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शीतलहर का कहर, धूप बनी बेअसर
Updated Sat, 16 Dec 2017 11:27 PM IST
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ठंड और कोहरा
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मैनपुरी। पछुआ बर्फीली हवाओं के साथ ठंड का प्रकोप बढ़ गया। आठ किलोमीटर प्रतिघंटे की रफ्तार से दिनभर हवाएं चलती रहीं। तेज शीतलहर के दौरान शनिवार को तो दिनभर धूप भी बेअसर रही। वहीं न्यूनतम तापमान भी लुढ़ककर सात डिग्री सेल्सियस हो गया है। मौसम के इस कहर से जनजीवन प्रभावित होने लगा है। इससे सबसे ज्यादा बच्चे परेशान रहे। सुबह वे ठिठुरते हुए स्कूल पहुंचे।
पिछले कई दिनों से मौसम में बदलाव आया है। शुरू के दिनों में घने कोहरे के बाद मौसम तो खुल गया। इधर, अब तीन दिनों से शीतलहर के प्रकोप ने लोगों को मुसीबत में डाल दिया। तेज हवा के कारण सर्दी का प्रकोप भी बढ़ गया है। आलम यह है कि शीतलहर चलने से लोग घरों से बाहर निकलते ही ठिठुरने लगते हैं।
ठंडक का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि शनिवार को दिनभर धूप भी बेअसर रही। अचानक बिगड़े मौसम के कारण बाजार में भी कम चहल-पहल दिखी। सुबह दफ्तर जाने वालो लोगों को भी काफी परेशानियों का सामना करना पड़ा। सबसे ज्यादा दिक्कते बाइक सवारों के सामने आईं। गलन के कारण बाइक चलाना मुश्किल हो रहा था।
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शीतलहर चलने के कारण स्कूल जाने वाले बच्चों को भी काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ा। छोटे-छोटे कड़ाके की ठंड और शीतलहर के कारण कंपकंपाते हुए स्कूल पहुंचे। वहीं दोपहर को छुट्टी के बाद भी बच्चों की यही स्थिति रही।
शीतलहर और कड़ाके की ठंड में गरीबों के लिए अलाव ही सहारा बने हुए हैं। बस अड्डे, रेलवे स्टेशन, बाजार के आसपास और अन्य सार्वजनिक स्थानों के अलावा कस्बाई बाजारों में भी सुबह और शाम होते ही लोग आग सेंकते दिखे। वहीं गांवों में भी लोग आग जलाकर ठंड से खुद को बचाने की कोशिश करते दिखे।
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पिछले कई दिनों से मौसम में बदलाव आया है। शुरू के दिनों में घने कोहरे के बाद मौसम तो खुल गया। इधर, अब तीन दिनों से शीतलहर के प्रकोप ने लोगों को मुसीबत में डाल दिया। तेज हवा के कारण सर्दी का प्रकोप भी बढ़ गया है। आलम यह है कि शीतलहर चलने से लोग घरों से बाहर निकलते ही ठिठुरने लगते हैं।
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ठंडक का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि शनिवार को दिनभर धूप भी बेअसर रही। अचानक बिगड़े मौसम के कारण बाजार में भी कम चहल-पहल दिखी। सुबह दफ्तर जाने वालो लोगों को भी काफी परेशानियों का सामना करना पड़ा। सबसे ज्यादा दिक्कते बाइक सवारों के सामने आईं। गलन के कारण बाइक चलाना मुश्किल हो रहा था।
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शीतलहर चलने के कारण स्कूल जाने वाले बच्चों को भी काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ा। छोटे-छोटे कड़ाके की ठंड और शीतलहर के कारण कंपकंपाते हुए स्कूल पहुंचे। वहीं दोपहर को छुट्टी के बाद भी बच्चों की यही स्थिति रही।
शीतलहर और कड़ाके की ठंड में गरीबों के लिए अलाव ही सहारा बने हुए हैं। बस अड्डे, रेलवे स्टेशन, बाजार के आसपास और अन्य सार्वजनिक स्थानों के अलावा कस्बाई बाजारों में भी सुबह और शाम होते ही लोग आग सेंकते दिखे। वहीं गांवों में भी लोग आग जलाकर ठंड से खुद को बचाने की कोशिश करते दिखे।