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सिपाही ने ड्यूटी पर दी जान: 'वर्दी में भेजा, कफन में लिपटा आया', बेटे की लाश देख फफक पड़े पिता; बेसुध हुई मां

Fri, 17 Jul 2026 12:12 AM IST
Arun Parashar संवाद न्यूज एजेंसी, आगरा
संवाद न्यूज एजेंसी, आगरा Published by: Arun Parashar Updated Fri, 17 Jul 2026 12:12 AM IST
सार

पिता का कहना था कि बेटे ने पुलिसकर्मियों के उत्पीड़न से परेशान होकर आत्महत्या की। उसने अपना ऑडियो भी बनाया है। इसलिए जब तक आरोपी पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई नहीं होती, तब तक अंतिम संस्कार नहीं करेंगे। 

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Agra resident constable commits suicide on duty in bulandshahr after harassment
सिपाही का फाइल फोटो। - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी

विस्तार

बुलंदशहर के औरंगाबाद थाना क्षेत्र की लखावटी पुलिस चौकी पर तैनात रहे आगरा के गांव सिंगेचा निवासी सिपाही सुधीर सिंह का शव बृहस्पतिवार देर रात गांव लाया गया। इससे परिवार की महिलाओं में चीख पुकार मच गई। मां-पिता का हाल-बेहाल हो गया। आसपास के गांवों के सैकड़ों की संख्या में ग्रामीण पहुंच गए। पिता का कहना था कि वर्दी में बेटे को ड्यूटी पर भेजा था। लाैटकर कफन में आया। जो भी बेटे की माैत के लिए जिम्मेदार है, उसे सख्त सजा मिलनी चाहिए। उन्हें न्याय मिलना चाहिए। परिजन ने देर रात ऐलान कर दिया कि आरोपी पुलिसकर्मियों की गिरफ्तारी तक अंतिम संस्कार नहीं करेंगे। इस पर पुलिस प्रशासनिक अधिकारी पहुंच गए। विधायक छोटेलाल वर्मा और पूर्व विधायक डाॅ. राजेंद्र सिंह पहुंच गए।
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सुधीर की मौत की जानकारी के बाद से ही गांव सिंगेचा में परिजन और अन्य लोगों का जुटना शुरू हो गया था। गांव में भी बड़ी संख्या में ग्रामीण जुट गए। किसी के घर में चूल्हे नहीं जले। ग्रामीणों ने बताया कि सुधीर काफी मिलनसार थे। वह सभी का सहयोग करते थे। वह छुट्टी लेकर जब भी गांव आते थे, सबसे मिलकर जाते थे। हालचाल पूछते थे। रिश्ते के भाई रणवीर सिंह ने बताया कि सुधीर के पिता जगवीर सिंह ऑटो चलाते हैं। इससे ही घर का खर्च चलता है। परिवार के पास कुछ जमीन है। बड़ा भाई कृष्णा और छोटा भाई पवन है। मां गुड्डी देवी आशा बीमार रहती हैं। परिवार की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं है। सुधीर ही परिवार का अकेला था, जिसकी सरकारी नौकरी लगी थी। वह परिवार का एकमात्र सहारा था। उससे सभी को काफी उम्मीद थी। सुधीर छोटे भाई से भी पुलिस में भर्ती होने के लिए कह रहा था। इसके लिए उसे तैयारी करा रहा था।
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देर शाम शव घर लाया गया। इससे पहले ही सैकड़ों की संख्या में ग्रामीण और रिश्तेदार जुट गए। परिवार के लोगों ने अंतिम संस्कार करने से मना कर दिया। पिता का कहना था कि बेटे ने पुलिसकर्मियों के उत्पीड़न से परेशान होकर आत्महत्या की। उसने अपना ऑडियो भी बनाया है। इसलिए जब तक आरोपी पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई नहीं होती, तब तक अंतिम संस्कार नहीं करेंगे। इसकी जानकारी पर एसीपी शमसाबाद राजीव रंजन श्रीवास्तव आसपास के थानों की फोर्स के साथ पहुंच गए। उन्होंने परिजन से बात की। कार्रवाई का आश्वासन दिया। मगर परिजन लिखित आश्वासन के बाद ही अंतिम संस्कार की कहने लगे। बाद में भाजपा विधायक छोटेलाल वर्मा और पूर्व विधायक डा. राजेंद्र सिंह भी पहुंच गए। उन्होंने भी मृतक के परिजन से बात की।

बेसुध हुई मां, पिता फूट-फूटकर रोये
बेटे का शव देख मां फूट-फूटकर रोने लगीं। वह बेटा-बेटा कहकर चिल्ला रही थीं। बार-बार बेहोश हाे जाती। उन्हें परिवार की महिलाएं किसी तरह संभालतीं। होश में आने पर बेटे को पुकारने लगतीं। यह दृश्य देखकर आसपास खड़े लोगों की आंखों से भी आंसू निकलने लगे। वहीं पिता भी फूट-फूटकर रोये जा रहे थे। उन्हें रिश्तेदार किसी तरह संभाल रहे थे। उनका कहना था कि बुढ़ापे का सहारा छीन लिया। बेटे ने किसी का क्या बिगाड़ा था।
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