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27 लाख की आबादी को कैसे व्यवस्थित करें 15 कांस्टेबल
Updated Fri, 03 Nov 2017 12:25 AM IST
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- फोटो : अमर उजाला
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फिरोजाबाद। जिले की आबादी डेढ़ दशक में दोगुने के करीब हो गई। आबादी बढ़ी तो वाहन भी कई गुना बढ़ गए। यदि कोई नहीं बढ़ा तो फिर चौराहों पर वाहनों और भीड़ को व्यवस्थित करने वाला फोर्स। सवाल यही कि आखिर इस हाल में कैसे सुधरेगी यातायात व्यवस्था।
यातायात माह का आगाज हो गया। ट्रैफिक नियमों के पालन का पाठ स्कूली बच्चों को पढ़ाया गया। जागरुकता का संदेश देती रैली निकाली गई। अफसरों ने खुद के अनुभव साझा किए, लेकिन कमियों एवं खामियों की ओर ध्यान किसी का नहीं गया। जिले का गठन हुए ढाई दशक बीत गया।
सड़कें चौड़ी हुई, चौराहों की संख्या बढ़ी, एक्सप्रेस वे बन गया। इसके कारण ट्रैफिक फोर्स की जरूरत बढ़ गई है। फिरोजाबाद में नगर निगम, तीन नगर पालिका, तीन पंचायतों के साथ 21 थाने हैं। कांच उद्योग नगरी होने के कारण बड़ी संख्या में श्रमिक ग्रामीण अंचल से आते हैं।
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इसके कारण ट्रैफिक व्यवस्था में सुधार की जरूरत है। जानकारों की मानें तो अब एसपी ट्रैफिक और सीओ ट्रैफिक के पद सृजित होने चाहिए। एक ट्रैफिक इंस्पेक्टर, 12 टीएसआई एवं 15 हैड कांस्टेबलों के साथ 50 ट्रैफिक सिपाही की तैनाती अब जरुरी है।
लेकिन जिले में एक ट्रैफिक एसआई के अलावा दो हैड कांस्टेबल एवं 15 कांस्टेबल ही तैनात हैं। इसके साथ रात में ट्रैफिक व्यवस्था नियंत्रित करने के संसाधन होने चाहिए, लेकिन उनका अभाव है। शहर के प्रमुख चौराहों पर ट्रैफिक सिपाही के खड़े होने तक का कोई इंतजाम नहीं है।
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यातायात माह का आगाज हो गया। ट्रैफिक नियमों के पालन का पाठ स्कूली बच्चों को पढ़ाया गया। जागरुकता का संदेश देती रैली निकाली गई। अफसरों ने खुद के अनुभव साझा किए, लेकिन कमियों एवं खामियों की ओर ध्यान किसी का नहीं गया। जिले का गठन हुए ढाई दशक बीत गया।
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सड़कें चौड़ी हुई, चौराहों की संख्या बढ़ी, एक्सप्रेस वे बन गया। इसके कारण ट्रैफिक फोर्स की जरूरत बढ़ गई है। फिरोजाबाद में नगर निगम, तीन नगर पालिका, तीन पंचायतों के साथ 21 थाने हैं। कांच उद्योग नगरी होने के कारण बड़ी संख्या में श्रमिक ग्रामीण अंचल से आते हैं।
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इसके कारण ट्रैफिक व्यवस्था में सुधार की जरूरत है। जानकारों की मानें तो अब एसपी ट्रैफिक और सीओ ट्रैफिक के पद सृजित होने चाहिए। एक ट्रैफिक इंस्पेक्टर, 12 टीएसआई एवं 15 हैड कांस्टेबलों के साथ 50 ट्रैफिक सिपाही की तैनाती अब जरुरी है।
लेकिन जिले में एक ट्रैफिक एसआई के अलावा दो हैड कांस्टेबल एवं 15 कांस्टेबल ही तैनात हैं। इसके साथ रात में ट्रैफिक व्यवस्था नियंत्रित करने के संसाधन होने चाहिए, लेकिन उनका अभाव है। शहर के प्रमुख चौराहों पर ट्रैफिक सिपाही के खड़े होने तक का कोई इंतजाम नहीं है।