देश के सबसे प्रदूषित तीन शहरों में ताजनगरी, कोरोना काल में सांस रोगियों की दिक्कत बढ़ी
- आगरा में 440 किमी लंबी सड़कों को खोदकर छोड़ दिए जाने के कारण उड़ रही धूल मिट्टी से ताजनगरी देश के सबसे प्रदूषित शहरों की सूची में शीर्ष तीन में बनी हुई है।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
गुरुवार को आगरा का वायु गुणवत्ता सूचकांक (एयर क्वालिटी इंडेक्स) 193 पर पहुंच गया। प्रदूषण तत्वों में सबसे ज्यादा सूक्ष्म धूलकणों (पीएम 2.5) की मात्रा पाई गई, जो सामान्य से पांच गुना ज्यादा है।
बुधवार को आगरा देश का सबसे प्रदूषित शहर था लेकिन गुरुवार को चरखी दादरी में वायु गुणवत्ता सूचकांक (एयर क्वालिटी इंडेक्स) 244 और उज्जैन में 209 तक पहुंच गया। इसके बाद आगरा का नंबर रहा।
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा जारी की गई सूची में ताजनगरी में धूल कणों की मात्रा 323 के उच्चतम स्तर तक पहुंची जो सामान्य से 5 गुना ज्यादा है। इसी तरह कार्बन मोनो ऑक्साइड की मात्रा 146 के उच्चतम स्तर को पहुंची जो सामान्य से 37 गुना ज्यादा है।
विशेषज्ञों ने ये कहा
पर्यावरण विशेषज्ञों का कहना है कि सीवर, पानी की पाइप लाइन, गैस लाइन और यूटिलिटी डक्ट की खोदाई के कारण शहर में धूलकण लगातार बढ़ रहे हैं। मानसून में बारिश के कारण ये उड़े नहीं, लेकिन मौसम शुष्क होने के बाद सितंबर में अप्रत्याशित रूप से प्रदूषण की मात्रा में इजाफा हुआ है।
उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रीय अधिकारी भुवन प्रकाश ने बताया कि ताजनगरी में प्रदूषण का स्तर तेजी से बढ़ जाने की वजह धूल कण हैं। सड़कों की खोदाई इनका मुख्य कारण है। बारिश हो या पानी का छिड़काव हो तो धूल कण उड़ते नहीं है, तब प्रदूषण का स्तर घटता है।
जुर्माना लगाने पर भी सुधार नहीं
ताज ट्रेपेजियम जोन (टीटीजेड) अथॉरिटी के सदस्य उमेश शर्मा ने बताया कि धूल उड़ने से रोकने का इंतजाम न करने पर भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) और अन्य कार्यदायी संस्थाओं पर पांच करोड़ से ज्यादा का जुर्माना लगाया जा चुका है, लेकिन स्थिति में कोई सुधार नहीं आया है।
साल भर से खोदी पड़ी हैं सड़कें
- फतेहाबाद रोड (सीवर, नाले के लिए) : अक्तूबर 2019 से
- ताजगंज (पेयजल के लिए) : जून 2020 से
- शाहगंज (सीवर के लिए) : जून 2020 से
- 252 किमी में सीवर लाइन की खोदाई
- 65 किमी में डाली गिट्टियां, मिट्टी उड़ रही
- 86 किमी सड़कें पानी के लिए खोद दी
- 6.5 किमी मेन राइजिंग लाइन की खोदाई
- 62.4 किमी ताजगंज में खोदी सड़कें
- 40 किमी की खोदाई ताजगंज में सीवर के लिए
( जल निगम से मिली जानकारी )
सांस रोगियों की दिक्कत बढ़ी
एसएन मेडिकल कॉलेज के वरिष्ठ सांस रोग विशेषज्ञ डॉ. जीवी सिंह ने बताया कि धूल कणों से सांस रोगियों को बहुत परेशानी हो रही है। इन दिनों संक्रमण तेज है। ऐसे में धूल कणों के कारण लोगों को सांस लेने में परेशानी हो रही है।
उनमें आशंका हो जाती है कि कहीं कोरोना का संक्रमण तो नहीं हो गया। ऐसे मरीज हमारे पास आ रहे हैं। धूल कण सांस की नली में जाकर व्यवधान पैदा करते हैं। हम सलाह दे रहे हैं कि लोग सुबह शाम गर्म पानी की भाप लें और जो पहले से ले रहे हैं, वे दवाइयां न छोड़ें।