श्री पारस अस्पताल: जांच के लिए भटक रही डीवीआर, लखनऊ से लौटी, अब गाजियाबाद भेजने की तैयारी
मॉकड्रिल मामले मामले की जांच के लिए कब्जे में ली गई श्री पारस अस्पताल की डीवीआर जांच के लिए इधर-उधर भटक रही है। इसे लखनऊ फोरेंसिक लैब भेजा गया था। वहां सुविधा न होने पर डीवीआर को वापस आगरा की लैब में जांच के लिए भेजा दिया गया।
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आगरा के श्री पारस अस्पताल की डीवीआर जांच के लिए भटक रही है। ऑक्सीजन की मॉकड्रिल का सच जानने के लिए पुलिस ने सीसीटीवी कैमरों की डीवीआर को जब्त किया था। इसे लखनऊ फोरेंसिक लैब भेजा गया था। वहां सुविधा न होने पर डीवीआर को वापस आगरा की लैब में जांच के लिए भेजा दिया गया।
आगरा लैब में जांच की सुविधा न होने की वजह से उसे गाजियाबाद के मोदी नगर स्थित लैब भेजा जाएगा। अब डीवीआर थाना न्यू आगरा में ही रखा गया है। पुलिस उसे गुरुवार को गाजियाबाद भेज सकती है।
श्री पारस अस्पताल के मालिक डॉ. अरिंजय जैन का सात जून को एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था। इसमें वो ऑक्सीजन की मॉकड्रिल की बात कर रहे थे। इसमें मरीजों के छंटने की बात कही थी। वीडियो सामने आने के बाद प्रशासन ने कार्रवाई की थी। अस्पताल पर सील लगा दी गई। ऑक्सीजन की कमी को लेकर भ्रम फैलाने के आरोप में मुकदमा दर्ज कराया गया। पुलिस ने अपनी जांच शुरू की।
वीडियो बनाने वाले की तलाश
वीडियो के बाद मरीजों के परिजन सामने आए। उन्होंने आक्सीजन बंद करने से उनके मरीजों की मौत का आरोप लगाया। इसमें तहरीर दीं। पुलिस ने 22 लोगों के बयान लिए। वीडियो बनाने वाले की तलाश की। मगर, अस्पताल के कोविड वार्ड से लेकर अन्य स्थानों पर लगे सीसीटीवी कैमरों के फुटेज को दरकिनार कर दिया।
मॉकड्रिल का सच जानने के लिए अस्पताल के सीसीटीवी कैमरों की फुटेज देखे जाने का मुद्दा उठने पर पुलिस ने 26 जून को डीवीआर जब्त की थी। इसमें 26, 27 और 28 अप्रैल के सीसीटीवी कैमरों के फुटेज देखे जाने थे। डॉ. अरिंजय जैन ने पुलिस को दिए बयान में कहा था कि डीवीआर से सिर्फ सात दिन के फुटेज मिल सकते हैं। इसके बाद डिलीट हो जाते हैं।
पुलिस ने डिलीट वीडियो को रिकवर कराने के लिए डीवीआर को एफएसएल लखनऊ भेजा था। मगर, वहां डीवीआर की जांच की सुविधा नहीं थी। इस पर उसे आगरा एफएसएल को वापस कर दिया गया। पुलिस ने उसे आगरा फोरेंसिक लैब में भेजा। मगर, यहां भी सुविधा न होने की वजह से डीवीआर को वापस थाने भेज दिया गया। डीवीआर की जांच गाजियाबाद के मोदी नगर स्थित लैब में हो सकती है।
एसपी सिटी बोत्रे रोहन प्रमोद ने बताया कि लखनऊ और आगरा की विधि विज्ञान प्रयोगशाला में डीवीआर की जांच की सुविधा नहीं है। अब उसे गाजियाबाद के मोदी नगर की लैब में भेजा जाएगा। इसके लिए थाना प्रभारी निरीक्षक भूपेंद्र बालियान को निर्देशित कर दिया गया है। वहीं प्रकरण में जांच की जा रही है।
कहां हैं युवक और चांदी कारोबारी के मोबाइल
पुलिस ने वीडियो बनाने के शक में छत्ता के जीवनी मंडी निवासी युवक और गांधी नगर निवासी चांदी कारोबारी विनय बंसल को पूछताछ के लिए पकड़ा था। उनसे पूछा था कि वीडियो बनाया या नहीं, मगर, दोनों ने इन्कार कर दिया था। इस पर पुलिस ने दोनों के मोबाइल जब्त किए थे। इनमें वीडियो नहीं मिले। वीडियो को डिलीट करने की आशंका पर एफएसएल भेजा गया। मगर, अब यही आशंका है कि इनको भी गाजियाबाद भेजा जाएगा।
जनमंच ने प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री को भेजा ज्ञापन
श्री पारस अस्पताल प्रकरण की सीबीआई/न्यायिक जांच की मांग को लेकर बुधवार को पश्चिमी उत्तर प्रदेश राज्य निर्माण जनमंच ने हाईकोर्ट में पीआईएल दाखिल करने से पूर्व एक बैठक की। इस दौरान रजिस्टर्ड डाक से प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री और राज्यपाल को ज्ञापन दिया गया।
इसमें कहा गया कि श्री पारस अस्पताल में ऑक्सीजन की मॉकड्रिल की गई है। इससे आम जनता में आक्रोश है। इसके बावजूद पुलिस प्रशासन ने कार्रवाई नहीं की। आरोपियों को नहीं पकड़ा गया है। वह खुलेआम घूम रहे हैं। लोग हास्पिटल संचालक के खिलाफ कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। इसके बावजूद हॉस्पिटल को पूर्व में ही क्लीन चिट दे दी गई।
अब जनता और मृतकों के परिजनों ने प्रशासन के प्रति विश्वास नहीं है। ज्ञापन के माध्यम से मांग की गई कि प्रकरण की निष्पक्ष सीबीआई या न्यायिक जांच कराई जाए। बैठक में चौधरी अजय सिंह, भारत सिंह, वीरेंद्र फौजदार, सुरेंद्र लाखन, राकेश भटनागर, चौधरी हरदयाल सिंह, विनय अग्रवाल, आदि मौजूद रहे।