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प्रशिक्षु फार्मासिस्टों के भरोसे है जिला अस्पताल
Updated Thu, 22 Jun 2017 12:06 AM IST
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प्रशिक्षु फार्मासिस्ट
- फोटो : अमर उजाला
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मैनपुरी। जिला अस्पताल में प्रतिदिन संक्रामक रोगों से पीड़ित हजारों की संख्या में रोगी इलाज के लिए आते हैं। पर, यहां तो इन दिनों खुद जिला अस्पताल की हालत बीमारों जैसी है। चिकित्सक, दवाओं का टोटा बना हुआ है। जो चिकित्सक हैं, वे भी स्वास्थ्य मेले में व्यस्त हैं। इसके कारण प्रशिक्षु फार्मासिस्ट दवा लिख रहे हैं। जबकि यह इलाज के नाम पर मरीज की जान से खिलवाड़ है।
बता दें कि जिला अस्पताल में पहले से ही चिकित्सकों की कमी है। वहीं इन दिनों ब्लाक स्तर पर स्वास्थ्य मेले ने हालत और बिगाड़ दी है। इससे जिला अस्पताल में प्रशिक्षु फार्मासिस्ट के भरोसे स्वास्थ्य सेवाएं चल रही हैं।
बुधवार को जिला अस्पताल में ऐसा ही माहौल देखने को मिला। बाल रोग विशेष डा. आरके सागर स्वास्थ्य मेले में ड्यूटी करने चले गए थे। इसके कारण बाल रोग कक्ष में प्रशिक्षु फार्मासिस्ट बच्चों का इलाज करते दिखे। वहीं जिला अस्पताल में इन दिनों न तो पर्याप्त दवाएं ही हैं और न ही चिकित्सक। इसका खामियाजा मरीजों को भुगतना पड़ रहा है।
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नहीं है दर्द निवारक दवाएं
मैनपुरी। सड़क हादसे और अन्य दुर्घटनाओं के घायलों की यहां सिर्फ मरहम-पट्टी की जाती है। इसके बाद ज्यादातर मामलों में उन्हें सैफई अथवा आगरा के लिए रेफर कर दिया जाता है। कारण यहां दर्द निवारक दवाएं ही नहीं हैं। दर्द के लिए डाइक्लोफेनिक इंजेक्शन बेहद कारगर है, लेकिन यह नहीं है।
जिला अस्पताल में दर्द निवारक दवाएं, टाइफाइड की दवाएं, घाव सुखाने की दवा, बच्चों की उल्टी दस्त के सीरप, खांसी की दवा, पेशाब में जलन की दवा आदि नहीं हैं।
सीएमएस डॉ एके उपाध्याय ने कहा कि अस्पताल में चिकित्सकों और दवाओं की कमी के संबंध में कई बार पत्राचार किया जा चुका है। मरीजों का उपचार प्रशिक्षु फार्मासिस्ट कर रहे हैं। अस्पताल से बाहर होने के कारण इसका पता नहीं है। जांच कराकर मरीजों को उचित इलाज की व्यवस्था कराई जाएगी।
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बता दें कि जिला अस्पताल में पहले से ही चिकित्सकों की कमी है। वहीं इन दिनों ब्लाक स्तर पर स्वास्थ्य मेले ने हालत और बिगाड़ दी है। इससे जिला अस्पताल में प्रशिक्षु फार्मासिस्ट के भरोसे स्वास्थ्य सेवाएं चल रही हैं।
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बुधवार को जिला अस्पताल में ऐसा ही माहौल देखने को मिला। बाल रोग विशेष डा. आरके सागर स्वास्थ्य मेले में ड्यूटी करने चले गए थे। इसके कारण बाल रोग कक्ष में प्रशिक्षु फार्मासिस्ट बच्चों का इलाज करते दिखे। वहीं जिला अस्पताल में इन दिनों न तो पर्याप्त दवाएं ही हैं और न ही चिकित्सक। इसका खामियाजा मरीजों को भुगतना पड़ रहा है।
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नहीं है दर्द निवारक दवाएं
मैनपुरी। सड़क हादसे और अन्य दुर्घटनाओं के घायलों की यहां सिर्फ मरहम-पट्टी की जाती है। इसके बाद ज्यादातर मामलों में उन्हें सैफई अथवा आगरा के लिए रेफर कर दिया जाता है। कारण यहां दर्द निवारक दवाएं ही नहीं हैं। दर्द के लिए डाइक्लोफेनिक इंजेक्शन बेहद कारगर है, लेकिन यह नहीं है।
जिला अस्पताल में दर्द निवारक दवाएं, टाइफाइड की दवाएं, घाव सुखाने की दवा, बच्चों की उल्टी दस्त के सीरप, खांसी की दवा, पेशाब में जलन की दवा आदि नहीं हैं।
सीएमएस डॉ एके उपाध्याय ने कहा कि अस्पताल में चिकित्सकों और दवाओं की कमी के संबंध में कई बार पत्राचार किया जा चुका है। मरीजों का उपचार प्रशिक्षु फार्मासिस्ट कर रहे हैं। अस्पताल से बाहर होने के कारण इसका पता नहीं है। जांच कराकर मरीजों को उचित इलाज की व्यवस्था कराई जाएगी।