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निजाम बदला तो कम हो गया रसूखदारों का रुतबा

Sun, 23 Dec 2018 07:07 PM IST
SonamA SonamA SonamA SonamA
Updated Sun, 23 Dec 2018 07:07 PM IST
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निजाम बदला तो कम हो गया रसूखदारों का  रुतबा
मैनपुरी। गनर रखना नेताओं के लिए स्टेटस सिंबल बन गया है। हर पार्टी का नेता सरकारी गनर और शैडो की चाहत रखता है। प्रदेश में निजाम बदला तो जिले में भी रसूखदारों का रुतबा भी कम हो गया। अब सिर्फ गिने चुने लोगों पर ही सरकारी सुरक्षा है। जिला मुख्यालय से नौ पुलिसकर्मी नेताओं की सुरक्षा में तैनात किए गए हैं।
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सपा सरकार में जिले में जनप्रतिनिधियों को खुलेआम सुरक्षाकर्मी दिए गए थे। विधायक से लेकर प्रधान तक गनर लेकर रौब के साथ चलते थे। प्रदेश में सरकार बदलने के बाद जनप्रतिनिधियों की सुरक्षा की समीक्षा हुई। इसके बाद नियमानुसार ही लोगों को गनर उपलब्ध कराए गए। मौजूदा समय में जिला मुख्यालय से जनप्रतिनिधियों को नौ गनर मुहैया कराए गए हैं। इनमें आठ निशुल्क हैं, जबकि एक दस प्रतिशत के भुगतान पर है। जिले में सांसद, चार विधायक, जिला पंचायत अध्यक्ष, चेयरमैन, भाजपा के पूर्व विधायक, एमएलसी को सरकारी सुरक्षा मिली हुई है।
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सादा कपड़ों में रहने का है नियम
पुलिस विभाग से मिली जानकारी के अनुसार 9 मई 2014 को जारी शासनादेश के अनुसार गनर की परिभाषा में परिवर्तन किया है। शासन के प्रमुख पदों पर आसीन जनप्रतिनिधियों को छोड़कर अन्य जनप्रतिनिधियों की सुरक्षा में तैनात पुलिसकर्मियों को गनर नहीं सुरक्षाकर्मी का दर्जा दिया गया है। नियमानुसार सुरक्षाकर्मी को सादा कपड़े (सिविल ड्रेस) पहनने चाहिए। उसकी तैनात का उद्देश्य सुरक्षा करना है न की जनप्रतिनिधि का स्टेटस सिंबल बनना। बावजूद इसके जिले में जनप्रतिनिधियों की सुरक्षा में तैनात सुरक्षाकर्मी खाकी वर्दी पहने नजर आते हैं।
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शैडो की नहीं है तैनात
जिले में किसी भी जनप्रतिनिधि के पास शैडो की तैनाती नहीं है। शैडो और गनर में वैसे ज्यादा अंतर नहीं है। शैडो वर्दी में नहीं बल्कि सफारी सूट धारण करता है। साथ ही उसके पास असलाह भी छोटा होता है। आमतौर पर शैडो दूर से नजर नहीं आते हैं।

जनप्रतिनिधियों की सुरक्षा में नियमानुसार सुरक्षाकर्मी तैनात किए गए हैं। समय समय पर इन्हें बदला जाता है।
-ओमप्रकाश सिंह, एएसपी
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