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'आगरा मॉडल' की फिर हो रही तारीफ, कोरोना संक्रमण रोकने के लिए मेरठ-गाजियाबाद में होगा लागू
Mon, 06 Jul 2020 09:55 AM IST
मुकेश कुमार
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
Published by: मुकेश कुमार
Updated Mon, 06 Jul 2020 09:55 AM IST
सार
- अप्रैल और मई में आगरा मॉडल पर उठे थे सवाल
- जून और जुलाई में संक्रमण दर घटने पर हो रही तारीफ
- डीएम ने कहा, सेंटर की जगह होम क्वारंटीन व्यवस्था से थमा संक्रमण
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आगरा में कोरोना वायरस
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
कोरोना संक्रमण रोकने के लिए एक बार फिर 'आगरा' मॉडल की तारीफ हो रही है। अब इसे मेरठ और गाजियाबाद में लागू किया जाएगा। इसके लिए आगरा के सरोजिनी नायडू मेडिकल कॉलेज (एसएनएमसी) के वरिष्ठ चिकित्सक को शासन ने बुलाया है।
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एसएन मेडिकल कॉलेज के मेडिसिन विभाग के वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. टीपी सिंह को मुख्यमंत्री के निर्देश पर गाजियाबाद और मेरठ में संक्रमण के नियंत्रण की जिम्मेदारी दी गई है। वो लखनऊ में दो दिन रुककर कोरोना संक्रमित मरीजों का इलाज, जांच, आइसोलेशन वार्ड में इंतजाम, चिकित्सकीय स्टाफ की कार्ययोजना का आकलन करेंगे।
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इसके बाद आगरा में अपनाई जा रही कार्ययोजना, जांच, इलाज और बचाव की रिपोर्ट बनाकर मुख्यमंत्री के सुपुर्द की जाएगी। प्राचार्य डॉ. संजय काला ने बताया कि कोरोना वायरस के संक्रमण के तेजी से बढ़ते मामलों को रोकने के लिए योजना बनाकर काम किया है।
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अब यही मॉडल गाजियाबाद-मेरठ में लागू होगा। इसके लिए मेडिसिन विभाग के सीनियर चिकित्सक को शासन के निर्देश पर वहां भेजा गया है, वो आकलन कर आगरा मॉडल की व्यवस्थाओं की संस्तुति करेंगे।
ये दिए गए सुझाव
- ट्राएज ओपीडी की व्यवस्था कर बुखार-जुकाम, खांसी समेत कोरोना वायरस के लक्षणों वाले संदिग्ध मरीजों की स्क्रीनिंग की जाए।
- लक्षण मिलने पर संदिग्ध मरीज को भर्ती करते हुए ट्रू नॉट मशीन से जांच हो, जिससे घंटे-दो घंटे में रिपोर्ट आने के बाद इलाज शुरू हो सके।
- आइसोलेशन वार्ड में प्रसव कक्ष, ऑपरेशन थिएटर, डायलिसिस की व्यवस्था। स्टाफ की रोस्टर प्लान से ड्यूटी दी जाए।
जनप्रतिनिधियों ने उठाए थे सवाल
'आगरा' मॉडल पर राज्यमंत्री, सांसद और विधायकों ने सवाल उठाए थे। अप्रैल-मई में रोज 30 से 40 केस मिल रहे थे। जनप्रतिनिधियों ने बैठक कर पूछा था कि यह कैसा आगरा मॉडल है, जिससे संक्रमण रुक ही नहीं रहा।
संबंधित खबर: आगरा में कोरोना संक्रमितों की मौत पर उठे सवाल, जब मरीज कम हुए तो मृतकों की संख्या क्यों बढ़ी ?
जिस आगरा मॉडल पर अप्रैल और मई में सवाल उठ रहे थे, उसे शासन के फिर से पसंद करने की वजह इस बार आगरा में केस दोगुना होने में 60 दिन का समय लगना है।
पांच मई को संक्रमितों की संख्या 640 थी, पांच जुलाई को 60 दिन बाद यह 1280 हुई। इससे पहले ये 15 दिन में दोगुना हुए थे। अप्रैल और मई में तो सात दिन में ही दोगुना हो गए थे। अब सिर्फ 3.04 फीसदी सैंपल पॉजिटिव आ रहे हैं।
संबंधित खबर: घेरे में आगरा मॉडल: सात दिन में 158 नए मरीज मिलने से ध्वस्त हुए इंतजाम
डीएम प्रभु एन सिंह का कहना है कि संक्रमण की रफ्तार बढ़ने की चार वजह थीं। पहले सैंपल टेस्ट के लिए पुणे व केजीएमयू भेजे जा रहे थे। टेस्ट में देर हो रही थी। दूसरा कारण था कि संक्रमण की एक के बाद एक चेन बन रहीं थी। इसे पूल टेस्टिंग से रोका गया।
पांच मई को संक्रमितों की संख्या 640 थी, पांच जुलाई को 60 दिन बाद यह 1280 हुई। इससे पहले ये 15 दिन में दोगुना हुए थे। अप्रैल और मई में तो सात दिन में ही दोगुना हो गए थे। अब सिर्फ 3.04 फीसदी सैंपल पॉजिटिव आ रहे हैं।
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डीएम प्रभु एन सिंह का कहना है कि संक्रमण की रफ्तार बढ़ने की चार वजह थीं। पहले सैंपल टेस्ट के लिए पुणे व केजीएमयू भेजे जा रहे थे। टेस्ट में देर हो रही थी। दूसरा कारण था कि संक्रमण की एक के बाद एक चेन बन रहीं थी। इसे पूल टेस्टिंग से रोका गया।
मई में बदली रणनीति
तीसरा कारण, क्वारंटीन सेंटर्स में संक्रमण फैलना था। मई में पॉलिसी बदली। क्वारंटीन सेंटर्स की जगह होम क्वारंटीन व्यवस्था की। इससे जून में संक्रमण की चेन टूट गई। चौथा कारण हेल्थ वर्कर्स और चिकित्सकों का कम संख्या में प्रशिक्षित होना था। हमने उनके विशेष प्रशिक्षण की व्यवस्था की। वे संक्रमण से बचे।
अप्रैल में एक दिन में दोगुना हो गए थे संक्रमित
अप्रैल में एक दिन में दोगुना हो गए थे संक्रमित
| कोरोना के केस | तारीख | दोगुने होने में समय |
| 05 | दो मार्च | - |
| 10 | 26 मार्च | 24 दिन |
| 20 | 1 अप्रैल | 06 दिन |
| 46 | 2 अप्रैल | 01 दिन |
| 83 | 7 अप्रैल | 05 दिन |
| 167 | 14 अप्रैल | 07 दिन |
| 320 | 20 अप्रैल | 06 दिन |
| 640 | 5 मई | 15 दिन |
| 1280 | 5 जुलाई | 60 दिन |