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दलिया खाकर बीमार न हो जाएं गर्भवती
Updated Wed, 20 Jun 2018 06:28 PM IST
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मैनपुरी। जिले में पोषाहार के तहत जहरीला दलिया खाकर बड़ी संख्या में गर्भवती महिलाएं बीमार हो सकती हैं। गांव शास्त्रीनगर में दलिया के पैकेट में छिपकली निकलने के बाद भी कंपनी ने उसी बैच के अन्य पैकेटों को वापस नहीं लिया है। विभागीय अधिकारियों ने भी इसमें रुचि नहीं दिखाई। हद तो तब हो गई जब एक ही बैच के अन्य पैकेटों को भी विभाग ने जांच के लिए भेजना उचित नहीं समझा। वहीं, कंपनी से भी न तो पूछताछ की गई और न ही कोई कार्रवाई की गई।
जिले में पोषाहार वितरण करने की जिम्मेदारी बरेली की कंपनी देवेश फूड्स को सौंपी गई है। चार दिन पूर्व सुल्तानगंज ब्लॉक के गांव शास्त्रीनगर के आंगनबाड़ी केंद्र पर गर्भवतियों को पोषाहार में दलिया बांटा जा रहा था। गर्भवती महिला सुमन पत्नी संजीव की सास कमलेश को भी दलिया का पैकेट दिया गया। घर पहुंच कर उन्होंने दलिया को भूनने के लिए पैकेट खोला तो पैकेट में मरी हुई छिपकली निकली। छिपकली सूख चुकी थी इसलिए कहा जा सकता है कि पैकेट शील होने से पहले ही वह पैकेट में बंद हो गई होगी।
पीड़ित महिला की शिकायत पर आंगनबाड़ी कार्यकर्ता ने यह बात अधिकारियों को बताई। अधिकारियों मामले को आनन-फानन में दबा दिया। उनकी इस कार्यशैली से जिले में सैकड़ों महिलाओं की सेहत पर भी सवाल खड़े होने लगे हैं। जिले में एक ही बैच नंबर के हजारों पैकेट की सप्लाई की जाती है। इन सभी को अलग-अलग गांव में गर्भवतियों को बांटा जाता है। जाहिर है कि एक पैकेट में मरी हुई सूखी छिपकली निकलने के बाद इसका असर उसी बैच नंबर के अन्य पैकेटों में भी गया होगा। इतना सब कुछ होने के बाद भी कंपनी ने अन्य पैकेटों को वापस लेना उचित नहीं समझा। हद तो तब हो गई जब इन पैकेटों की जांच भी नहीं कराई है।
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जिले में पोषाहार वितरण करने की जिम्मेदारी बरेली की कंपनी देवेश फूड्स को सौंपी गई है। चार दिन पूर्व सुल्तानगंज ब्लॉक के गांव शास्त्रीनगर के आंगनबाड़ी केंद्र पर गर्भवतियों को पोषाहार में दलिया बांटा जा रहा था। गर्भवती महिला सुमन पत्नी संजीव की सास कमलेश को भी दलिया का पैकेट दिया गया। घर पहुंच कर उन्होंने दलिया को भूनने के लिए पैकेट खोला तो पैकेट में मरी हुई छिपकली निकली। छिपकली सूख चुकी थी इसलिए कहा जा सकता है कि पैकेट शील होने से पहले ही वह पैकेट में बंद हो गई होगी।
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पीड़ित महिला की शिकायत पर आंगनबाड़ी कार्यकर्ता ने यह बात अधिकारियों को बताई। अधिकारियों मामले को आनन-फानन में दबा दिया। उनकी इस कार्यशैली से जिले में सैकड़ों महिलाओं की सेहत पर भी सवाल खड़े होने लगे हैं। जिले में एक ही बैच नंबर के हजारों पैकेट की सप्लाई की जाती है। इन सभी को अलग-अलग गांव में गर्भवतियों को बांटा जाता है। जाहिर है कि एक पैकेट में मरी हुई सूखी छिपकली निकलने के बाद इसका असर उसी बैच नंबर के अन्य पैकेटों में भी गया होगा। इतना सब कुछ होने के बाद भी कंपनी ने अन्य पैकेटों को वापस लेना उचित नहीं समझा। हद तो तब हो गई जब इन पैकेटों की जांच भी नहीं कराई है।
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