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यूपी: बिना लाइसेंस वर्षों से कारोबार, मंडी अफसरों पर भी उठे सवाल; शासन ने मांगी रिपोर्ट
Mon, 19 Oct 2026 10:46 AM IST
Dhirendra Singh
अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
Published by: Dhirendra Singh
Updated Mon, 19 Oct 2026 10:46 AM IST
सार
आगरा में मंडी शुल्क के नाम पर एक लाख रुपये की कथित अवैध वसूली की शिकायत पर पूर्व मंडी सचिव और सेवानिवृत्त निरीक्षक जांच के दायरे में हैं। शासन के संज्ञान के बाद जिलाधिकारी ने जांच के आदेश दिए हैं। शिकायतकर्ता की फर्म के वर्षों से बिना लाइसेंस संचालित होने और तत्कालीन अधिकारियों की ओर से कार्रवाई नहीं किए जाने के आरोपों की भी पड़ताल होगी।
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मंडी टैक्स
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
शुल्क के नाम पर वसूली और बिना लाइसेंस व्यापार कराने के गंभीर मामले में मंडी समिति के अफसर घिर गए हैं। भ्रष्टाचार की शिकायत पर शासन स्तर पर मामला संज्ञान में आने के बाद जिला प्रशासन ने जांच शुरू कर दी है। शासन ने शिकायत करने वाले कारोबारी के खिलाफ भी बिना लाइसेंस कारोबार करने की जानकारी तलब की है।
घटवासन निवासी राजीव अग्रवाल ने तत्कालीन मंडी सचिव शिव कुमार राघव और सेवानिवृत्त मंडी निरीक्षक हरीबाबू के खिलाफ एक लाख रुपये मंडी शुल्क के नाम पर अवैध वसूली का आरोप लगाया था। शुरुआती जांच में शासन को पता चला कि प्रकरण में एक लाख रुपये के भ्रष्टाचार की बात कही गई है।
वहीं, शिकायतकर्ता कई वर्षों से बिना लाइसेंस फर्म का संचालन कर रहा था। इस मामले में मंडी समिति के तत्कालीन अधिकारियों और कर्मचारियों ने कार्रवाई नहीं की। ऐसे में शिकायतकर्ता और अधिकारियों-कर्मचारियों की भूमिका भी जांच के दायरे में आ गई है। शासन से मिली शिकायत पर जिलाधिकारी मनीष बंसल ने जांच के आदेश दे दिए हैं।
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शिकायत से सामने आया मिलीभगत का मामला
संबंधित फर्म वर्षों से बिना वैध लाइसेंस के मंडी में व्यापार कर रही थी और तत्कालीन जिम्मेदार अधिकारियों ने इस पर कोई सख्त कदम नहीं उठाया। शासन ने मामले में निर्देश दिए हैं कि जांच आख्या उपलब्ध कराई जाए, ताकि दोषी अधिकारियों पर नियमानुसार कार्रवाई की जा सके। जिलाधिकारी मनीष बंसल ने बताया कि शासन ने आईजीआरएस पोर्टल पर की गई एक शिकायत के संबंध में आख्या मांगी है। प्रकरण की जांच कराकर रिपोर्ट शासन को उपलब्ध कराई जाएगी।
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घटवासन निवासी राजीव अग्रवाल ने तत्कालीन मंडी सचिव शिव कुमार राघव और सेवानिवृत्त मंडी निरीक्षक हरीबाबू के खिलाफ एक लाख रुपये मंडी शुल्क के नाम पर अवैध वसूली का आरोप लगाया था। शुरुआती जांच में शासन को पता चला कि प्रकरण में एक लाख रुपये के भ्रष्टाचार की बात कही गई है।
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वहीं, शिकायतकर्ता कई वर्षों से बिना लाइसेंस फर्म का संचालन कर रहा था। इस मामले में मंडी समिति के तत्कालीन अधिकारियों और कर्मचारियों ने कार्रवाई नहीं की। ऐसे में शिकायतकर्ता और अधिकारियों-कर्मचारियों की भूमिका भी जांच के दायरे में आ गई है। शासन से मिली शिकायत पर जिलाधिकारी मनीष बंसल ने जांच के आदेश दे दिए हैं।
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शिकायत से सामने आया मिलीभगत का मामला
संबंधित फर्म वर्षों से बिना वैध लाइसेंस के मंडी में व्यापार कर रही थी और तत्कालीन जिम्मेदार अधिकारियों ने इस पर कोई सख्त कदम नहीं उठाया। शासन ने मामले में निर्देश दिए हैं कि जांच आख्या उपलब्ध कराई जाए, ताकि दोषी अधिकारियों पर नियमानुसार कार्रवाई की जा सके। जिलाधिकारी मनीष बंसल ने बताया कि शासन ने आईजीआरएस पोर्टल पर की गई एक शिकायत के संबंध में आख्या मांगी है। प्रकरण की जांच कराकर रिपोर्ट शासन को उपलब्ध कराई जाएगी।