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अफवाहों के पीछे कौन, कहीं साजिश तो नहीं

Sun, 19 Jul 2015 02:13 AM IST
ब्यूरो, अमर उजाला
ब्यूरो, अमर उजाला Updated Sun, 19 Jul 2015 02:13 AM IST
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afvahon ke peeche sajish
अचानक से मूर्तियां दूध पीने लगी हैं.., घर की आटा चक्की के पत्थर पर कूटने के निशान पड़ रहे हैं.., शेरावाली मां की मूर्ति में शेर का मुंह बंद हो गया है ..। यही वो डरावनी अफवाहें हैं, जो पिछले सात-आठ दिनों से शहर से लेकर देहात तक  दहशत फैला रही हैं। शगुन-अपशगुन में यकीन करने वाले लोग डर के मारे तरह तरह के उपाय करने में लगे हैं। जादू-टोने वालों की चांदी हो गई है। लेकिन सबसे बड़ा सवाल यह है कि इन अफवाहों को फैला कौन रहा है? कहीं इसके पीछे कोई साजिश तो नहीं है?
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जैसे ही मूर्तियों के दूध पीने की अफवाह फैली, फिजिक्स के प्रोफेसरों ने साफ कर दिया कि इसमें कोई चमत्कार नहीं है। यह पृष्ठ तनाव का सिद्धांत है, जिसमें एक अणु के दूसरे के करीब आने पर आकर्षण बल पैदा होता है। इसी के चलते दूध मूर्ति से टच होता है तो ऐसा प्रतीत होता है कि मूर्ति इसे पी रही है, लेकिन वास्तव में ऐसा नहीं होता। ध्यान से देखने पर साफ हो जाता है कि दूध मूर्ति से होते हुए नीचे जा रहा है।
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मीडिया के माध्यम से इसकी जानकारी लोगों को हुई तो अगले ही दिन यह अफवाहें थमने लगीं। लेकिन अगले दिन से ही चक्कियों के कूटे जाने की अफवाह ने जोर पकड़ लिया। जानकारी पुलिस तक भी पहुंची है। लेकिन अभी तक यह मालूम करने का ठीक से प्रयास नहीं हुआ कि इन अफवाहों को फैलाने के पीछे कौन है? कहीं यह तंत्र-मंत्र वाले बाबाओं का खेल तो नहीं?
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बाबाओं की चांदी
झाड़-फूंक वाले तांत्रिक बाबा इसे अनहोनी बताकर इससे बचने के उपाय बताने लगे। किसी को बताया कि जब चक्की के कूटने की आवाज आ रही हो तो गेट मत खोलना, वरना पत्थर के हो जाओगे। महिलाओं को बताया कि अनहोनी से बचने के लिए पांव में महावर लगा लो।

सोशल मीडिया का गलत इस्तेमाल
फेसबुक और व्हाट्स एप पर भी अफवाहें फैलाई जा रही हैं। कूटी हुई आटा चक्कियों और दूध पीती मूर्तियों के फोटो अपलोड किए जा रहे हैं। इन अफवाहों को सच्ची घटनाएं बताकर तरह तरह की कहानियां भी बनाई जा रही हैं। ऐसा ही एक  झूठ है जिन्न का नाराज होकर चक्कियों पर टूट पड़ना।

सूरज ढलते ही बढ़ जाती है अफवाह
अफवाहें दिन भर उड़ती हैं, लेकिन सूरज ढलते ही इनकी रफ्तार तेज हो जाती है। रात को तो पंख लग जाते हैं। कई गांवों में शोर मचता है। फोन पर सूचनाओं के साथ दहशत तेजी के साथ फैलती है। लोग अपने घरों में चक्कियों के पाट देखते हैं और अनहोनी से बचने के उपाय करने लगते हैं।

यह धार्मिक उन्माद की अवस्था है
ये एक तरह के धार्मिक उन्माद की अवस्था होती है। इसमें व्यक्ति जो काम वास्तव में नहीं होता, वह उसके सुनाई या दिखाई देने की कल्पना करने लगता है। इसको बीमारी नहीं कह सकते। ये एक नार्मल अवस्था है। जैसे कि आपने कई दफा देवी जागरण में लोगों को अचानक ही झूमते या नाचते हुए देखा होगा।
- डा. विशाल सिन्हा
मनोचिकित्सक, एसएन मेडिकल कालेज
 
..तो कड़ी कार्रवाई करेगी पुलिस
अफवाहों पर पुलिस की नजर है। ये कहां से आ रही हैं, इसका पता किया जा रहा है। सोशल मीडिया पर साइबर सेल नजर रखे है। अगर अफवाहों से किसी को नुकसान पहुंचता है तो कड़ी कार्रवाई की जाएगी
- राजेश कुमार सिंह, एसपी सिटी

.. फिर सच जानने की कोशिश नहीं करते
हमारे समाज का ताना-बाना धर्म के आधार पर है। जब कभी धर्म से जुड़ा कोई मामला आता है, तो लोग उसकी सत्यता नहीं देखते, बस यकीन कर लेते हैं। जो मन में भाव होते हैं, वही जुबां पर आ जाते हैं।

- डाक्टर महादेव सिंह, असिस्टेंट प्रोफेसर, समाजशास्त्र, आगरा कॉलेज आगरा

चमत्कार नहीं, यह केमिकल रिएक्शन है
आटा चक्की या सिल बट्टे पर निशान पड़ने को लोग चमत्कार या दैवी प्रकोप समझ रहे हैं लेकिन हकीकत में यह रासायनिक क्रिया है। भौतिक और रसायन विज्ञान के जानकार इसे अच्छी तरह समझते हैं। आप भी जान लीजिए। आरबीएस डिग्री कॉलेज के भौतिक शास्त्र के सीनियर प्रोफेसर डाक्टर एके गौतम ने बताया कि पत्थर बना होता है कैल्सियम कार्बोनेट से। यह अगर तेज धूप में रखा जाए तो रिएक्शन के लिए तैयार हो जाता है। अब अगर इस पर गर्म अवस्था में ही पानी की बूंद गिर जाएं तो कैल्सियम कार्बोनेट और पानी के रिएक्शन से छिद्र हो जाने की संभावना रहती है। दूसरा, अगर पानी अम्लीय (एसिटिक) है और इसे पत्थर पर डाला जाए तो भी केमिकल रिएक्शन से छिद्र हो सकते हैं।
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