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आगरा: रक्तदान करने के बाद हैपेटाइटिस और एचआईवी का लगा पता, ब्लड बैंक की रिपोर्ट में बीमार मिले 112 लोग
Mon, 22 Feb 2021 10:31 AM IST
Abhishek Saxena
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
Published by: Abhishek Saxena
Updated Mon, 22 Feb 2021 10:31 AM IST
सार
- 5393: लोगों के रक्त की हुई जांच
- 83: लोगों में हैपेटाइटिस-बी मिला
- 10: लोगों में हैपेटाइटिस-सी
- 16: लोगों में मिला सिफलिस
- 03: लोगों में एचआईवी मिला
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विस्तार
एक साल में रक्तदान करने वाले 5393 लोगों में से 112 लोग गंभीर बीमारियों से पीड़ित मिले। इनको हैपेटाइटिस, सिफलिस और एचआईवी का रोग था। ये लोग बीमारी से अनजान थे। रक्तदान करने पर एसएन मेडिकल कॉलेज के ब्लड बैंक में हुई जांच के बाद इनको बीमारी के बारे में पहली बार जानकारी हुई।
एनएन की ब्लड बैंक प्रभारी डॉ. नीतू चौहान ने बताया कि 2020 में 5393 लोगों के रक्त की जांच की गई। इनकी उम्र 18 से 60 साल की रही। यह लोग ब्लड बैंक और शिविर में रक्तदान करने आए थे। जांच में हैपेटाइिटस-बी के 83 मरीज, सिफलिस के 16, हैपेटाइटिस के 10 और एचआईवी के तीन मरीज मिले। जांच के बाद जब इनको बीमारी की जानकारी दी गई तो यह हैरान रह गए, इनको बीमारी का पहले से पता नहीं। इतना जरूर बताया कि कभी-कभार दिक्कत तो होती थी, लेकिन नजरअंदाज करते रहे। बीमारी की पुष्टि होने के बाद रक्तदाताओं को जानकारी देकर इलाज कराने को कहा गया।
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न्यूक्लिक एसिड जांच भी की गई
रक्तदान करने वालों के रक्त की पांच बीमारियों की जांच अनिवार्य रूप से की जाती है। इसमें हैपेटाइटिस बी और सी, सिफलिस, एचआईवी और मलेरिया। जिन मरीजों में एंटीबॉडीज बन जाती हैं, उसमें बीमारी का पता न्यूक्लिक एसिड टेस्ट से लगाया जाता है।
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एनएन की ब्लड बैंक प्रभारी डॉ. नीतू चौहान ने बताया कि 2020 में 5393 लोगों के रक्त की जांच की गई। इनकी उम्र 18 से 60 साल की रही। यह लोग ब्लड बैंक और शिविर में रक्तदान करने आए थे। जांच में हैपेटाइिटस-बी के 83 मरीज, सिफलिस के 16, हैपेटाइटिस के 10 और एचआईवी के तीन मरीज मिले। जांच के बाद जब इनको बीमारी की जानकारी दी गई तो यह हैरान रह गए, इनको बीमारी का पहले से पता नहीं। इतना जरूर बताया कि कभी-कभार दिक्कत तो होती थी, लेकिन नजरअंदाज करते रहे। बीमारी की पुष्टि होने के बाद रक्तदाताओं को जानकारी देकर इलाज कराने को कहा गया।
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न्यूक्लिक एसिड जांच भी की गई
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संक्रमित सुई से सबसे ज्यादा बीमारियां
हैपेटाइटिस बी और सी, सिफलिस बीमारी की सबसे बड़ी वजह संक्रमित सुई है। ब्लड बैंक प्रभारी ने बताया कि 23 मरीजों को संक्रमित सुई के इस्तेमाल करने से हैपेटाइटिस बी और दो मरीजों को हैपेटाइटिस सी हुआ। एक मरीज को सिफलिस की बीमारी लगी। इनमें से नौ मरीजों ने झोलाछाप से इलाज के वक्त इंजेक्शन लगने की जानकारी दी।
हैपेटाइटिस बी-सी से लिवर कैंसर का खतरा: डॉ. जितेंद्र दौनेरिया
एसएन कॉलेज के मेडिसिन विभाग के डॉ. जितेंद्र दौनेरिया ने बताया कि हैपेटाइटिस बी और सी होने से लिवर में संक्रमण हो जाता है, लंबे समय से बीमारी रहने पर लिवर के कैंसर का खतरा भी बढ़ जाता है। सिफलिस में जननांग और उसके आसपास घाव होने लगते हैं।
केस एक:
नामनेर क्षेत्र के रहने वाले 39 साल के व्यक्ति ने शिविर में रक्तदान किया। जांच के बाद एसएन ब्लड बैंक से फोन पर उनको हैपेटाइटिस बी की बीमारी बताई। उन्होंने फोन पर डॉक्टर को बताया कि उन्हें यह बीमारी है, इसकी जानकारी ही नहीं थी।
केस दो:
यमुनापार निवासी 33 साल के युवक ने अपने मरीज के लिए रक्तदान किया। रक्त की जांच के बाद सिफलिस की पुष्टि हुई। इनको फोन पर जानकारी दी, पूछताछ में इन्होंने डॉक्टरों को प्रजनन अंग के पास घाव के बारे में बताया, जिसे वह दाद-खुजली समझते रहे।
हैपेटाइटिस बी और सी, सिफलिस बीमारी की सबसे बड़ी वजह संक्रमित सुई है। ब्लड बैंक प्रभारी ने बताया कि 23 मरीजों को संक्रमित सुई के इस्तेमाल करने से हैपेटाइटिस बी और दो मरीजों को हैपेटाइटिस सी हुआ। एक मरीज को सिफलिस की बीमारी लगी। इनमें से नौ मरीजों ने झोलाछाप से इलाज के वक्त इंजेक्शन लगने की जानकारी दी।
हैपेटाइटिस बी-सी से लिवर कैंसर का खतरा: डॉ. जितेंद्र दौनेरिया
एसएन कॉलेज के मेडिसिन विभाग के डॉ. जितेंद्र दौनेरिया ने बताया कि हैपेटाइटिस बी और सी होने से लिवर में संक्रमण हो जाता है, लंबे समय से बीमारी रहने पर लिवर के कैंसर का खतरा भी बढ़ जाता है। सिफलिस में जननांग और उसके आसपास घाव होने लगते हैं।
केस एक:
नामनेर क्षेत्र के रहने वाले 39 साल के व्यक्ति ने शिविर में रक्तदान किया। जांच के बाद एसएन ब्लड बैंक से फोन पर उनको हैपेटाइटिस बी की बीमारी बताई। उन्होंने फोन पर डॉक्टर को बताया कि उन्हें यह बीमारी है, इसकी जानकारी ही नहीं थी।
केस दो:
यमुनापार निवासी 33 साल के युवक ने अपने मरीज के लिए रक्तदान किया। रक्त की जांच के बाद सिफलिस की पुष्टि हुई। इनको फोन पर जानकारी दी, पूछताछ में इन्होंने डॉक्टरों को प्रजनन अंग के पास घाव के बारे में बताया, जिसे वह दाद-खुजली समझते रहे।