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हिंदी के लिए नियम नहीं, बदलनी होगी मानसिकता
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मैनपुरी। जब भी हिंदी के विकास की चर्चा होती है तब एक ही बात आमतौर पर सामने आती है कि नियमों में बदलाव होना चाहिए। हिंदी को आगे नहीं बढ़ाया जा सकता है, जब तक कि हम अपनी मानसिकता न बदल लें। हम कहें या न कहें, लेकिन कहीं न कहीं हमारे अंदर अंग्रेजी भाषा के लिए अधिक ललक जरूर है।
वहीं हमें हिंदी आम भाषा लगती है। इस सोच को बदलना होगा। अमर उजाला के साथ व्हाट्सएप संवाद में हिंदी प्रेमियों ने कहा कि गर्व से हिंदी को आगे बढ़ाने के साथ ही अंग्रेजी के प्रति बनाई गई अवधारणा का त्याग करना होगा। तभी हिंदी का विकास संभव है।
हिंदी न केवल हमारी मातृभाषा है, बल्कि सम्मान और भावों की भाषा भी है। इन विशेषताओं के बावजूद हमें अंग्रेजी अधिक बेहतर लगती है। इस विचार का जब तक हम त्याग नहीं करते, हिंदी की उन्नति संभव नहीं है।
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-डॉ. सुमंत गुप्ता, व्यापारी
हम चाहते हैं कि हमारे बच्चे या संबंधी अंग्रेजी में बेहतर हों। उन्हें अंग्रेजी बोलना आता है। कभी हमने सोचा है कि अंग्रेजी भी तो एक भाषा ही है। जब हिंदी में हम अपने विचार व्यक्त कर सकते हैं तो अंग्रेजी को इतना महत्व क्यों।
-घनश्याम दास गुप्ता, व्यापारी
मैं किसी भाषा को गलत नहीं कहता, लेकिन विचार करें कि क्या अंग्रेजी के अलावा अन्य किसी भाषा के प्रति हम इतने मोहित हैं। क्योंकि अंग्रेजी हमारे दिल और दिमाग पर छाई है। हमें इसी तरह हिंदी को अपने जीवन में स्थान देना होगा।
-बीनू बंसल, व्यापारी
भाषा से ही हमारी पहचान होती है। पूरे विश्व में हम सबसे बेहतर हिंदीभाषी की रूप में जाने जाते हैं। क्यों न हम शिक्षा, रोजगार व अन्य क्षेत्रों में भी हिंदी को बढ़ावा दें, जिससे विश्व पटल पर हिंदी नए आयाम स्थापित कर सके।
-आलोक वर्मा, व्यापारी
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वहीं हमें हिंदी आम भाषा लगती है। इस सोच को बदलना होगा। अमर उजाला के साथ व्हाट्सएप संवाद में हिंदी प्रेमियों ने कहा कि गर्व से हिंदी को आगे बढ़ाने के साथ ही अंग्रेजी के प्रति बनाई गई अवधारणा का त्याग करना होगा। तभी हिंदी का विकास संभव है।
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हिंदी न केवल हमारी मातृभाषा है, बल्कि सम्मान और भावों की भाषा भी है। इन विशेषताओं के बावजूद हमें अंग्रेजी अधिक बेहतर लगती है। इस विचार का जब तक हम त्याग नहीं करते, हिंदी की उन्नति संभव नहीं है।
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-डॉ. सुमंत गुप्ता, व्यापारी
हम चाहते हैं कि हमारे बच्चे या संबंधी अंग्रेजी में बेहतर हों। उन्हें अंग्रेजी बोलना आता है। कभी हमने सोचा है कि अंग्रेजी भी तो एक भाषा ही है। जब हिंदी में हम अपने विचार व्यक्त कर सकते हैं तो अंग्रेजी को इतना महत्व क्यों।
-घनश्याम दास गुप्ता, व्यापारी
मैं किसी भाषा को गलत नहीं कहता, लेकिन विचार करें कि क्या अंग्रेजी के अलावा अन्य किसी भाषा के प्रति हम इतने मोहित हैं। क्योंकि अंग्रेजी हमारे दिल और दिमाग पर छाई है। हमें इसी तरह हिंदी को अपने जीवन में स्थान देना होगा।
-बीनू बंसल, व्यापारी
भाषा से ही हमारी पहचान होती है। पूरे विश्व में हम सबसे बेहतर हिंदीभाषी की रूप में जाने जाते हैं। क्यों न हम शिक्षा, रोजगार व अन्य क्षेत्रों में भी हिंदी को बढ़ावा दें, जिससे विश्व पटल पर हिंदी नए आयाम स्थापित कर सके।
-आलोक वर्मा, व्यापारी