Agra: बाधाओं पर भारी दिव्यांग खिलाड़ियों के हौसले, शानदार प्रदर्शन से खेलों में लहराया जीत का परचम
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
निशा ने उधार की व्हीलचेयर से जीते मेडल
आंवलखेड़ा के महावतपुर की रहने वाली पैरा खिलाड़ी निशा रावत के पिता होमगार्ड हैं। निशा ने 2019 से पैरा केनो कयाकिंग वाटर स्पोर्ट्स खेलना शुरू किया और 2020 में नेशनल में कांस्य मेडल जीतकर चौंका दिया। अगले ही साल में नेशनल में रजत और कांस्य पदक जीता। 2022 में थाईलैंड पैरा केनो कयाकिंग में कांस्य और नेशनल में एक रजत व कांस्य जीता था। निशा बताती हैं कि पहले स्पोर्ट्स व्हीलचेयर तक भी नहीं थी। उधार की व्हील चेयर से सहारे मेडल जीते। निशा यूपी की इकलौती वाटर स्पोर्ट्स खिलाड़ी हैं। निशा ने बताया कि इस खेल के लिए आगरा में कोई सुविधा तक नहीं है। भोपाल में कोचिंग करनी पड़ती है।
यश की चाहत दुनियाभर में फैले ‘यश’
दयालबाग के रहने वाले पैरा खिलाड़ी यश सिंह आर्थिक हालात के चलते दिन में एक वक्त भोजन करने के बाद भी देश के लिए कई मेडल जीत चुके हैं। वर्ष 2020 में राष्ट्रीय पैरा केनो कयाकिंग में स्वर्ण और रजत पदक जीता। 2021 में नेशनल में रजत, 2022 में नेशनल चैंपियनशिप में दो स्वर्ण पदक जीते। मार्च में थाईलैंड में आयोजित एशियन चैंपियनशिप में रजत व कांस्य पदक जीत चुके हैं। अगस्त में हुई विश्व चैंपियनशिप में पैसों के अभाव में वह प्रतिभाग नहीं कर सके। विश्व दिव्यांग दिवस पर सिर्फ यहीं कहना है कि पैरा खिलाड़ियों के लिए सरकार विभाग में जगह निकाले, जिससे आर्थिक परेशानियों को दूर कर सके।
पावर लिफ्टर संजय से हारीं बाधाएं
मधु नगर के दिव्यांग संजय कुमार को शुरू से ही जिम में व्यायाम और पढ़ाई का शौक था, लेकिन घर चलाने के लिए पढ़ाई पर ध्यान दिया। कोचिंग चलाने के साथ जिम में वर्क आउट करने के शौक ने खेल की तरफ रुचि बढ़ा दी और 2020 में स्टेट में पावर लिफ्टिंग में रजत पदक जीता। संजय का कहना है कि पिता और भाई को खोने के कारण हालिया प्रतियोगिताओं में भले ही हिस्सा नहीं ले सके हैं, मगर उनका सपना ज्यादा से ज्यादा प्रतियोगिता में शिरकत करना है।