आगरा मेट्रो: ताज पूर्वी गेट पर जर्मन तकनीक से अर्थिंग का काम हुआ शुरू, जानिए लगेगा कितना समय
मेट्रो ट्रैक का विद्युतीकरण 453 करोड़ रुपये से होगा। ट्रैक के सहारे बिजली आपूर्ति के लिए तीसरी रेल लाइन बिछाई जाएगी। तीन भूमिगत स्टेशन और मेट्रो डिपो के विद्युतीकरण में 13 महीने का समय लगेगा।
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आगरा मेट्रो ट्रैक के विद्युतीकरण से पहले ताज पूर्वी गेट स्टेशन पर बृहस्पतिवार से अर्थिंग का काम शुरू हो गया है। डिपो में पटरियां बिछाईं जा रही हैं। अर्थिंग के बाद ट्रेन चलाने के लिए बिजली आपूर्ति को ट्रैक के सहारे तीसरी रेल लाइन बिछाई जाएगी। विद्युतीकरण पर 453 करोड़ रुपये खर्च होंगे और काम पूरा होने में चार साल का समय लगेगा।
पहले चरण में छह स्टेशन का विद्युतीकरण होगा। इसमें ताज पूर्वी गेट, बसई और फतेहाबाद रोड मेट्रो स्टेशन शामिल हैं। इसके अलावा तीन भूमिगत स्टेशन ताजमहल, आगरा किला व जामा मस्जिद और मेट्रो डिपो के विद्युतीकरण में 13 महीने का समय लगेगा। उत्तर प्रदेश मेट्रो रेल कॉरपोरेशन (यूपीएमआरसी) ने एलएंडटी कंपनी को 453 करोड़ रुपये का ठेका दिया है।
यूपीएमआरसी के प्रबंध निदेशक कुमार केशव के अनुसार थर्ड रेल एक जर्मन तकनीक है। इसमें रेल की पटिरयों के सहारे तीसरी रेल लाइन बिछाई जाती है, जो ट्रेन को बिजली आपूर्ति करती है। उन्होंने बताया कि ताज पूर्वी गेट स्टेशन पर अर्थिंग के लिए पिलर के सहारे तार बिछाए जा रहे हैं। आगरा मेट्रो में दो कॉरिडोर प्रस्तावित हैं। 29 किमी. ट्रैक बिछेगा। 27 स्टेशन बनेंगे। फिलहाल फतेहाबाद रोड पर तीन स्टेशन निर्माणाधीन हैं।
बता दें उत्तर प्रदेश मेट्रो रेल कॉरपोरेशन (यूपीएमआरसी) 15वीं पीएसी बटालियन के मैदान में 112 करोड़ रुपये की लागत से पहली मेट्रो डिपो का निर्माण कर रहा है। ट्रैक के लिए रूस में निर्मित हेड हार्डेड पटरियों का इस्तेमाल किया जा रहा है। हेड हार्डेड ट्रैक सामान्य रेल ट्रैक के मुकाबले में कम घिसता है। स्पीड बढ़ाने व ब्रेक लगाने पर ये पटरियां कम घर्षण उत्पन्न करती हैं।
हेड हार्डेड ट्रैक की खासियत
- पारंपरिक रेल ट्रैक की तुलना में अधिक मजबूत होता है।
- सामान्य रेल के मुकाबले अधिक भार सहने की क्षमता है।
- रेलवे ट्रैक की तरह अधिक रखरखाव नहीं करना पड़ता।
- रूस में निर्मित उच्च गुणवत्ता की स्टील का प्रयोग होता है।