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अमरनाथ में हुए हमले के बाद मैनपुरी के लोग चिंतित
Updated Mon, 10 Jul 2017 11:38 PM IST
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टीवी पर चिपके लोग
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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मैनपुरी। अमरनाथ यात्रियों पर आतंकी हमले की सोमवार देर शाम जैसे ही टीवी पर खबर चली लोगों की धड़कनें बढ़ गईं। जिले के एक सैकड़ा से अधिक अमरनाथ यात्रियों के परिवारीजन फोन घनघनाते रहे। सबसे ज्यादा परेशान भोगांव जत्थे के परिवारीजन रहे। इन यात्रियों का तीन दिन से अपने परिवारीजनों से संपर्क टूटा हुआ है। हालांकि जिले के किसी यात्री के साथ हादसा होने की सूचना नहीं है।
श्री अमरनाथ सेवा मंडल के तत्वावधान में जिले से अभी तक चार जत्थे रवाना हुए हैं। इनमें से एक जत्था भोगांव से गया है। भोगांव से गए जत्थे के सदस्यों का तीन दिन से परिवारीजनों से संपर्क नहीं हुआ है। सोमवार की देर शाम आतंकी हमले की खबर टीवी पर चलते ही अमरनाथ यात्रियों के परिवारीजनों में दहशत फैल गई। हर कोई यह जानने को बेचैन था कि हमले में मारे गए यात्री कौन और कहां के हैं। जब यह पता चला कि मारे गए यात्रियों में सभी गुजरात के हैं तो परिवारीजनों ने कुछ राहत की सांस ली।
खानकाहे अफजलिया से सज्जादा नशीन हाजी मोहम्मद हासिम भाई का कहना है कि कोई भी धर्म हिंसा की बात नहीं कहता है। धार्मिक यात्रा पर जाने वालों की भावनाओं का सम्मान होना चाहिए। गुरुद्वारे के ज्ञानी रविंद्र सिंह का कहना है कि हिंसा का कोई स्थान नहीं है। आतंकी हमला निंदनीय है। भले ही आतंकी कोई भी होंगे।
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चर्च के फादर सुशील कुमार का कहना है कि किसी भी धर्म के अनुयायियों पर हमला बर्दाश्त नहीं किया जाना चाहिए। महामंडेलेश्वर स्वामी हरिहरानंद का कहना है कि सरकारों के तुष्टीकरण से आतंकी घटनाएं बढ़ती हैं। सरकार को आतंकियों के खिलाफ कार्रवाई करनी चाहिए।
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श्री अमरनाथ सेवा मंडल के तत्वावधान में जिले से अभी तक चार जत्थे रवाना हुए हैं। इनमें से एक जत्था भोगांव से गया है। भोगांव से गए जत्थे के सदस्यों का तीन दिन से परिवारीजनों से संपर्क नहीं हुआ है। सोमवार की देर शाम आतंकी हमले की खबर टीवी पर चलते ही अमरनाथ यात्रियों के परिवारीजनों में दहशत फैल गई। हर कोई यह जानने को बेचैन था कि हमले में मारे गए यात्री कौन और कहां के हैं। जब यह पता चला कि मारे गए यात्रियों में सभी गुजरात के हैं तो परिवारीजनों ने कुछ राहत की सांस ली।
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खानकाहे अफजलिया से सज्जादा नशीन हाजी मोहम्मद हासिम भाई का कहना है कि कोई भी धर्म हिंसा की बात नहीं कहता है। धार्मिक यात्रा पर जाने वालों की भावनाओं का सम्मान होना चाहिए। गुरुद्वारे के ज्ञानी रविंद्र सिंह का कहना है कि हिंसा का कोई स्थान नहीं है। आतंकी हमला निंदनीय है। भले ही आतंकी कोई भी होंगे।
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चर्च के फादर सुशील कुमार का कहना है कि किसी भी धर्म के अनुयायियों पर हमला बर्दाश्त नहीं किया जाना चाहिए। महामंडेलेश्वर स्वामी हरिहरानंद का कहना है कि सरकारों के तुष्टीकरण से आतंकी घटनाएं बढ़ती हैं। सरकार को आतंकियों के खिलाफ कार्रवाई करनी चाहिए।