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बीएड फर्जीवाड़ाः सिर्फ बर्खास्तगी नहीं, 4570 शिक्षकों पर होगा और भी बड़ा एक्शन
ब्यूरो/अमर उजाला आगरा
Updated Sat, 28 Oct 2017 01:30 PM IST
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डा. बीआर अंबेडकर यूनिवर्सिटी आगरा के फर्जी मार्कशीट प्रकरण में 4570 शिक्षकों को हटाने के हाईकोर्ट के आदेश के बाद और भी कई कार्रवाई जल्द ही होंगी। एसआईटी सबसे पहले उन 84 निजी कालेजों की मान्यता समाप्ति के लिए संस्तुति करेगी जिनमें यह फर्जीवाड़ा किया गया।
साथ ही फर्जी मार्कशीट से नौकरी पाने वाले शिक्षकों के खिलाफ एफआईआर भी दर्ज कराई जाएगी। इसके लिए पहले ही बेसिक शिक्षा विभाग को रिपोर्ट दी जा चुकी है।
एसआईटी के उच्च पदस्थ सूत्रों का कहना है कि शासन को यह रिपोर्ट देने पर भी विचार किया जा रहा है इन शिक्षकों को दिए गए वेतन की इनसे रिकवरी की जाए। हालांकि यह निर्णय शासन से लिया जाना है।
जिन 84 कालेजों पर कार्रवाई होनी है ,उनके संचालकों से पहले ही पूछताछ हो चुकी है। अलग अलग कालेज का रिकार्ड भी एसआईटी ने जुटा लिया है। इसमें यह स्पष्ट है कि किस कॉलेज से कितनी मार्कशीट फर्जी दी गई। बाद में इन सभी मार्कशीट का विवरण विवि. के रिकार्ड में दर्ज करा दिया गया था।
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साथ ही फर्जी मार्कशीट से नौकरी पाने वाले शिक्षकों के खिलाफ एफआईआर भी दर्ज कराई जाएगी। इसके लिए पहले ही बेसिक शिक्षा विभाग को रिपोर्ट दी जा चुकी है।
एसआईटी के उच्च पदस्थ सूत्रों का कहना है कि शासन को यह रिपोर्ट देने पर भी विचार किया जा रहा है इन शिक्षकों को दिए गए वेतन की इनसे रिकवरी की जाए। हालांकि यह निर्णय शासन से लिया जाना है।
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जिन 84 कालेजों पर कार्रवाई होनी है ,उनके संचालकों से पहले ही पूछताछ हो चुकी है। अलग अलग कालेज का रिकार्ड भी एसआईटी ने जुटा लिया है। इसमें यह स्पष्ट है कि किस कॉलेज से कितनी मार्कशीट फर्जी दी गई। बाद में इन सभी मार्कशीट का विवरण विवि. के रिकार्ड में दर्ज करा दिया गया था।
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विवि. से 2004-05 में बीएड करने वाले अभ्यर्थियों को इस फर्जीवाड़े की कीमत चुकानी पड़ी। लगभग आठ हजार अभ्यर्थी मेहनत से पढ़े। इनके अंक कम आए। एसआईटी ने जांच में पाया कि इनके अंक 60 फीसदी के हैं।
एक हजार अभ्यर्थी ऐसे मिले जिनके अंक बढ़ाए गए। इनमें 80 फीसदी से ऊपर भी अंक दिए गए। साढ़े तीन हजार ऐसे मिले जिनके अंकपत्र पूरे के पूरे फर्जी थे। इनमें भी 80 फीसदी से ऊपर अंक थे। जब सहायक अध्यापकों की भर्ती हुई तो असली मार्कशीट वाले मेरिट में पिछड़ गए।
एक हजार अभ्यर्थी ऐसे मिले जिनके अंक बढ़ाए गए। इनमें 80 फीसदी से ऊपर भी अंक दिए गए। साढ़े तीन हजार ऐसे मिले जिनके अंकपत्र पूरे के पूरे फर्जी थे। इनमें भी 80 फीसदी से ऊपर अंक थे। जब सहायक अध्यापकों की भर्ती हुई तो असली मार्कशीट वाले मेरिट में पिछड़ गए।