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कृषि प्रधान देश में 60 से 70 प्रतिशत किसानों पर नाममात्र की है जमीन
Updated Sun, 24 Dec 2017 08:27 PM IST
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- फोटो : डेमो
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मथुरा। उत्तर प्रदेश पंडित दीनदयाल उपाध्याय पशुचिकित्सा विज्ञान विश्वविद्यालय में आयोजित बकरियों में कृत्रिम गर्भाधान की तकनीक के प्रशिक्षण दौरान प्रमुख सचिव चीनी उद्योग संजय बी रेडडी ने कहा कि भारत कृषि प्रधान देश में 60 से 70 प्रतिशत किसान लघु एवं सीमांत हैं, जिनकी आय का साधन बढ़ाने की आवश्यकता है। यह तभी संभव है जब छोटे किसान छोटे पशुओं का पालन करें। इसमें उन्नत नस्ल का बकरी का पालन छोटे किसानों के लिए बड़ा लाभदायक साबित हो सकता है।
दो दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम के समापन अवसर पर प्रमुख सचिव ने कहा सरकार की कोशिश छोटे किसानों की हर संभव मदद करते हुए उनकी आय बढ़ाने की है। इसके लिए छोटे पशुओं के पालन और डेयरी के काम को प्रोत्साहित किया जा रहा है। दुनिया के कई देशों में बकरे का वजन 80 से 100 किलो ग्राम तक होता है, लेकिन अपने यहां यह स्थिति नहीं है। अच्छी नस्ल खत्म हो चुकी हैं। इन्हें फिर से पुनर्जीवित करना होगा। बकरियों में कृत्रिम गर्भाधान को प्रचलित करना होगा। यहां से प्रशिक्षित होकर जाने वाले पशुचिकित्सकों की नैतिक जिम्मेदारी है कि लोगों को जागरूक करें। शुगर फाउंडेशन के एमडी एसके सिंह ने कहा कि बकरी उत्पादन छोटे किसानों के लिए लाभदायक होगा।
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए वेटरनेरी विवि के कुलपति प्रो. केएमएल पाठक ने कहा कि पशुपालन विभाग, पशुचिकित्सक और विवि को इस सामान्य प्रयोग को सफल बनाना होगा। सेमिनार के आयोजन सचिव डॉ. मुकुल आनंद ने इस योजना की रूपरेखा प्रस्तुत की। इस दौरान 20 जनपदों से आए पशुचिकित्सकों को प्रमाण पत्र वितरित किए गए।
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दो दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम के समापन अवसर पर प्रमुख सचिव ने कहा सरकार की कोशिश छोटे किसानों की हर संभव मदद करते हुए उनकी आय बढ़ाने की है। इसके लिए छोटे पशुओं के पालन और डेयरी के काम को प्रोत्साहित किया जा रहा है। दुनिया के कई देशों में बकरे का वजन 80 से 100 किलो ग्राम तक होता है, लेकिन अपने यहां यह स्थिति नहीं है। अच्छी नस्ल खत्म हो चुकी हैं। इन्हें फिर से पुनर्जीवित करना होगा। बकरियों में कृत्रिम गर्भाधान को प्रचलित करना होगा। यहां से प्रशिक्षित होकर जाने वाले पशुचिकित्सकों की नैतिक जिम्मेदारी है कि लोगों को जागरूक करें। शुगर फाउंडेशन के एमडी एसके सिंह ने कहा कि बकरी उत्पादन छोटे किसानों के लिए लाभदायक होगा।
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कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए वेटरनेरी विवि के कुलपति प्रो. केएमएल पाठक ने कहा कि पशुपालन विभाग, पशुचिकित्सक और विवि को इस सामान्य प्रयोग को सफल बनाना होगा। सेमिनार के आयोजन सचिव डॉ. मुकुल आनंद ने इस योजना की रूपरेखा प्रस्तुत की। इस दौरान 20 जनपदों से आए पशुचिकित्सकों को प्रमाण पत्र वितरित किए गए।
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