मानवता की मिसाल: आगरा के 92 लोग प्लाज्मा दान कर कोरोना से जंग में बने सहयोगी
- कोरोना वायरस की जंग में संक्रमण से ठीक हो चुके लोग भी सहयोगी बने हुए हैं। आगरा में ऐसे 92 महादानी हैं, जिन्होंने मरीजों की जान बचाने के लिए प्लाज्मा दान किया है। इनमें आठ ऐसे भी समाज के प्रहरी है, जिन्होंने दो-दो बार तो एक ने तो पांच बार प्लाज्मा दान किया है।
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आगरा के एसएन मेडिकल कॉलेज में अभी तक 92 लोगों के प्लाज्मा से 81 मरीजों का इलाज हो चुका है। इनमें से अर्जुन सिंह ने सबसे ज्यादा पांच बार प्लाज्मा दान किया है। अभय कुमार, सुनील वर्मा, शैलेंद्र चौधरी, डॉ. आरके सिंह, राजेश मंगवानी, प्रदीप चौधरी और रोबिन जैन दो-दो बार प्लाज्मा दान कर चुके हैं। मरीज के लिए प्लाज्मा की व्यवस्था नहीं हो पाई तो ब्लड बैंक से इनके पास फोन पहुंचा तो यह तत्काल प्लाज्मा दान के लिए पहुंच गए।
प्लाज्मा ब्वॉज अर्जुन ने किया पांच बार दान
हलवाई की बगीची के रहने वाले अर्जुन लोधी सबसे ज्यादा पांच बार प्लाज्मा दान कर चुके हैं। उनके इस कदम पर एसएन ब्लड बैंक स्टाफ उनको प्लाज्मा ब्वॉय बुलाता है। उन्होंने बताया कि चार बार एसएन मेडिकल कॉलेज और एक बार दिल्ली में प्लाज्मा दान कर चुके हैं। उन्होंने कहा कि उनके प्लाज्मा से किसी की जान बचे, इससे बड़ा कोई पुण्य नहीं है।
दो बार प्लाज्मा दान कर चुके आवास विकास कॉलोनी के प्रदीप चौधरी ने कहा कि जब वह संक्रमित हुए थे तो 14-15 दिन अस्पताल में रहकर भाव पूरी तरह बदल गए। उन्होंने ठान लिया था कि किसी भी रूप में जरूरतमंदों के काम आऊंगा, इसलिए उन्होंने दो बार प्लाज्मा दान किया।
कोरोना से जंग में सहयोगी बने
सप्तऋषि अपार्टमेंट में रहने वाले राजेश मंगवानी ने कहा कि कोरोना महामारी में डॉक्टर दिन-रात लगे हुए हैं। मेरे मन में था कि मैं भी इस महामारी से युद्ध में सहयोग करूं। ब्लड बैंक प्रभारी ने अपील की तो दो बार प्लाज्मा दान कर कोरोना से जंग में सहयोगी बन गया।
लोहामंडी निवासी रोबिन जैन ने बताया कि कोरोना संक्रमित मरीज के लिए प्लाज्मा की जरूरत की जानकारी हुई तो उन्होंने प्लाज्मा दान किया। दूसरी बार भी किया, कुछ लोगों ने कहा कि इससे कमजोरी हो जाएगी लेकिन ऐसा नहीं हुआ। उनके शरीर में अभी एंटीबॉडीज हैं, जरूरत पर फिर प्लाज्मा दान करेंगे।
15 दिन के अंतराल में दान कर सकते हैं प्लाज्मा
एसएन मेडिकल कॉलेज के ब्लड बैंक की प्रभारी डॉ. नीतू चौहान ने कहा कि संक्रमण ठीक होने पर 14 दिन बाद हर 15 दिन में प्लाज्मा दान किया जा सकता है। लोगों में चार महीने तक एंटीबॉडीज रहते हैं, कुछ लोगों में साढ़े पांच महीने तक एंटीबॉडीज पाई गईं। इससे कोई कमजारी नहीं आती, 15 दिन में सभी अवयव पूरे हो जाते हैं।