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तैयार हो रही हैं लड्डू गोपाल की मूर्तियां
Updated Wed, 02 Aug 2017 11:51 PM IST
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लड्डू गोपाल की प्रतिमा बनाता कारीगर
- फोटो : अमर उजाला
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वृंदावन (मथुरा)। ब्रज के आराध्य भगवान श्रीकृष्ण के जन्म महोत्सव की तैयारियां कान्हा की क्रीड़ा स्थली श्रीधाम वृंदावन के मंदिरों, आश्रमों, मठों और घरों में शुरू हो गईं हैं।
भगवान के जन्मोत्सव में वृंदावन का बाजार भला कैसे पीछे रहे। यहां भी पीतल के लड्डू गोपाल की कलात्मक मूर्तियों के निर्माण में कुशल कारीगर दिन रात लगे हैं। मुरादाबाद, रामपुर और अलीगढ़ में ढली लड्डू गोपाल और राधाकृष्ण की कलात्मक मूर्तियों का सौंदर्य वृंदावन के कारीगर अपनी कला से और बढ़ा रहे हैं।
दिन रात की कड़ी मेहनत के बाद तैयार होने वाली भगवान श्रीकृष्ण, राधा और लड्डू गोपाल की मूर्ति भले ही कीमत में अधिक हों, बावजूद इसके भारत की तुलना में विदेशी श्रद्धालुओं में हस्तनिर्मित मूर्तियों की मांग अधिक है।
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व्यापारी कपिल के अनुसार अमेरिका, आस्ट्रेलिया, कनाडा, रूस और इंग्लैंड के मूल निवासी के साथ साथ खाड़ी देशों में रहने वाले प्रवासी भारतीयों को वृंदावन में हाथों से बनी मूर्तियां अधिक पसंद आती हैं।
पीढ़ी दर पीढ़ी मूर्ति निर्माण में लगे कारीगर राजेश वार्ष्णेय ने बताया कि मुरादाबाद से पीतल लाकर वृंदावन में हाथों से लड्डू गोपाल, भगवान कृष्ण और राधा की मूर्तियां तैयार करते हैं।
दुकानदार गिरधारी अग्रवाल ने बताया कि हस्तनिर्मित मूर्तियों का आकर्षण दर्शनीय होता है। वहीं काले मेटल की मूर्तियां भी बाजारों में आ रहीं हैं।
दुकानदार मुकेश अग्रवाल ने बताया कि वृंदावन में लगभग हर वर्ष 10 करोड़ रुपये से अधिक की मूर्ति का कारोबार होता है।
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भगवान के जन्मोत्सव में वृंदावन का बाजार भला कैसे पीछे रहे। यहां भी पीतल के लड्डू गोपाल की कलात्मक मूर्तियों के निर्माण में कुशल कारीगर दिन रात लगे हैं। मुरादाबाद, रामपुर और अलीगढ़ में ढली लड्डू गोपाल और राधाकृष्ण की कलात्मक मूर्तियों का सौंदर्य वृंदावन के कारीगर अपनी कला से और बढ़ा रहे हैं।
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दिन रात की कड़ी मेहनत के बाद तैयार होने वाली भगवान श्रीकृष्ण, राधा और लड्डू गोपाल की मूर्ति भले ही कीमत में अधिक हों, बावजूद इसके भारत की तुलना में विदेशी श्रद्धालुओं में हस्तनिर्मित मूर्तियों की मांग अधिक है।
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व्यापारी कपिल के अनुसार अमेरिका, आस्ट्रेलिया, कनाडा, रूस और इंग्लैंड के मूल निवासी के साथ साथ खाड़ी देशों में रहने वाले प्रवासी भारतीयों को वृंदावन में हाथों से बनी मूर्तियां अधिक पसंद आती हैं।
पीढ़ी दर पीढ़ी मूर्ति निर्माण में लगे कारीगर राजेश वार्ष्णेय ने बताया कि मुरादाबाद से पीतल लाकर वृंदावन में हाथों से लड्डू गोपाल, भगवान कृष्ण और राधा की मूर्तियां तैयार करते हैं।
दुकानदार गिरधारी अग्रवाल ने बताया कि हस्तनिर्मित मूर्तियों का आकर्षण दर्शनीय होता है। वहीं काले मेटल की मूर्तियां भी बाजारों में आ रहीं हैं।
दुकानदार मुकेश अग्रवाल ने बताया कि वृंदावन में लगभग हर वर्ष 10 करोड़ रुपये से अधिक की मूर्ति का कारोबार होता है।