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हाईस्कूल और इंटरमीडिएट में टॉपर बनी बेटियां
Updated Sat, 10 Jun 2017 12:15 AM IST
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फिरोजाबाद। यूपी बोर्ड इंटरमीडिएट में बेटियों का दबदबा रहा। जबकि बेटे कई कदम पीछे रहे। जिले में टॉप-10 में पहले नौ स्थान पर छात्राओं ने कब्जा जमा लिया। दसवें पायदान से छात्रों के शामिल होने का सिलसिला शुरू हुआ।
जिला टॉपर इंटरमीडिएट की छात्रा अपर्णा सिंह और शिवानी यादव रहीं। दूसरे नंबर पर विभानी तो तीसरे स्थान पर रंजना रहीं। बेटियाें द्वारा सफलता चूमने के बाद उनके घर में खुशियां मनाई गई। रिजल्ट की दृष्टि से शिकोहाबाद क्षेत्र काफी अव्वल रहा। फिरोजाबाद शहर में टाप-10 सूची में सिर्फ ब्रजराज कालेज की छात्रा शामिल हुई। फिरोजाबाद शहर से जिन कालेजों के छात्र-छात्राएं टॉपर रहे हैं, योगी सरकार में उन कालेजों का रिजल्ट काफी पिछड़ गया। जसराना और सिरसागंज में रिजल्ट की स्थिति काफी खराब रही। वहीं, हाईस्कूल में भी पीआरटी कालेज की छात्रा गुलशन यादव ने जिला टॉपर किया।
एनआईसी में देरी से आया रिजल्ट
बोर्ड की ओर से आफिस की वेबसाइट पर देर से रिजल्ट डाला गया। इंटरमीडिएट का रिजल्ट करीब दोपहर 1:25 बजे डाउनलोड हुआ। जबकि हाईस्कूल का रिजल्ट दोपहर 3 बजे ही बाद ही डाउनलोड किया जा सका।
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इंटरमीडिएट का ब्यौरा
पंजीकृत 34482
उत्तीर्ण 20608
अनुत्तीर्ण 13874
फर्स्ट (आर्नस) 1235
फर्स्ट 6952
सेकेंड 10868
थर्ड 1317
रिजल्ट
मोबाइल पर देखा रिजल्ट, साइबर कैफे पर भी भीड़
फीरोजाबाद। परीक्षा परिणाम आया तो दोपहर में छात्र-छात्राओं ने पहले मोबाइल पर ही देख लिया। प्रिंट आउट के लिए छात्र-छात्राओं में साइबर कैफे की ओर दौड़ लगना शुरु कर दी। साइबर कैफे पर भी भीड़ नजर आई। प्रिंटआउट 20 रुपये में निकाला गया।
मिठाईयों की दुकान पर लगी भीड़
लाड़लों का परिणाम जानने के लिए हर अभिभावक खुश नजर आए। परिणाम देखने के बाद मिठाइयों की दुकान पर भीड़ नजर आई। बच्चों ने एक दूसरे को मिठाई खिलाकर खुशी का इजहार किया।
पास होते ही दी एक दूसरे को बधाई
यूपी बोर्ड की 10वीं व 12वीं का रिजल्ट शुक्रवार दोपहर 12 बजे के बाद आया। प्रथम श्रेणी व द्वितीय श्रेणी में पास होने वाले बच्चे एक दूसरे को बधाई देते नजर आए। वहीं न्यूनतम अंक पाने वाले या फेल छात्र बेहद मायूस थे। परीक्षाओं के दौरान हल्की सख्ती के चलते ग्रेस एक अथवा चार विषयों में फेल होने वाले छात्र-छात्राओं की संख्या अधिक थी, वहीं थर्ड डिवीजन के साथ पास होने वाले बच्चे कम ही थे। फेल होने वाले बच्चे अधिकर इंग्लिस, मैथमेटिक्स, केमिस्ट्री, फिजिक्स एवं कुछ इकोनोमिक्स में थे। प्रथम श्रेणी में पास होने वाली लड़कियों की संख्या अधिक मानी जा रही थी।
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जिला टॉपर इंटरमीडिएट की छात्रा अपर्णा सिंह और शिवानी यादव रहीं। दूसरे नंबर पर विभानी तो तीसरे स्थान पर रंजना रहीं। बेटियाें द्वारा सफलता चूमने के बाद उनके घर में खुशियां मनाई गई। रिजल्ट की दृष्टि से शिकोहाबाद क्षेत्र काफी अव्वल रहा। फिरोजाबाद शहर में टाप-10 सूची में सिर्फ ब्रजराज कालेज की छात्रा शामिल हुई। फिरोजाबाद शहर से जिन कालेजों के छात्र-छात्राएं टॉपर रहे हैं, योगी सरकार में उन कालेजों का रिजल्ट काफी पिछड़ गया। जसराना और सिरसागंज में रिजल्ट की स्थिति काफी खराब रही। वहीं, हाईस्कूल में भी पीआरटी कालेज की छात्रा गुलशन यादव ने जिला टॉपर किया।
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एनआईसी में देरी से आया रिजल्ट
बोर्ड की ओर से आफिस की वेबसाइट पर देर से रिजल्ट डाला गया। इंटरमीडिएट का रिजल्ट करीब दोपहर 1:25 बजे डाउनलोड हुआ। जबकि हाईस्कूल का रिजल्ट दोपहर 3 बजे ही बाद ही डाउनलोड किया जा सका।
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इंटरमीडिएट का ब्यौरा
पंजीकृत 34482
उत्तीर्ण 20608
अनुत्तीर्ण 13874
फर्स्ट (आर्नस) 1235
फर्स्ट 6952
सेकेंड 10868
थर्ड 1317
रिजल्ट
मोबाइल पर देखा रिजल्ट, साइबर कैफे पर भी भीड़
फीरोजाबाद। परीक्षा परिणाम आया तो दोपहर में छात्र-छात्राओं ने पहले मोबाइल पर ही देख लिया। प्रिंट आउट के लिए छात्र-छात्राओं में साइबर कैफे की ओर दौड़ लगना शुरु कर दी। साइबर कैफे पर भी भीड़ नजर आई। प्रिंटआउट 20 रुपये में निकाला गया।
मिठाईयों की दुकान पर लगी भीड़
लाड़लों का परिणाम जानने के लिए हर अभिभावक खुश नजर आए। परिणाम देखने के बाद मिठाइयों की दुकान पर भीड़ नजर आई। बच्चों ने एक दूसरे को मिठाई खिलाकर खुशी का इजहार किया।
पास होते ही दी एक दूसरे को बधाई
यूपी बोर्ड की 10वीं व 12वीं का रिजल्ट शुक्रवार दोपहर 12 बजे के बाद आया। प्रथम श्रेणी व द्वितीय श्रेणी में पास होने वाले बच्चे एक दूसरे को बधाई देते नजर आए। वहीं न्यूनतम अंक पाने वाले या फेल छात्र बेहद मायूस थे। परीक्षाओं के दौरान हल्की सख्ती के चलते ग्रेस एक अथवा चार विषयों में फेल होने वाले छात्र-छात्राओं की संख्या अधिक थी, वहीं थर्ड डिवीजन के साथ पास होने वाले बच्चे कम ही थे। फेल होने वाले बच्चे अधिकर इंग्लिस, मैथमेटिक्स, केमिस्ट्री, फिजिक्स एवं कुछ इकोनोमिक्स में थे। प्रथम श्रेणी में पास होने वाली लड़कियों की संख्या अधिक मानी जा रही थी।