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फिरोजाबाद की चूड़ियों की बढ़ी खनक
Updated Mon, 17 Jul 2017 12:20 PM IST
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चूड़ी।
- फोटो : अमर उजाला
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फिरोजाबाद। हरियाली तीज और रक्षाबंधन के त्योहार पर फिरोजाबाद की चूड़ियों की खनक बढ़ गई है। चूड़ियों के लिए प्रसिद्ध फिरोजाबाद से देश के कोने-कोने में चूड़ियों की सप्लाई की जाती है। इस बार रक्षाबंधन और हरियाली तीज पर लाल और हरे रंग की चूड़ियों की मांग ज्यादा है। जिले से बाहर के व्यापारियों के आर्डर अभी भी मिल रहे हैं। चूड़ी व्यापारियों का कहना कि है इस सावन तीस करोड़ से अधिक के कारोबार का अनुमान है।
फिरोजाबाद से महाराष्ट्र, बिहार और पूर्वांचल के शहरों में चूड़ी की सप्लाई की जाती है। महाराष्ट्र से चूड़ी की डिमांड अच्छी आ रही है। ज्यादा मांग होने से व्यापारियों के पास हरे रंग की चूड़ियां नहीं मिल रही हैं।
रक्षाबंधन में हरियाली तीज पर हरे रंग का महत्व चूड़ियों से भी जुड़ा है। हरे रंग की साड़ी, सूट या लहंगा में हरे रंग की मैचिंग के चलते चूड़ियों की मांग बढ़ गई। स्थिति यह है कि आर्डर के मुताबिक दुकानदार हरे रंग की चूड़ियां नहीं दे पा रहे हैं।
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चूड़ी का यहां कोई ब्रांड नहीं है। पूरे देश में कांच की चूड़ियां सिर्फ फिरोजाबाद के नाम से बिकती है। जब भी कोई फिल्म आती है बाजार में चूड़ी को भी उसी फिल्म का नाम दे दिया जाता है और उसी नाम से चूड़ी बिकने लगती है। इस बार बाजार में बाहुबली के ब्रांड की धूम है। इससे पहले चूड़ी बजरंगी के नाम से बिक रही थी।
चूड़ी व्यापारी उमेश उपाध्याय का कहना है कि हिल्ल की कटिंग और जरकिन के आइटम भी इस बार बाजार में हैं। शहरी क्षेत्र के ग्राहकों के बीच इन चूड़ियों की डिमांड अधिक है। सावन के सीजन में हर साल चूड़ी की अच्छी डिमांड रहती है।
चूड़ी व्यापारी नीरज जैन का कहना है कि बाहर की मंडियों से हरी और लाल रंग की चूड़ियों की डिमांड काफी निकली है लेकिन चूड़ी पर जीएसटी लागू होने से व्यापारियों को परेशानी आ रही है। जिन दुकानदारों का पंजीकरण नहीं उनका माल ले जाने में ट्रांसपोर्टर आनाकानी कर रहे हैं।
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फिरोजाबाद से महाराष्ट्र, बिहार और पूर्वांचल के शहरों में चूड़ी की सप्लाई की जाती है। महाराष्ट्र से चूड़ी की डिमांड अच्छी आ रही है। ज्यादा मांग होने से व्यापारियों के पास हरे रंग की चूड़ियां नहीं मिल रही हैं।
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रक्षाबंधन में हरियाली तीज पर हरे रंग का महत्व चूड़ियों से भी जुड़ा है। हरे रंग की साड़ी, सूट या लहंगा में हरे रंग की मैचिंग के चलते चूड़ियों की मांग बढ़ गई। स्थिति यह है कि आर्डर के मुताबिक दुकानदार हरे रंग की चूड़ियां नहीं दे पा रहे हैं।
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चूड़ी का यहां कोई ब्रांड नहीं है। पूरे देश में कांच की चूड़ियां सिर्फ फिरोजाबाद के नाम से बिकती है। जब भी कोई फिल्म आती है बाजार में चूड़ी को भी उसी फिल्म का नाम दे दिया जाता है और उसी नाम से चूड़ी बिकने लगती है। इस बार बाजार में बाहुबली के ब्रांड की धूम है। इससे पहले चूड़ी बजरंगी के नाम से बिक रही थी।
चूड़ी व्यापारी उमेश उपाध्याय का कहना है कि हिल्ल की कटिंग और जरकिन के आइटम भी इस बार बाजार में हैं। शहरी क्षेत्र के ग्राहकों के बीच इन चूड़ियों की डिमांड अधिक है। सावन के सीजन में हर साल चूड़ी की अच्छी डिमांड रहती है।
चूड़ी व्यापारी नीरज जैन का कहना है कि बाहर की मंडियों से हरी और लाल रंग की चूड़ियों की डिमांड काफी निकली है लेकिन चूड़ी पर जीएसटी लागू होने से व्यापारियों को परेशानी आ रही है। जिन दुकानदारों का पंजीकरण नहीं उनका माल ले जाने में ट्रांसपोर्टर आनाकानी कर रहे हैं।