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जेल में बंद कैदी की बुखार से मौत, जांच
Updated Thu, 31 Aug 2017 11:33 PM IST
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कासगंज।
जिला जेल में बंद एक और कैदी की गुरुवार को मौत हो गई। कैदी बुखार से पीड़ित था। जेल में ही उसका इलाज चल रहा था। गुरुवार को कैदी की हालत बिगड़ने पर सुबह जिला जेल से जिला अस्पताल लाते समय एंबूलेंस में ही कैदी मौत हो गई। परिवारीजनों ने जेल प्रशासन पर सही से इलाज न कराने का आरोप लगाया है।
मौत का शिकार कैदी रोहताश उर्फ गौतम (22) पुत्र अमर सिंह निवासी गोहरा हुआ। बताया गया कि अमर सिंह नवंबर 2015 से दुष्कर्म के मामले में जेल में बंद था। पहले वह एटा जिला कारागार में था। बाद में कासगंज की जिला जेल बनने पर उसे स्थानांतरित किया गया। बताया कि वह 3-4 दिनों से बुखार से पीड़ित था। जेल में ही उसका इलाज चल रहा था।
बुधवार को उसकी मां शांति देवी जेल में उससे मिलने गई थीं। उस समय भी रोहतास को बुखार था। उसने अपनी मां को बताया कि तेज सिरदर्द है और बुखार से परेशान है। उसे जेन के इलाज से फायदा नहीं मिल रहा। उसने मां से कहा कि उसका अच्छे से इलाज करा दो।
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इसके बाद मिलाई का वक्त खत्म होते ही मां को बंदी रक्षकों ने उन्हें बाहर भेज दिया। गुरुवार को जब मां को रोहतास की मौत की खबर मिली तो उन्हें रोहतास की इलाज कराने की बात बार बार याद आ रही थी। मां और परिवारीजनों ने जेल प्रशासन पर सही इलाज न कराने का आरोप लगाया है।
कैदी पिछले तीन दिन से बीमार था। उसके कान में इंफेक्शन था और पस आ रहा था। उसे बुखार था। जेल के चिकित्सक को उसे दिमागी बुखार होने की आशंका थी। पहले जेल में इलाज किया गया और हालत बिगडने पर उसे जिला चिकित्सालय भेजा गया। जिला चिकित्सालय ले जाते समय उसकी मौत हो गई। लक्ष्मी नरायन, जेल अधीक्षक
जिले में संक्रामक रोग जानलेवा बनने लगे हैं। बड़ी संख्या में लोग वायरल फीवर, मलेरिया, टाइफाइड से पीड़ित हो रहे हैं। एक युवक की बुखार की चपेट में आने से मौत हो गई।
महेश पुत्र धारा सिंह निवासी नगला भट्टा किशोर पुर को कई दिन से बुखार आ रहा था। परिवारीजनों ने उसे चिकित्सक को भी दिखाया, लेकिन कोई फायदा नहीं मिला। बुधवार की देर सांय उसकी हालत बिगड़ने पर परिवारीजन उसे चिकित्सालय लेकर पहुंचे, लेकिन रास्ते में ही उसने दम तोड़ दिया। चिकित्सकों ने उसे देखकर मृत घोषित कर दिया।
जनपद भर में प्रतिदिन दो हजार तक लोग विभिन्न रोगों से पीड़ित होकर चिकित्सालय पहुंच रहे है, लेकिन मरीजों को पर्याप्त सुविधाएं नहीं मिल रही। चिकित्सकों की कमी के चलते मरीजों को काफी देर तक इंतजार करना पड़ रहा है। पहले उन्हें पर्चा बनवाने में लाइन लगानी होती है। इसके बाद चिकित्सक के पास पहुंच कर लंबी कतार से गुजरना होता है। निजी चिकित्सकों के यहां भी लंबी कतारें लग रही हैं। बुखार से पीड़ित होकर पहुंचने वाले लोगों का चिकित्सक रक्त परीक्षण भी करा रहे हैं। परीक्षण में मलेरिया के मामले भी सामने आ रहे हैं।
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जिला जेल में बंद एक और कैदी की गुरुवार को मौत हो गई। कैदी बुखार से पीड़ित था। जेल में ही उसका इलाज चल रहा था। गुरुवार को कैदी की हालत बिगड़ने पर सुबह जिला जेल से जिला अस्पताल लाते समय एंबूलेंस में ही कैदी मौत हो गई। परिवारीजनों ने जेल प्रशासन पर सही से इलाज न कराने का आरोप लगाया है।
मौत का शिकार कैदी रोहताश उर्फ गौतम (22) पुत्र अमर सिंह निवासी गोहरा हुआ। बताया गया कि अमर सिंह नवंबर 2015 से दुष्कर्म के मामले में जेल में बंद था। पहले वह एटा जिला कारागार में था। बाद में कासगंज की जिला जेल बनने पर उसे स्थानांतरित किया गया। बताया कि वह 3-4 दिनों से बुखार से पीड़ित था। जेल में ही उसका इलाज चल रहा था।
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बुधवार को उसकी मां शांति देवी जेल में उससे मिलने गई थीं। उस समय भी रोहतास को बुखार था। उसने अपनी मां को बताया कि तेज सिरदर्द है और बुखार से परेशान है। उसे जेन के इलाज से फायदा नहीं मिल रहा। उसने मां से कहा कि उसका अच्छे से इलाज करा दो।
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इसके बाद मिलाई का वक्त खत्म होते ही मां को बंदी रक्षकों ने उन्हें बाहर भेज दिया। गुरुवार को जब मां को रोहतास की मौत की खबर मिली तो उन्हें रोहतास की इलाज कराने की बात बार बार याद आ रही थी। मां और परिवारीजनों ने जेल प्रशासन पर सही इलाज न कराने का आरोप लगाया है।
कैदी पिछले तीन दिन से बीमार था। उसके कान में इंफेक्शन था और पस आ रहा था। उसे बुखार था। जेल के चिकित्सक को उसे दिमागी बुखार होने की आशंका थी। पहले जेल में इलाज किया गया और हालत बिगडने पर उसे जिला चिकित्सालय भेजा गया। जिला चिकित्सालय ले जाते समय उसकी मौत हो गई। लक्ष्मी नरायन, जेल अधीक्षक
जिले में संक्रामक रोग जानलेवा बनने लगे हैं। बड़ी संख्या में लोग वायरल फीवर, मलेरिया, टाइफाइड से पीड़ित हो रहे हैं। एक युवक की बुखार की चपेट में आने से मौत हो गई।
महेश पुत्र धारा सिंह निवासी नगला भट्टा किशोर पुर को कई दिन से बुखार आ रहा था। परिवारीजनों ने उसे चिकित्सक को भी दिखाया, लेकिन कोई फायदा नहीं मिला। बुधवार की देर सांय उसकी हालत बिगड़ने पर परिवारीजन उसे चिकित्सालय लेकर पहुंचे, लेकिन रास्ते में ही उसने दम तोड़ दिया। चिकित्सकों ने उसे देखकर मृत घोषित कर दिया।
जनपद भर में प्रतिदिन दो हजार तक लोग विभिन्न रोगों से पीड़ित होकर चिकित्सालय पहुंच रहे है, लेकिन मरीजों को पर्याप्त सुविधाएं नहीं मिल रही। चिकित्सकों की कमी के चलते मरीजों को काफी देर तक इंतजार करना पड़ रहा है। पहले उन्हें पर्चा बनवाने में लाइन लगानी होती है। इसके बाद चिकित्सक के पास पहुंच कर लंबी कतार से गुजरना होता है। निजी चिकित्सकों के यहां भी लंबी कतारें लग रही हैं। बुखार से पीड़ित होकर पहुंचने वाले लोगों का चिकित्सक रक्त परीक्षण भी करा रहे हैं। परीक्षण में मलेरिया के मामले भी सामने आ रहे हैं।