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शत्रु संपति पर हो चुके हैं अवैध कब्जे
Updated Tue, 27 Mar 2018 11:18 PM IST
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कासगंज।
देश के विभाजन के बाद पाकिस्तान चले गए लोगों की घोषित की गई शत्रु संपत्ति को सरकार ने नीलाम करने का निर्णय लिया है। जनपद में भी ऐसी 246 संपत्तियां है। इनकी कीमत 10 करोड़ से अधिक है। यह संपत्ति 60 हेक्टेयर से अधिक के क्षेत्रफल में फैली हुई है। इस संपत्ति में से अधिकांश संपत्ति पर अवैध कब्जा है। कई संपत्तियों के तो बैनामे तक हो चुके हैं।
आजादी के समय बंटवारे के दौरान जनपद के कासगंज, सहावर एवं पटियाली तहसील क्षेत्र से काफी संख्या में लोग पाकिस्तान चले गए । इन लोगों की परिसंपत्ति भारत में रह गई। पाकिस्तान चले गए लोगों की संपत्तियों पर धीरे धीरे कब्जे होते चले गए। कुछ संपत्तियों को भू माफियाओं ने बिक्री कर रकम हड़प कर ली। तीनों तहसीलों में 246 संपत्तियां चिह्नित की गई। इन संपत्तियों में सबसे अधिक 206 संपत्तियां कासगंज तहसील में है। ये संपत्तियां लगभग 60 हेक्टेअर में फैली हुई है। इनकी वर्तमान कीमत आठ करोड़ से अधिक है। इनमें से कई संपत्तियां ऐसी हैं जिनको बिक्री किया जा चुका है। इन पर भवन आदि बन चुके हैं। जबकि सहावर में 27 संपत्तियां हैं। ये संपत्तियां 3.163 हेक्टेअर में फैली हुई हैं। वर्तमान में इनकी कीमत 60 लाख रुपये आंकी गई है। पटियाली में 13 संपत्तियां हैं। ये लगभग 7 हेक्टेअर में फैली हुई है। इनमें से अधिकांश पर कब्जा है या फिर भवन आदि बन चुके हैं। इनकी अनुमानित कीमत 60 लाख है। फरवरी 2013 में मुुंबई के शत्रु संपत्ति विभाग की टीम यहां आकर जांच कर चुकी है। जांच में अबैध कब्जा कर लेने का मामला सामने आया। कब्जा धारकों को नोटिस जारी करके आवश्यक प्रपत्र मांगे गए, लेकिन तमाम कब्जा धारक इन संपत्तियों के मालिकाना हक के संबंध में आवश्यक प्रपत्र नहीं दिखा सके। इसके बाद मामला ठंडे बस्ते में चला गया। प्रशासन किसी भी शत्रु संपत्ति को कब्जा मुक्त कराने में सफल नहीं हो पाया। आज भी ये संपत्ति अवैध रूप से कब्जे में हैं। लोकसभा में नया संशोधन विधेयक पास हो जाने के बाद शत्रु संपत्ति के सभी अधिकार कस्टोडियन के अधीन होंगे। इन संपत्तियों को हस्तांतरित नहीं किया जा सकेगा। शत्रु के उत्तराधिकारी, कानूनी उत्तराधिकारी उनकी संपत्ति के अधिकारी नहीं होंगे। यह कानून अब तक हस्तांतरित हुए सभी शत्रु संपत्ति हस्तांरण पर मान्य होगा। शासन के इन संपत्तियों को नीलाम करने के निर्णय के बाद राजस्व विभाग ने अपने अभिलेखों को खंगालना शुरू कर दिया है।
इन ग्रामों में चिह्नित की गई थी संपती
कासगंज तहसील में टंडोली माफी, घिनौना, मुबारिकपुर माफी, मुबारिकपुर सिगतरा, भिटौना, नरायनी, तालेसराय, किनावा, रहमतपुर माफी, बिलराम, ढोलना, वाहिदपुर माफी, खिरिया ग्रामों में 206 परिसंपत्तियां चिह्नित की गई। सहावर के बेहटा, परतापुर, चीथरा, जाटऊ अशोकपुर व कसबा सहावर में कुल 27 परिसंपत्तियां एवं पटियाली तहसील क्षेत्र में ग्राम सुनहरा, भुजपुरा, चकपाड़ा, रसूलपुर बुजुर्ग, जलालपुर, चकतराई तथा बिलासबंास में 13 संपत्ति चिह्नित की गईं।
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शत्रु संपत्ति का ब्यौरा एकत्रित किया गया है, इसके सत्यापन का कार्य हो रहा है। इसके पश्चात आगे की प्रक्रिया शुरू की जाएगी: आरपी सिंह जिलाधिकारी कासगंज।
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देश के विभाजन के बाद पाकिस्तान चले गए लोगों की घोषित की गई शत्रु संपत्ति को सरकार ने नीलाम करने का निर्णय लिया है। जनपद में भी ऐसी 246 संपत्तियां है। इनकी कीमत 10 करोड़ से अधिक है। यह संपत्ति 60 हेक्टेयर से अधिक के क्षेत्रफल में फैली हुई है। इस संपत्ति में से अधिकांश संपत्ति पर अवैध कब्जा है। कई संपत्तियों के तो बैनामे तक हो चुके हैं।
आजादी के समय बंटवारे के दौरान जनपद के कासगंज, सहावर एवं पटियाली तहसील क्षेत्र से काफी संख्या में लोग पाकिस्तान चले गए । इन लोगों की परिसंपत्ति भारत में रह गई। पाकिस्तान चले गए लोगों की संपत्तियों पर धीरे धीरे कब्जे होते चले गए। कुछ संपत्तियों को भू माफियाओं ने बिक्री कर रकम हड़प कर ली। तीनों तहसीलों में 246 संपत्तियां चिह्नित की गई। इन संपत्तियों में सबसे अधिक 206 संपत्तियां कासगंज तहसील में है। ये संपत्तियां लगभग 60 हेक्टेअर में फैली हुई है। इनकी वर्तमान कीमत आठ करोड़ से अधिक है। इनमें से कई संपत्तियां ऐसी हैं जिनको बिक्री किया जा चुका है। इन पर भवन आदि बन चुके हैं। जबकि सहावर में 27 संपत्तियां हैं। ये संपत्तियां 3.163 हेक्टेअर में फैली हुई हैं। वर्तमान में इनकी कीमत 60 लाख रुपये आंकी गई है। पटियाली में 13 संपत्तियां हैं। ये लगभग 7 हेक्टेअर में फैली हुई है। इनमें से अधिकांश पर कब्जा है या फिर भवन आदि बन चुके हैं। इनकी अनुमानित कीमत 60 लाख है। फरवरी 2013 में मुुंबई के शत्रु संपत्ति विभाग की टीम यहां आकर जांच कर चुकी है। जांच में अबैध कब्जा कर लेने का मामला सामने आया। कब्जा धारकों को नोटिस जारी करके आवश्यक प्रपत्र मांगे गए, लेकिन तमाम कब्जा धारक इन संपत्तियों के मालिकाना हक के संबंध में आवश्यक प्रपत्र नहीं दिखा सके। इसके बाद मामला ठंडे बस्ते में चला गया। प्रशासन किसी भी शत्रु संपत्ति को कब्जा मुक्त कराने में सफल नहीं हो पाया। आज भी ये संपत्ति अवैध रूप से कब्जे में हैं। लोकसभा में नया संशोधन विधेयक पास हो जाने के बाद शत्रु संपत्ति के सभी अधिकार कस्टोडियन के अधीन होंगे। इन संपत्तियों को हस्तांतरित नहीं किया जा सकेगा। शत्रु के उत्तराधिकारी, कानूनी उत्तराधिकारी उनकी संपत्ति के अधिकारी नहीं होंगे। यह कानून अब तक हस्तांतरित हुए सभी शत्रु संपत्ति हस्तांरण पर मान्य होगा। शासन के इन संपत्तियों को नीलाम करने के निर्णय के बाद राजस्व विभाग ने अपने अभिलेखों को खंगालना शुरू कर दिया है।
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इन ग्रामों में चिह्नित की गई थी संपती
कासगंज तहसील में टंडोली माफी, घिनौना, मुबारिकपुर माफी, मुबारिकपुर सिगतरा, भिटौना, नरायनी, तालेसराय, किनावा, रहमतपुर माफी, बिलराम, ढोलना, वाहिदपुर माफी, खिरिया ग्रामों में 206 परिसंपत्तियां चिह्नित की गई। सहावर के बेहटा, परतापुर, चीथरा, जाटऊ अशोकपुर व कसबा सहावर में कुल 27 परिसंपत्तियां एवं पटियाली तहसील क्षेत्र में ग्राम सुनहरा, भुजपुरा, चकपाड़ा, रसूलपुर बुजुर्ग, जलालपुर, चकतराई तथा बिलासबंास में 13 संपत्ति चिह्नित की गईं।
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शत्रु संपत्ति का ब्यौरा एकत्रित किया गया है, इसके सत्यापन का कार्य हो रहा है। इसके पश्चात आगे की प्रक्रिया शुरू की जाएगी: आरपी सिंह जिलाधिकारी कासगंज।