भी सुविधा होगी, जिससे गंभीर बच्चों का इलाज हो सकेगा। जांच के लिए पैथोलॉजी लैब सेंटर होगा। बच्चों में अस्थमा-टीबी के इलाज के लिए ब्रोंकोस्कॉपी लैब भी होगी। पेट रोग की बीमारियों की जांच के लिए एंडोस्कॉपी लैब भी होगी। दो एडवांस मॉड्यूलर ऑपरेशन थिएटर होंगे, जिसमें आधुनिक मशीनें और उपकरण लगेंगे। सर्जरी में आर्टिफिशयल इंटेलीजेंस की मदद ली जाएगी। ओपीडी परिसर के साथ चिकित्सकों के चैंबर बनाए जाएंगे। इस भवन में सेमिनार हॉल भी होगा। यह पूरी इमारत 18 महीने में बनकर तैयार हो जाएगी।
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अति गंभीर रोगों का भी मिल सकेगा इलाज
प्राचार्य डॉ. प्रशांत गुप्ता ने बताया कि लोक निर्माण विभाग की इंजीनियरिंग, प्रोक्योरमेंट और कंस्ट्रक्शन की टीम ने सर्वे कर लिया है। इसके बनने से बच्चों की अति गंभीर बीमारियों का इलाज और सर्जरी की सुविधा मिल सकेगी। दूसरे शहरों में इलाज के लिए जाने की जरूरत नहीं पड़ेगी। विशेषज्ञ चिकित्सकों की भी नियुक्ति की जाएगी।
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बाल रोग, प्रसूति रोग विभाग से होगी कनेक्टिविटी
एडवांस बाल रोग विभाग एसएन मेडिकल कॉलेज के स्त्री एवं प्रसूति रोग विभाग के नजदीक बनेगा। इसके आगे मेटरनिटी होम भी है। इन तीनों इमारतों को छत के जरिये से एक दूसरे से जोड़ा जाएगा। प्रसव के बाद किसी नवजात की हालत गंभीर होने पर उसे तत्काल एनआईसीयू में शिफ्ट कर दिया जाएगा। तीनों विभाग के चिकित्सक आपसी समन्वय से इलाज कर सकेंगे।