{"_id":"5cb4b7f1bdec221420475d6e","slug":"81555347441-agra-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"100 लोगों की 19 साल में हो चुकी है कैंसर से मौत","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
100 लोगों की 19 साल में हो चुकी है कैंसर से मौत
विज्ञापन
कैंसर से पीड़ित लोगाें के परिवार वाले।
- फोटो : amar ujala
मैनपुरी। ललूपुर के लोगों ने न जानें कितनी सरकारें बनवाईं, लेकिन कोई भी सरकार यहां की मर्ज दूर नहीं कर पाईं। गांव में आज भी कैंसर से पीड़ित लोग जिंदगी के लिए संघर्ष कर रहे हैं। 19 साल में कैंसर से गांव में सौ मौतें हो चुकी हैं। भोगांव रोड स्थित नगर का निकटवर्ती गांव ललूपुर जिले का पहला गांव है, जहां कैंसर से मरीज सर्वाधिक शिकार हुए हैं।
ग्रामीणों की मानें तो यहां 100 से अधिक मरीजों की अब तक कैंसर से मौत हो चुकी है। वर्तमान में गांव चार मरीज हैं, जिनमें से तीन को सरकार की तरफ से अभी तक कोई सहायता राशि नहीं मिली है। गांव के लोग हैरान हैं कि जिले में बड़ी संख्या में कैंसर के मरीज हैं, लेकिन जिले में इन मरीजों के उपचार के लिए कोई व्यवस्था नहीं है। किसी भी दल ने इस समस्या को अपने घोषणा पत्र में शामिल नहीं किया है।
ललूपुर निवासी कैंसर पीड़ित राघवेंद्र उर्फ बादशाह ने हाल ही में अहमदाबाद से आपरेशन कराया है। अब उन्हें हर सप्ताह ग्वालियर में उपचार के लिए जाना पड़ता है। सोमवार से शुक्रवार तक उनकी सिकाई चलती है। उन्होंने आयुष्मान भारत के तहत आवेदन किया था, लेकिन उसका कार्ड नहीं बन सका। इसके चलते उसे सरकार की तरफ से अभी तक कोई लाभ नहीं मिल सका है। वहीं कैंसर पीड़ित अशोक कुमार बताते हैं कि वे भी अपना ग्वालियर और फर्रुखाबाद से इलाज करा रहे हैं।
विज्ञापन
उन्होंने डेढ़ महीने पहले आयुष्मान भारत के तहत कार्ड के लिए आवेदन किया था, लेकिन अभी तक उन्हें कार्ड नहीं मिल सका है। कैंसर पीड़ित सुभाष का भी ग्वालियर से उपचार चल रहा है। सुभाष के पिता भीमसेन ने बताया कि उसके बेटे का आयुष्मान भारत के तहत कार्ड जारी कर दिया गया है। वह ग्वालियर से उपचार करा रहा है। गांव निवासी मोहर सिंह भी कैंसर से पीड़ित हैं उसे भी सरकार की तरफ से उपचार के लिए कोई सुविधा नहीं मिल सकी।
ग्रामीण नीतेश कुमार ने बताया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ कुछ महीने पहले गांव में चौपाल लगाई थी। उस समय उन्होंने गांव के पानी की जांच के निर्देश दिए थे, लेकिन आज तक जांच की रिपोर्ट उन लोगों को नहीं मिल सकी। ग्रामीण चाहते हैं कि आखिर क्या कारण है जो गांव में कैंसर के मरीज नहीं रुक रहे हैं। पांच महिलाओं की भी कैंसर से मौत हो चुकी है।
विज्ञापन
ग्रामीणों की मानें तो यहां 100 से अधिक मरीजों की अब तक कैंसर से मौत हो चुकी है। वर्तमान में गांव चार मरीज हैं, जिनमें से तीन को सरकार की तरफ से अभी तक कोई सहायता राशि नहीं मिली है। गांव के लोग हैरान हैं कि जिले में बड़ी संख्या में कैंसर के मरीज हैं, लेकिन जिले में इन मरीजों के उपचार के लिए कोई व्यवस्था नहीं है। किसी भी दल ने इस समस्या को अपने घोषणा पत्र में शामिल नहीं किया है।
विज्ञापन
ललूपुर निवासी कैंसर पीड़ित राघवेंद्र उर्फ बादशाह ने हाल ही में अहमदाबाद से आपरेशन कराया है। अब उन्हें हर सप्ताह ग्वालियर में उपचार के लिए जाना पड़ता है। सोमवार से शुक्रवार तक उनकी सिकाई चलती है। उन्होंने आयुष्मान भारत के तहत आवेदन किया था, लेकिन उसका कार्ड नहीं बन सका। इसके चलते उसे सरकार की तरफ से अभी तक कोई लाभ नहीं मिल सका है। वहीं कैंसर पीड़ित अशोक कुमार बताते हैं कि वे भी अपना ग्वालियर और फर्रुखाबाद से इलाज करा रहे हैं।
विज्ञापन
उन्होंने डेढ़ महीने पहले आयुष्मान भारत के तहत कार्ड के लिए आवेदन किया था, लेकिन अभी तक उन्हें कार्ड नहीं मिल सका है। कैंसर पीड़ित सुभाष का भी ग्वालियर से उपचार चल रहा है। सुभाष के पिता भीमसेन ने बताया कि उसके बेटे का आयुष्मान भारत के तहत कार्ड जारी कर दिया गया है। वह ग्वालियर से उपचार करा रहा है। गांव निवासी मोहर सिंह भी कैंसर से पीड़ित हैं उसे भी सरकार की तरफ से उपचार के लिए कोई सुविधा नहीं मिल सकी।
ग्रामीण नीतेश कुमार ने बताया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ कुछ महीने पहले गांव में चौपाल लगाई थी। उस समय उन्होंने गांव के पानी की जांच के निर्देश दिए थे, लेकिन आज तक जांच की रिपोर्ट उन लोगों को नहीं मिल सकी। ग्रामीण चाहते हैं कि आखिर क्या कारण है जो गांव में कैंसर के मरीज नहीं रुक रहे हैं। पांच महिलाओं की भी कैंसर से मौत हो चुकी है।