आगरा: 11 महीने में चार हत्याओं का राज नहीं ढूंढ सकी पुलिस, तीन थाना क्षेत्रों में फेंके गए थे शव
आगरा पुलिस हाईटेक पुलिसिंग का दंभ भरती है। पहचान एप में अपराधियों का डाटा फीड किया जा रहा है। मिशन शक्ति अभियान में जागरूक करने से लेकर महिला संबंधी अपराध में कार्रवाई तक पर जोर है। इसके बावजूद 11 माह में हुई तीन युवती और एक महिला की हत्या का राज पुलिस नहीं खोल पा रही है।
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विस्तार
बाबरपुर के पास हाईवे पर मिला था महिला का शव
14 दिसंबर 2020 को सिकंदरा क्षेत्र में गांव बाबरपुर के पास हाईवे पर सड़क किनारे 60 वर्षीय महिला का शव मिला था। उसके सिर में चोट का निशान था।
एक्सप्रेसवे पर मिली थी युवती की अधजली लाश
छह फरवरी को यमुना एक्सप्रेसवे पर खंदौली क्षेत्र में टोल प्लाजा के पास 25 वर्षीययुवती का शव मिला था। हत्या कर शव को जलाने की कोशिश भी की गई थी।
हत्या कर शव को जलाने की कोशिश की गई थी
27 मई को सिकंदरा क्षेत्र में अंसल कोर्टयार्ड के पास जंगल में एक युवती की लाश मिली थी। हत्या के बाद शव को जलाने की कोशिश की गई थी।
झरना नाले के पास फेंका गया था युवती का शव
30 मई को थाना एत्मादपुर क्षेत्र में झरना नाला के पास जंगल में 30 वर्षीय युवती का शव फेंका गया था। मृतका के हाथ-पैर भी बांधे गए थे। मामले में कोई सुराग नहीं लगा है।
सवाल नंबर-एक आखिर कौन थीं
तीन युवती और एक महिला आखिर कौन थीं? यह आज तक सवाल ही बना हुआ है। पुलिस के मुताबिक, महिलाओं की पहचान के लिए आसपास के जिलों जैसे मथुरा, फिरोजाबाद, मैनपुरी, धौलपुर, ग्वालियर, मुरैना, दिल्ली एनसीआर तक कोशिश की गई है। उनके फोटो मिलान किए गए, लेकिन जानकारी नहीं हो सकी। सिकंदरा के अंसल कोर्टयार्ड में मिली युवती की पहचान के लिए स्केच भी बनवाया गया, लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ। थानों में पोस्टर चिपका दिए गए हैं।
सवाल नंबर-दो क्यों मारकर फेंका
मृतकाओं की पहचान नहीं हो पाने के कारण हत्याएं भी राज बनकर रह गईं हैं। उन्हें क्यों मारा गया? यह सवाल ही बना हुआ है। ऐसे में कातिल जो भी है, वह पुलिस की पकड़ से दूर है। अमूमन हाईवे और एक्सप्रेसवे के किनारे के इलाके अपराधियों के लिए काफी मुफीद साबित हो रहे हैं।
हाईवे और एक्सप्रेसवे पर रात में पुलिस की गश्त नहीं रहती है। कैमरे भी हर जगह पर नहीं लगे हैं। जब तक शव फेंके जाने का पता चलता है, कई वाहन निकल चुके होते हैं। ऐसे में कैमरे से भी शव लेकर आने और ले जाने वालों की पहचान संभव नहीं है।
पुलिस नोएडा गई लेकिन कुछ नहीं हुआ
खंदौली में मिले शव की शिनाख्त को 12 जिलों में पोस्टर चस्पा किए गए। घटनास्थल पर एक माचिस की डिब्बी मिली थी। माचिस बनाने वाली कंपनी तमिलनाडु की थी। पुलिस यह पता करना चाहती थी कि माचिस की सप्लाई किन-किन जिलों में होती है। इस पर टीम तमिलनाडु गई। वहां से पता चला कि माचिस की सप्लाई नोएडा में होती थी। फिर पुलिस नोएडा गई, लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ।
भरतपुर में भी नहीं लगा कोई सुराग
सिकंदरा क्षेत्र में अंसल कोर्टयार्ड के पास जंगल में मिला शव राजस्थान से लाकर फेंके जाने की आशंका थी। क्योंकि घटनास्थल से बिचपुरी मार्ग होते हुए भरतपुर जा सकते हैं। ऐसे में भरतपुर टीम गई। वहीं एनसीआर में भी टीम गई। यहां लापता युवतियों की जानकारी की गई, लेकिन मृतका के जैसी युवती की गुमशुदगी और पहचान के लिए कोई नहीं मिला। वहीं हाईवे किनारे मिले महिला के शव के मामले में मथुरा, दिल्ली तक टीम गई।
पहचान के लिए कोई सामने नहीं आया
एत्मादपुर में युवती की हत्या कर शव फेंके जाने के मामले में एक्सप्रेसवे और अलीगढ़ के रास्तों पर पड़ने वाले थानों में दर्ज युवतियों की गुमशुदगी के बारे में पता किया गया। मगर, गुमशुदा युवतियों से मृतका की पहचान नहीं हो सकी।
इसके अलावा पुलिस टीम फिरोजाबाद, एटा, मैनपुरी, हाथरस, अलीगढ़ और नोएडा में पोस्टर चस्पा करके आई। मगर, पहचान के लिए कोई सामने नहीं आया। इसके बाद पुलिस हत्याकांड को भूल गई।
एसएसपी सुधीर कुमार सिंह से सीधी बात
सवाल : महिला और युवतियों की हत्याओं का खुलासा क्यों नहीं हो पाया?
जवाब : चारों केस में संबंधित थाना पुलिस से जानकारी ली जाएगी और उसके बाद समीक्षा की जाएगी।
सवाल : अभी तक केसों में क्या कार्रवाई की गई? समीक्षा कैसे होगी।
जवाब : विवेचक से केस की समीक्षा रिपोर्ट ली जाएगी। उन्होंने क्या किया? पहचान के लिए क्या प्रयास किए? कहां-कहां गए? देखा जाएगा कि क्यों पहचान नहीं हो सकी? इसकी रिपोर्ट ली जाएगी।
सवाल : शिनाख्त के प्रयास क्यों सफल नहीं रहे?
जवाब : अज्ञात शव मिलने पर डिस्ट्रिक्ट क्राइम रिकॉड ब्यूरो (डीसीआरबी) और नेशनल क्राइम रिकॉड ब्यूरो (एनसीआरबी) से फोटो का मिलान कराया जाता है। पहचान नहीं होने पर पोस्टर चस्पा कराए जाते हैं। सोशल मीडिया पर भी फोटो शेयर किया जाता है। गुमशुदगी दर्ज नहीं होने और किसी के पहचान नहीं करने से यह समस्या आती है।