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Agra News: 300 वर्ष पुराने किले का जर्जर हिस्सा गिरने से मकान ध्वस्त, बाल-बाल बचा परिवार
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बारिश में प्राचीन किले का हिस्सा गिरा, मकान ध्वस्त; परिवार बाल-बाल बचा
पिनाहट। कस्बा पिनाहट के मोहल्ला मल्हन टोला में शुक्रवार सुबह हुई बारिश के दौरान 300 वर्ष सें भी अधिक पुराने प्राचीन किले का जर्जर हिस्सा भरभराकर एक मकान पर गिर गया। मकान का एक कमरा पूरी तरह ध्वस्त हो गया। सामान मलबे में दबकर नष्ट हो गया। गनीमत रही कि परिवार के सदस्य दूसरे हिस्से में सो रहे थे, जिससे बड़ा हादसा टल गया।
मल्हन टोला स्थित ऐतिहासिक किले का बड़ा हिस्सा पहले ही जर्जर हो चुका है। शुक्रवार सुबह बारिश के दौरान किले के ऊपरी हिस्से का मलबा अचानक जानकी प्रसाद पुत्र मोहर सिंह के मकान पर आ गिरा। तेज धमाके की आवाज सुनकर आसपास के लोग मौके पर पहुंच गए। कमरा पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया। उसमें रखा सामान भी नष्ट हो गया। पीड़ित जानकी प्रसाद ने बताया कि वह मजदूरी करते हैं। किले का हिस्सा गिरने से उन्हें भारी आर्थिक नुकसान हुआ है। घटना के वक्त परिवार के सभी सदस्य टिनशेड के नीचे सो रहे थे, इसलिए सभी सुरक्षित बच गए।
जर्जर किले से आसपास के लोगों में दहशत
स्थानीय लोगों का कहना है कि किले के कई हिस्से बेहद जर्जर हो चुके हैं और पूर्व में भी गुंबद व दीवारों के हिस्से गिर चुके हैं। इसके बावजूद अब तक कोई सुरक्षा व्यवस्था या मरम्मत का कार्य नहीं कराया गया है। किले के आसपास कालीचरण, पिंटू, प्रहलाद, जानकी प्रसाद, रामभरत, विवेक, मायाराम, ओमप्रकाश, पूरन सिंह, आंगनलाल, नौबत सहित कई परिवारों के मकान बने हुए हैं, जिन पर हर समय खतरा बना रहता है।
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मेवाती शासकों के समय हुआ था किले का निर्माण
यह ऐतिहासिक किला करीब 300 वर्ष सें अधिक पुराना बताया जाता है। इसका निर्माण मेवाती शासकों के समय हुआ था। बाद में भदावर शासकों ने इसे अपने अधिकार में ले लिया। वर्तमान में यह संपत्ति भदावर राजपरिवार के अधीन बताई जाती है। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) के संरक्षण में नहीं है। स्थानीय लोगों ने प्रशासन से जर्जर हिस्सों का सर्वे कराकर आवश्यक सुरक्षा इंतजाम कराने की मांग की है।
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मल्हन टोला स्थित ऐतिहासिक किले का बड़ा हिस्सा पहले ही जर्जर हो चुका है। शुक्रवार सुबह बारिश के दौरान किले के ऊपरी हिस्से का मलबा अचानक जानकी प्रसाद पुत्र मोहर सिंह के मकान पर आ गिरा। तेज धमाके की आवाज सुनकर आसपास के लोग मौके पर पहुंच गए। कमरा पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया। उसमें रखा सामान भी नष्ट हो गया। पीड़ित जानकी प्रसाद ने बताया कि वह मजदूरी करते हैं। किले का हिस्सा गिरने से उन्हें भारी आर्थिक नुकसान हुआ है। घटना के वक्त परिवार के सभी सदस्य टिनशेड के नीचे सो रहे थे, इसलिए सभी सुरक्षित बच गए।
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जर्जर किले से आसपास के लोगों में दहशत
स्थानीय लोगों का कहना है कि किले के कई हिस्से बेहद जर्जर हो चुके हैं और पूर्व में भी गुंबद व दीवारों के हिस्से गिर चुके हैं। इसके बावजूद अब तक कोई सुरक्षा व्यवस्था या मरम्मत का कार्य नहीं कराया गया है। किले के आसपास कालीचरण, पिंटू, प्रहलाद, जानकी प्रसाद, रामभरत, विवेक, मायाराम, ओमप्रकाश, पूरन सिंह, आंगनलाल, नौबत सहित कई परिवारों के मकान बने हुए हैं, जिन पर हर समय खतरा बना रहता है।
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मेवाती शासकों के समय हुआ था किले का निर्माण
यह ऐतिहासिक किला करीब 300 वर्ष सें अधिक पुराना बताया जाता है। इसका निर्माण मेवाती शासकों के समय हुआ था। बाद में भदावर शासकों ने इसे अपने अधिकार में ले लिया। वर्तमान में यह संपत्ति भदावर राजपरिवार के अधीन बताई जाती है। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) के संरक्षण में नहीं है। स्थानीय लोगों ने प्रशासन से जर्जर हिस्सों का सर्वे कराकर आवश्यक सुरक्षा इंतजाम कराने की मांग की है।