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आर्य समाज मंदिर के पूर्व पदाधिकारियों समेत पांच पर एफआईआर
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मैनपुरी। शहर के दुबे कंपाउंड स्थित आर्य समाज मंदिर के खाते से फर्जीवाड़ा कर धनराशि निकाल ली गई। ये धनराशि किसी और ने नहीं, बल्कि मंदिर के पूर्व पदाधिकारियों ने ही जालसाजी कर निकाली थी। मामले में मंदिर के प्रशासक ने चार पूर्व पदाधिकारियों समेत पांच लोगों के विरुद्ध एफआईआर दर्ज कराई है।
मामला लगभग एक माह पुराना है। दुबे कंपाउंड स्थित आर्य समाज मंदिर का खाता पंजाब नेशलन बैंक की सदर शाखा में संचालित है। यहां से इसी वर्ष 20 अक्तूबर और 29 अक्तूबर को 1.47 लाख रुपये की निकासी कर ली गई। मंदिर के प्रशासक आलोक दुबे निवासी दुबे कंपाउंड ने बैंक जाकर इसकी जानकारी जुटाई। इस दौरान पता चला कि धनराशि किसी और न ने नहीं, बल्कि मंदिर के चार पूर्व पदाधिकारियों ने ही निकाली है।
इसमें पूर्व प्रधान महेंद्र आर्य निवासी रुरिया खिरिया, पूर्व मंत्री कौशलेंद्र आर्य निवासी नगला गहियर, पूर्व कार्यकारी मंत्री अनिल आर्य और पूर्व कोषाध्यक्ष शिवनारायन आर्य शामिल हैं। इन लोगों को 21 सितंबर 2020 को ही आर्य प्रतिनिधि सभा लखनऊ की अंतरण सभा में पदों से हटा दिया गया था।
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इसके बाद भी पद बहाली का फर्जी आदेश बनाकर इन लोगों ने धनराशि की निकासी कर ली। इसके साथ ही फर्जी आदेश जारी करने वाले पूर्व उप प्रधान आर्य प्रतिनिधि सभा लखनऊ वीरेंद्र रत्नम निवासी इंदिरा नगर मेरठ का नाम भी एफआईआर में शामिल किया गया है। पुलिस ने पांचों के विरुद्ध एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
तारीखों में गड़बड़ी से पकड़ा गया मामला
आर्य समाज मंदिर के खाते से धनराशि निकालने में पूर्व पदाधिकारियों ने पूरी तैयारी की थी, लेकिन तारीखों में गड़बड़ी से मामला पकड़ में आ गया। दरअसल चारों पदाधिकारियों को 21 सितंबर 2020 को पद से हटाया गया था। इसके बाद उन्होंने 22 अक्तूबर 2020 को उप प्रधान वीरेंद्र रत्नम के नाम से बहाली आदेश पत्र जारी करा लिया। जबकि वीरेंद्र रत्नम को 10 अगस्त 2020 को ही प्रबंध कार्यकारिणी ने उप प्रधान पद से हटा दिया था। ऐसे में उन्होंने अक्तूबर में बहाली पत्र कैसे जारी कर दिया।
आर्य समाज मंदिर के प्रशासक की तहरीर पर पांच लोगों के विरुद्ध जालसाजी कर मंदिर के खाते से धनराशि निकालने का मामला दर्ज किया गया है। जांच की जा रही है, दोषियों को जल्द गिरफ्तार किया जाएगा।
भानुप्रताप, इंस्पेक्टर कोतवाली।
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मामला लगभग एक माह पुराना है। दुबे कंपाउंड स्थित आर्य समाज मंदिर का खाता पंजाब नेशलन बैंक की सदर शाखा में संचालित है। यहां से इसी वर्ष 20 अक्तूबर और 29 अक्तूबर को 1.47 लाख रुपये की निकासी कर ली गई। मंदिर के प्रशासक आलोक दुबे निवासी दुबे कंपाउंड ने बैंक जाकर इसकी जानकारी जुटाई। इस दौरान पता चला कि धनराशि किसी और न ने नहीं, बल्कि मंदिर के चार पूर्व पदाधिकारियों ने ही निकाली है।
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इसमें पूर्व प्रधान महेंद्र आर्य निवासी रुरिया खिरिया, पूर्व मंत्री कौशलेंद्र आर्य निवासी नगला गहियर, पूर्व कार्यकारी मंत्री अनिल आर्य और पूर्व कोषाध्यक्ष शिवनारायन आर्य शामिल हैं। इन लोगों को 21 सितंबर 2020 को ही आर्य प्रतिनिधि सभा लखनऊ की अंतरण सभा में पदों से हटा दिया गया था।
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इसके बाद भी पद बहाली का फर्जी आदेश बनाकर इन लोगों ने धनराशि की निकासी कर ली। इसके साथ ही फर्जी आदेश जारी करने वाले पूर्व उप प्रधान आर्य प्रतिनिधि सभा लखनऊ वीरेंद्र रत्नम निवासी इंदिरा नगर मेरठ का नाम भी एफआईआर में शामिल किया गया है। पुलिस ने पांचों के विरुद्ध एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
तारीखों में गड़बड़ी से पकड़ा गया मामला
आर्य समाज मंदिर के खाते से धनराशि निकालने में पूर्व पदाधिकारियों ने पूरी तैयारी की थी, लेकिन तारीखों में गड़बड़ी से मामला पकड़ में आ गया। दरअसल चारों पदाधिकारियों को 21 सितंबर 2020 को पद से हटाया गया था। इसके बाद उन्होंने 22 अक्तूबर 2020 को उप प्रधान वीरेंद्र रत्नम के नाम से बहाली आदेश पत्र जारी करा लिया। जबकि वीरेंद्र रत्नम को 10 अगस्त 2020 को ही प्रबंध कार्यकारिणी ने उप प्रधान पद से हटा दिया था। ऐसे में उन्होंने अक्तूबर में बहाली पत्र कैसे जारी कर दिया।
आर्य समाज मंदिर के प्रशासक की तहरीर पर पांच लोगों के विरुद्ध जालसाजी कर मंदिर के खाते से धनराशि निकालने का मामला दर्ज किया गया है। जांच की जा रही है, दोषियों को जल्द गिरफ्तार किया जाएगा।
भानुप्रताप, इंस्पेक्टर कोतवाली।