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24.45 लाख से तैयार योजना, मरम्मत को चाहिए 1.5 करोड़
Updated Sun, 15 Apr 2018 10:43 PM IST
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road shimla
कासगंज।
ग्राम उढ़ेर पुख्ता में 12 साल से नलकूप खराब पड़ा है। पेयजल की सप्लाई न हो पाने से पाइप लाइनें भी जगह जगह से जर्जर हो चुकी हैं। जिससे इस गांव के लोगों के सामने पेयजल का संकट है। जितने में पेयजल योजना बनकर तैयार हुई, उससे कई गुना अधिक धन अब योजना की मरम्मत पर खर्च होगा। विभाग कई बार प्रोजेक्ट तैयार करके शासन को भेज चुका है।
उढ़ेर पुख्ता में वर्ष 2005 में पेयजल योजना लागू की गई। योजना के तहत नलकूप, ओवरहेड टैंक, पाइपलाइन बिछाने का काम किया गया। इन सब कार्यों पर उस समय 24.45 लाख रुपये खर्च हुए। नलकूप लगाते समय लापरवाही बरती गई। नलकूप की सतह पर पानी के स्तर का सही आकलन विभाग नहीं कर सका। एक साल चलने के बाद ही नलकूप फेल हो गया। नलकूप फेल हो जाने पर विभाग ने शासन को मरम्मत के लिए प्रस्ताव बनाकर भेजा, लेकिन शासन ने इस पर कोई गौर नहीं किया। जिससे नलकूप का फिर से निर्माण नहीं हो पाया। 12 साल से हर वर्ष ही विभाग प्रोजेक्ट बनाकर शासन को भेज रहा है। लगातार प्रोजेक्ट पर खर्च होने वाला धन बढ़ता जा रहा है। आज स्थिति यह हो चुकी है कि इस प्रोजेक्ट को फिर से जीवित करने के लिए 1.5 करोड़ रुपये की जरूरत है। ग्रामीणों की पेयजल की समस्या को देखते हुए जलनिगम कई माह पहले प्रोजेक्ट तैयार करके शासन को भेज चुका है। गांव में नलकूप के साथ ही पाइप लाइनें भी फिर से बिछाई जाएंगी, लेकिन शासन से अभी तक मंजूरी न मिल पाने से योजना का मरम्मत कार्य नहीं हो पा रहा। ग्रामीण पेयजल संकट से जूझ रहे हैं।
उढ़ेर पुख्ता की पेयजल योजना के लिए शासन को 5 माह पहले नए सिरे से प्रोजेक्ट तैयार करके भेजा जा चुका है, लेकिन अभी तक शासन से प्रोजेक्ट को मंजूरी नहीं मिल पाई है। शासन से मंजूरी मिलने पर ही गांव में नया नलकूप बनेगा और पाइप लाइनें बिछेंगी।
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- डीके सिंह, अधिशासी अभियंता, जलनिगम
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ग्राम उढ़ेर पुख्ता में 12 साल से नलकूप खराब पड़ा है। पेयजल की सप्लाई न हो पाने से पाइप लाइनें भी जगह जगह से जर्जर हो चुकी हैं। जिससे इस गांव के लोगों के सामने पेयजल का संकट है। जितने में पेयजल योजना बनकर तैयार हुई, उससे कई गुना अधिक धन अब योजना की मरम्मत पर खर्च होगा। विभाग कई बार प्रोजेक्ट तैयार करके शासन को भेज चुका है।
उढ़ेर पुख्ता में वर्ष 2005 में पेयजल योजना लागू की गई। योजना के तहत नलकूप, ओवरहेड टैंक, पाइपलाइन बिछाने का काम किया गया। इन सब कार्यों पर उस समय 24.45 लाख रुपये खर्च हुए। नलकूप लगाते समय लापरवाही बरती गई। नलकूप की सतह पर पानी के स्तर का सही आकलन विभाग नहीं कर सका। एक साल चलने के बाद ही नलकूप फेल हो गया। नलकूप फेल हो जाने पर विभाग ने शासन को मरम्मत के लिए प्रस्ताव बनाकर भेजा, लेकिन शासन ने इस पर कोई गौर नहीं किया। जिससे नलकूप का फिर से निर्माण नहीं हो पाया। 12 साल से हर वर्ष ही विभाग प्रोजेक्ट बनाकर शासन को भेज रहा है। लगातार प्रोजेक्ट पर खर्च होने वाला धन बढ़ता जा रहा है। आज स्थिति यह हो चुकी है कि इस प्रोजेक्ट को फिर से जीवित करने के लिए 1.5 करोड़ रुपये की जरूरत है। ग्रामीणों की पेयजल की समस्या को देखते हुए जलनिगम कई माह पहले प्रोजेक्ट तैयार करके शासन को भेज चुका है। गांव में नलकूप के साथ ही पाइप लाइनें भी फिर से बिछाई जाएंगी, लेकिन शासन से अभी तक मंजूरी न मिल पाने से योजना का मरम्मत कार्य नहीं हो पा रहा। ग्रामीण पेयजल संकट से जूझ रहे हैं।
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उढ़ेर पुख्ता की पेयजल योजना के लिए शासन को 5 माह पहले नए सिरे से प्रोजेक्ट तैयार करके भेजा जा चुका है, लेकिन अभी तक शासन से प्रोजेक्ट को मंजूरी नहीं मिल पाई है। शासन से मंजूरी मिलने पर ही गांव में नया नलकूप बनेगा और पाइप लाइनें बिछेंगी।
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- डीके सिंह, अधिशासी अभियंता, जलनिगम