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सरकारी जमीन पर तान दी इमारत: एडीए ने जारी की एनओसी, आरटीआई में हुआ बड़ा खुलासा; अब होगी जांच
Fri, 25 Sep 2026 10:30 AM IST
Dhirendra Singh
अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
Published by: Dhirendra Singh
Updated Fri, 25 Sep 2026 10:30 AM IST
सार
आगरा में सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज जमीन पर एडीए की एनओसी के आधार पर बहुमंजिला इमारत खड़ी होने का मामला सामने आया है। आरटीआई से जानकारी मांगे जाने के बाद मामला उजागर हुआ, जिसके बाद जिलाधिकारी ने जांच कर कार्रवाई की बात कही है।
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एडीए कार्यालय
विस्तार
सरकारी रिकॉर्ड में राजकीय स्थान (सरकारी भूमि) के रूप में दर्ज जमीन पर आगरा विकास प्राधिकरण (एडीए) ने बिल्डर को अनापत्ति प्रमाणपत्र (एनओसी) जारी कर दिया। एनओसी को आधार बनाकर बिल्डर ने बहुमंजिला इमारत खड़ी कर दी और बिजली-पानी कनेक्शन सहित अन्य सुविधाएं भी हासिल कर लीं। आरटीआई के तहत जानकारी मांगे जाने पर सरकारी तंत्र और बिल्डर की मिलीभगत का खुलासा हुआ। अब इसकी जांच करवाई जाएगी।
मामला कोतवाली वार्ड के अंतर्गत गुड़ की मंडी, हनुमान गली स्थित प्लॉट संख्या 14/265, 14/266 भाग, 14/270 से जुड़ा है। आवेदक मालती शर्मा ने रो-हाउस निर्माण के लिए एडीए में ऑनलाइन आवेदन किया गया था, जिसके आधार पर विभिन्न विभागों से एनओसी मांगी गई। प्राधिकरण ने एनओसी देने से पहले प्रशासन से संबंधित जमीन की जानकारी मांगी। क्षेत्रीय लेखपाल तहसील सदर और नजूल मुहर्रिर की संयुक्त जांच में संपत्ति राजस्व अभिलेखों में खसरा संख्या 366 के भाग में दर्ज पाई गई।
अभिलेखों के अनुसार, श्रेणी 15(2) के तहत भूमि आबादी, सड़क, रास्ता व रेलवे भवन के अधीन नॉन जैड ए खतौनी खाता संख्या 87 में दर्ज है। रिपोर्ट में साफ तौर पर उल्लेख किया गया है कि यह भूखंड राजकीय स्थान है और इसका स्वामित्व सरकार के पास है। इसके बावजूद नियमों को ताक पर रखकर सरकारी जमीन पर ही एडीए ने एनओसी जारी कर निर्माण की हरी झंडी दे दी। न केवल अवैध रूप से नक्शा पास हुआ, बल्कि बहुमंजिला बिल्डिंग तनकर खड़ी हो गई और उसे बिजली-पानी के कनेक्शन भी जारी कर दिए गए।
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जिलाधिकारी मनीष बंसल का कहना है कि प्रकरण की जानकारी नहीं है। अगर सरकारी रिकॉर्ड में सरकारी भूमि दर्ज है तो एनओसी कैसे दी गई। अवैध निर्माण कैसे हुआ, इसकी जांच कराकर कार्रवाई की जाएगी।
आगरा विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष विजय कुमार ने बताया कि एनओसी दिए जाने की एक प्रक्रिया है। उसके तहत ही सभी दस्तावेज देखने के बाद उसे जारी किया जाता है। अगर सरकारी भूमि पर एनओसी दी गई है, तो जांच कराकर कार्रवाई की जाएगी।
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मामला कोतवाली वार्ड के अंतर्गत गुड़ की मंडी, हनुमान गली स्थित प्लॉट संख्या 14/265, 14/266 भाग, 14/270 से जुड़ा है। आवेदक मालती शर्मा ने रो-हाउस निर्माण के लिए एडीए में ऑनलाइन आवेदन किया गया था, जिसके आधार पर विभिन्न विभागों से एनओसी मांगी गई। प्राधिकरण ने एनओसी देने से पहले प्रशासन से संबंधित जमीन की जानकारी मांगी। क्षेत्रीय लेखपाल तहसील सदर और नजूल मुहर्रिर की संयुक्त जांच में संपत्ति राजस्व अभिलेखों में खसरा संख्या 366 के भाग में दर्ज पाई गई।
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अभिलेखों के अनुसार, श्रेणी 15(2) के तहत भूमि आबादी, सड़क, रास्ता व रेलवे भवन के अधीन नॉन जैड ए खतौनी खाता संख्या 87 में दर्ज है। रिपोर्ट में साफ तौर पर उल्लेख किया गया है कि यह भूखंड राजकीय स्थान है और इसका स्वामित्व सरकार के पास है। इसके बावजूद नियमों को ताक पर रखकर सरकारी जमीन पर ही एडीए ने एनओसी जारी कर निर्माण की हरी झंडी दे दी। न केवल अवैध रूप से नक्शा पास हुआ, बल्कि बहुमंजिला बिल्डिंग तनकर खड़ी हो गई और उसे बिजली-पानी के कनेक्शन भी जारी कर दिए गए।
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जिलाधिकारी मनीष बंसल का कहना है कि प्रकरण की जानकारी नहीं है। अगर सरकारी रिकॉर्ड में सरकारी भूमि दर्ज है तो एनओसी कैसे दी गई। अवैध निर्माण कैसे हुआ, इसकी जांच कराकर कार्रवाई की जाएगी।
आगरा विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष विजय कुमार ने बताया कि एनओसी दिए जाने की एक प्रक्रिया है। उसके तहत ही सभी दस्तावेज देखने के बाद उसे जारी किया जाता है। अगर सरकारी भूमि पर एनओसी दी गई है, तो जांच कराकर कार्रवाई की जाएगी।