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विकलांग बच्चों को प्राइमरी तक भी नहीं मिल पा रही शिक्षा
Updated Sat, 02 Dec 2017 11:50 PM IST
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- फोटो : demo pic
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कासगंज। रविवार को विश्व विकलांग दिवस मनाया जाएगा। यदि जनपद में विकलांगों की स्थिति पर नजर डाली जाए तो हालात काफी खराब है। बच्चों को प्राइमरी स्तर तक की शिक्षा उपलब्ध नहीं हो पा रही। यही नहीं अन्य योजनाओं का लाभ तक उन्हेंनहीं मिल पाता।
शासन से छह से 14 साल तक के विकलांग बच्चों की शिक्षा को समेकित शिक्षा योजना चला रखी है।
इसके तहत प्रीइंटेरीगेशन कैंप के माध्यम से बच्चों को शिक्षित किया जाता है। इसके अलावा इंटरीनेट शिक्षक के माध्यम से भी बच्चों को शिक्षित कराने की व्यवस्था है। ऐसे शिक्षक एक साथ 20 बच्चों को एक स्थान पर शिक्षित करते हैं। जनपद में कराए गए सर्वे में 1446 बच्चे विकलांग चिन्हित किए गए। इन बच्चों की शिक्षा को मात्र एक प्रीइंटेरीगेेशन कैंप संचालित है।
कैंप में 60 बच्चे शिक्षारत हैं। इसके अलावा 19 इंटीनरेट शिक्षक 380 बच्चों को शिक्षा दे रहे हैं। 1006 बच्चों की शिक्षा के लिए जनपद में न तो कैंप की ही व्यवस्था की गई है और न ही शिक्षकों को। इससे इन बच्चों को उचित शिक्षा नहीं मिल पा रही। शासन से संचालित अन्य योजनाओं की स्थिति भी संतोष जनक नहीं है। पेंशन पाने के लिए बड़ी संख्या में युवा विभाग के चक्कर लगाते आसानी से देखे जा सकते हैं। उन्हें विभाग से उपकरण भी आसानी से नहीं मिल पाते।
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रोजगार के लिए बैंकों में किए जाने वाले आवेदनों पर भी उन्हें लाभ मिलना आसान नहीं होता। विकलांग महेश ने बताया कि उसने अपनी पेंशन के लिए कई बार आवेदन किया, लेकिन आज तक उन्हें पेंशन नहीं मिल सकी है। समेकित शिक्षा के जिला समन्वयक वीरेंद्र कुमार का कहना है विकलांग बच्चों की शिक्षा को शिक्षकों की आवश्यकता की डिमांड शासन को भेजी जा चुकी है, लेकिन शिक्षकों की नियुक्ति नहीं हो सकी है। विभाग के पास जो शिक्षक हैं उनके माध्यम से बच्चों को शिक्षित करने का कार्य किया जा रहा है।
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शासन से छह से 14 साल तक के विकलांग बच्चों की शिक्षा को समेकित शिक्षा योजना चला रखी है।
इसके तहत प्रीइंटेरीगेशन कैंप के माध्यम से बच्चों को शिक्षित किया जाता है। इसके अलावा इंटरीनेट शिक्षक के माध्यम से भी बच्चों को शिक्षित कराने की व्यवस्था है। ऐसे शिक्षक एक साथ 20 बच्चों को एक स्थान पर शिक्षित करते हैं। जनपद में कराए गए सर्वे में 1446 बच्चे विकलांग चिन्हित किए गए। इन बच्चों की शिक्षा को मात्र एक प्रीइंटेरीगेेशन कैंप संचालित है।
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कैंप में 60 बच्चे शिक्षारत हैं। इसके अलावा 19 इंटीनरेट शिक्षक 380 बच्चों को शिक्षा दे रहे हैं। 1006 बच्चों की शिक्षा के लिए जनपद में न तो कैंप की ही व्यवस्था की गई है और न ही शिक्षकों को। इससे इन बच्चों को उचित शिक्षा नहीं मिल पा रही। शासन से संचालित अन्य योजनाओं की स्थिति भी संतोष जनक नहीं है। पेंशन पाने के लिए बड़ी संख्या में युवा विभाग के चक्कर लगाते आसानी से देखे जा सकते हैं। उन्हें विभाग से उपकरण भी आसानी से नहीं मिल पाते।
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रोजगार के लिए बैंकों में किए जाने वाले आवेदनों पर भी उन्हें लाभ मिलना आसान नहीं होता। विकलांग महेश ने बताया कि उसने अपनी पेंशन के लिए कई बार आवेदन किया, लेकिन आज तक उन्हें पेंशन नहीं मिल सकी है। समेकित शिक्षा के जिला समन्वयक वीरेंद्र कुमार का कहना है विकलांग बच्चों की शिक्षा को शिक्षकों की आवश्यकता की डिमांड शासन को भेजी जा चुकी है, लेकिन शिक्षकों की नियुक्ति नहीं हो सकी है। विभाग के पास जो शिक्षक हैं उनके माध्यम से बच्चों को शिक्षित करने का कार्य किया जा रहा है।