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बीसी-सिक्का के खेल से जोड़ रखे थे 1500 लोग
Updated Sat, 14 Jul 2018 11:32 PM IST
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फिरोजाबाद। करोड़ों के खेल में महिला कारोबारी का नंबर दो का कारोबार पूरे कांच और चूड़ी उद्योग में फैला था। महिला कारोबारी मंजू गर्ग को लोग उनके असली नाम से कम, बल्कि भाभी के नाम से जनते हैं। इस महिला कारोबारी की इतनी धाक और धमक थी कि उनके हस्ताक्षर का चेक कांच और चूड़ी कारोबारियों के बीच करेंसी के रूप में घूमता था। लाखों रुपये की बीसी और सिक्का का करोड़ों का कारोबार उन्होंने शहर के करीब 1500 लोगों के बीच फैला रखा था।
उनके पति प्रदीप गर्ग केमिकल का काम रहते थे, लेकिन ड्राफ्ट, चेक, रीयल एस्टेट के करोड़ों के कारोबार को मंजू गर्ग उर्फ भाभी ही संभाले हुए थी। यह विदेश में सैर-सपाटा, महंगे शौक, चकाचौंध वाली जिंदगी जीने के शौकीन थे। करोड़ों रुपये के बीसी, सिक्का और पर्ची के खेल में महिला कारोबारी से करीब डेढ़ हजार लोग जुडे़ थे। इनमें डाक्टर, उद्योगपति, चूड़ी कारोबारी, प्लांट चलाने वाले और मध्य वर्ग व्यापारी भी शामिल थे।
जानकारों के अनुसार महिला कारोबारी के यहां करोड़ों रुपये की बीसी डाली जाती थी। तीन हजार रुपये प्रतिमाह का सिक्का (कार्ड) चलता था। इस कार्ड के खेल में सैकड़ों लोगों ने पैसा लगा रखा था। काले धन के कारोबार में शहर के तमाम ऐसे बडे़ लोग जिन पर ब्लैक मनी थी, उन्होंने महिला कारोबारी पर विश्वास करके यह पैसा तीन से चार प्रतिशत की ब्याज पर महिला कारोबारी को दे रखा था। एक-एक कारोबारी ने दस लाख रुपये से लेकर तीन करोड़ रुपये तक ब्याज पर दे रखे थे और ब्याज के पैसे पर ऐश हो रही थी।
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सिक्का के नाम से चलने वाले तीन हजार रुपये के कार्ड के खेल में पांच सौ लोग शामिल थे। इस तरह के कार्ड सिस्टम वाले कई योजनाएं महिला कारोबारी चला रही थी। तीन हजार रुपये का कार्ड लेने वाला सदस्य बनता था। पांच सौ सदस्य हर माह तीन-तीन हजार रुपये देते।
कारोबारियों के अनुसार दस लाख रुपये से कम की बीसी (कमेटी) महिला कारोबारी के यहां नहीं डाली जाती थी। दस लाख रुपये से एक करोड़ रुपये की बीसी डाली जा रही थी। जानकार बताते हैं कि महिला कारोबारी के यहां करीब 120 बीसी चल रही थीं और करीब पांच बीसी का प्रतिदिन ड्रा होता था।
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उनके पति प्रदीप गर्ग केमिकल का काम रहते थे, लेकिन ड्राफ्ट, चेक, रीयल एस्टेट के करोड़ों के कारोबार को मंजू गर्ग उर्फ भाभी ही संभाले हुए थी। यह विदेश में सैर-सपाटा, महंगे शौक, चकाचौंध वाली जिंदगी जीने के शौकीन थे। करोड़ों रुपये के बीसी, सिक्का और पर्ची के खेल में महिला कारोबारी से करीब डेढ़ हजार लोग जुडे़ थे। इनमें डाक्टर, उद्योगपति, चूड़ी कारोबारी, प्लांट चलाने वाले और मध्य वर्ग व्यापारी भी शामिल थे।
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जानकारों के अनुसार महिला कारोबारी के यहां करोड़ों रुपये की बीसी डाली जाती थी। तीन हजार रुपये प्रतिमाह का सिक्का (कार्ड) चलता था। इस कार्ड के खेल में सैकड़ों लोगों ने पैसा लगा रखा था। काले धन के कारोबार में शहर के तमाम ऐसे बडे़ लोग जिन पर ब्लैक मनी थी, उन्होंने महिला कारोबारी पर विश्वास करके यह पैसा तीन से चार प्रतिशत की ब्याज पर महिला कारोबारी को दे रखा था। एक-एक कारोबारी ने दस लाख रुपये से लेकर तीन करोड़ रुपये तक ब्याज पर दे रखे थे और ब्याज के पैसे पर ऐश हो रही थी।
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सिक्का के नाम से चलने वाले तीन हजार रुपये के कार्ड के खेल में पांच सौ लोग शामिल थे। इस तरह के कार्ड सिस्टम वाले कई योजनाएं महिला कारोबारी चला रही थी। तीन हजार रुपये का कार्ड लेने वाला सदस्य बनता था। पांच सौ सदस्य हर माह तीन-तीन हजार रुपये देते।
कारोबारियों के अनुसार दस लाख रुपये से कम की बीसी (कमेटी) महिला कारोबारी के यहां नहीं डाली जाती थी। दस लाख रुपये से एक करोड़ रुपये की बीसी डाली जा रही थी। जानकार बताते हैं कि महिला कारोबारी के यहां करीब 120 बीसी चल रही थीं और करीब पांच बीसी का प्रतिदिन ड्रा होता था।