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Agra News: खूब कराया दलबदल, नहीं खिल सका कमल
Wed, 05 Jun 2024 12:08 AM IST
आगरा ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, आगरा
संवाद न्यूज एजेंसी, आगरा
Updated Wed, 05 Jun 2024 12:08 AM IST
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पंकज मिश्र
मैनपुरी। लोकसभा सीट मैनपुरी जीतने को भाजपा ने इस बार प्रदेश के पर्यटन मंत्री जयवीर सिंह को चुनाव मैदान में उतारा। चुनाव दौरान खूब दलबदल भी हुआ। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संयुक्त और गृह मंत्री अमित शाह ने व्यक्तिगत सभाएं कीं। भाजपा लंबे समय से सीट जीतने को छटपटा रही है। कमल खिलाने को भाजपा ने कई बार माली तक बदला है। भाजपा की तमाम कवायद सपा के गढ़ में कमल नहीं खिला सकी है।
वर्ष 1991 के लोकसभा चुनाव में भाजपा ने पहली बार प्रत्याशी मैदान में उतारा था। भाजपा प्रत्याशी दूसरे नंबर पर रहा था। उसके बाद से 10 बार लोकसभा के आम चुनाव हो चुके हैं। मैनपुरी में तो वर्ष 2004, 2014 और 2022 में उप चुनाव तक हो चुका है। भाजपा ने स्थानीय से लेकर बाहरी प्रत्याशी तक पर दांव लगाया है। सपा से दल बदलकर भाजपा में आए नेताओं के सहारे भी सपा का गढ़ भेदने की कोशिश की है। भाजपा कभी दो तो कभी तीन नंबर पर रही है।
भाजपा ने इस बार चौपालों और सम्मेलनों के सहारे मतदाताओं को अपने साथ लाने की कोशिश की। भाजपा के राष्ट्रीय नेताओंं तक ने मैनपुरी केे दौरे किए। केंद्र और प्रदेश सरकार की लाभकारी योजनाओं का हवाला देकर भाजपा ने माहौल बनाया। जन प्रतिनिधियों का दलबदल तक कराया। इस बार भी भाजपा ने माली बदलकर सपा के गढ़ में कमल खिलाने की कोशिश की, लेकिन नतीजा पुराना ही रहा। मतदाताओं ने इस बार भी समाजवादियों में ही भरोसा जताया है। परिणाम के बाद एक बार फिर साबित हुआ कि मैनपुरी समाजवादियों का अभेद गढ़ था और है।
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मैनपुरी। लोकसभा सीट मैनपुरी जीतने को भाजपा ने इस बार प्रदेश के पर्यटन मंत्री जयवीर सिंह को चुनाव मैदान में उतारा। चुनाव दौरान खूब दलबदल भी हुआ। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संयुक्त और गृह मंत्री अमित शाह ने व्यक्तिगत सभाएं कीं। भाजपा लंबे समय से सीट जीतने को छटपटा रही है। कमल खिलाने को भाजपा ने कई बार माली तक बदला है। भाजपा की तमाम कवायद सपा के गढ़ में कमल नहीं खिला सकी है।
वर्ष 1991 के लोकसभा चुनाव में भाजपा ने पहली बार प्रत्याशी मैदान में उतारा था। भाजपा प्रत्याशी दूसरे नंबर पर रहा था। उसके बाद से 10 बार लोकसभा के आम चुनाव हो चुके हैं। मैनपुरी में तो वर्ष 2004, 2014 और 2022 में उप चुनाव तक हो चुका है। भाजपा ने स्थानीय से लेकर बाहरी प्रत्याशी तक पर दांव लगाया है। सपा से दल बदलकर भाजपा में आए नेताओं के सहारे भी सपा का गढ़ भेदने की कोशिश की है। भाजपा कभी दो तो कभी तीन नंबर पर रही है।
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भाजपा ने इस बार चौपालों और सम्मेलनों के सहारे मतदाताओं को अपने साथ लाने की कोशिश की। भाजपा के राष्ट्रीय नेताओंं तक ने मैनपुरी केे दौरे किए। केंद्र और प्रदेश सरकार की लाभकारी योजनाओं का हवाला देकर भाजपा ने माहौल बनाया। जन प्रतिनिधियों का दलबदल तक कराया। इस बार भी भाजपा ने माली बदलकर सपा के गढ़ में कमल खिलाने की कोशिश की, लेकिन नतीजा पुराना ही रहा। मतदाताओं ने इस बार भी समाजवादियों में ही भरोसा जताया है। परिणाम के बाद एक बार फिर साबित हुआ कि मैनपुरी समाजवादियों का अभेद गढ़ था और है।
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