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फर्जी शिक्षकों ने स्कूलों में जाकर बदलवा लिया अपना पता
Updated Fri, 19 Oct 2018 12:11 AM IST
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डेमो
- फोटो : SELF
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मथुरा। शिक्षक भर्ती घोटाले में खंड शिक्षाधिकारी और प्रधान अध्यापकों से साठगांठ कर फर्जी शिक्षकों ने अपना पता बदलवा दिया है, जिससे पुलिस की पकड़ से बचे रहे। फर्जी शिक्षकों ने रिकार्ड की यह हेराफेरी रिपोर्ट दर्ज होने से पहले की है। इसका खुलासा अब पुलिस जांच में होने लगा है।
जून माह में एसटीएफ की कार्रवाई के बाद जनपद में सामने आए शिक्षक भर्ती घोटाले में पुलिस के लिए एक और नया सिरदर्द उत्पन्न हो गया है। फर्जी शिक्षकों के खिलाफ दर्ज की गई रिपोर्ट में अब पुलिस जांच दौरान संबंधित आरोपी का पता फर्जी निकलकर आ रहा है।
गौरतलब रहे कि जून में एसटीएफ की कार्रवाई के बाद फर्जी शिक्षकों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज होनी थी, जिस कार्रवाई को समय पूर्व ही भांप कर फर्जी शिक्षकों ने खुद को पुलिस से बचाने के लिए अपना पता विद्यालय और खंड शिक्षाधिकारी स्तर पर परिवर्तित करा दिया था। अधिकांश फर्जी शिक्षकों के रिकार्ड यहीं मौजूद थे। इन्हें बीएसए कार्यालय भेजने में निरंतर देरी की जा रही थी।
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इसी का लाभ उठाते हुए अनेक शिक्षक मामला खुलने पर अपना पता बदलवाने में सफल हो गए हैं। फर्जी शिक्षकों के खिलाफ वर्तमान में रिपोर्ट भी प्रधान अध्यापकों के स्तर से विद्यालय में मौजूद रिकार्ड के तहत ही दर्ज कराई गई है। अब पुलिस को इन लोगों तक पहुंचने के लिए विभाग में मौजूद अन्य रिकार्ड की तलाश करनी पड़ रही है।
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जून माह में एसटीएफ की कार्रवाई के बाद जनपद में सामने आए शिक्षक भर्ती घोटाले में पुलिस के लिए एक और नया सिरदर्द उत्पन्न हो गया है। फर्जी शिक्षकों के खिलाफ दर्ज की गई रिपोर्ट में अब पुलिस जांच दौरान संबंधित आरोपी का पता फर्जी निकलकर आ रहा है।
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गौरतलब रहे कि जून में एसटीएफ की कार्रवाई के बाद फर्जी शिक्षकों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज होनी थी, जिस कार्रवाई को समय पूर्व ही भांप कर फर्जी शिक्षकों ने खुद को पुलिस से बचाने के लिए अपना पता विद्यालय और खंड शिक्षाधिकारी स्तर पर परिवर्तित करा दिया था। अधिकांश फर्जी शिक्षकों के रिकार्ड यहीं मौजूद थे। इन्हें बीएसए कार्यालय भेजने में निरंतर देरी की जा रही थी।
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इसी का लाभ उठाते हुए अनेक शिक्षक मामला खुलने पर अपना पता बदलवाने में सफल हो गए हैं। फर्जी शिक्षकों के खिलाफ वर्तमान में रिपोर्ट भी प्रधान अध्यापकों के स्तर से विद्यालय में मौजूद रिकार्ड के तहत ही दर्ज कराई गई है। अब पुलिस को इन लोगों तक पहुंचने के लिए विभाग में मौजूद अन्य रिकार्ड की तलाश करनी पड़ रही है।