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आलू किसानों को बाजार में नहीं मिल रहा भाव
Updated Thu, 29 Jun 2017 12:19 AM IST
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कालाआम चौराहे पर सड़क पर बिखरा पड़ा आलू।
- फोटो : ब्यूरो
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फिरोजाबाद। आलू का बाजार में भाव नहीं मिलता देख ही किसानों की धड़कनें दिन प्रतिदिन बढ़ती जा रही है। कोल्ड स्टोरेज के संचालक भी हैरान है। प्रतिवर्ष जून के अंत तक 45 से 50 प्रतिशत तक आलू की निकासी हो जाती थी पर इस बार बमुश्किल 15 प्रतिशत हो सकी। दक्षिण का आलू आ जाने के बाद डिमांड और कम हो जाएगी।
फिरोजाबाद जिला आलू उत्पादन का हब बन गया। किसान ने आलू को मुख्य फसल मानते हुए पूरी ताकत इसे उगाने में झोंकते हैं। लेकिन पिछले तीन वर्षों से आलू की फसल इन किसानों के लिए घाटे का सौदा साबित होने लगा। ओलों ने तो कभी घना कोहरा एवं पाला मुसीबत बनता रहा। इस बार ठीक पैदावार होने के साथ अच्छी कीमत मिलने की उम्मीद अन्नदाता को थी। लेकिन मुंबई,कोलकाता की मंडियों से ही मांग नहीं आने के कारण किसानों की उम्मीदों पर पानी फिर गया। किसान के साथ कोल्ड संचालक हैरान हैं। कोल्ड में 15 प्रतिशत निकासी हुई। किसानों ने आलू की बिक्री नहीं की तो उनका किराया निकलना मुश्किल होगा। किसानों को उम्मीद है कि दरों में कुछ सुधार होगा।लेकिन अभी तो 250 रुपया पैकिट बिक रहा है। आलू उत्पादकों के चेहरों की तो हवाइयां उड़ी हुई हैं।
आलू से जुड़ी खास बातें...
-65 से 70 हजार हेक्टेयर में बोया जाता है आलू।
-एक लाख के करीब किसान इससे सीधे ज़ुड़े हैं।
-जिले के 161 कोल्ड स्टोरेज हैं।
-14 लाख टन आलू अभी है भंडारित।
-250 रुपया प्रति पैकिट की दर से डिमांड।
आलू उत्पादक किसान आलू की निकासी के साथ बिक्री भी करना शुरू कर दें। एक माह और रुके तो बाजारों में दक्षिण (कर्नाटक व हसन क्षेत्र तमिलनाडु में पश्चिम बंगाल एवं गुजरात एवं महाराष्ट्र) का आलू दस्तक दे देगा। इसके बाद रेट मिलना मुश्किल होगा।
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बलजीत सिंह जिला उद्यान अधिकारी फिरोजाबाद।
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फिरोजाबाद जिला आलू उत्पादन का हब बन गया। किसान ने आलू को मुख्य फसल मानते हुए पूरी ताकत इसे उगाने में झोंकते हैं। लेकिन पिछले तीन वर्षों से आलू की फसल इन किसानों के लिए घाटे का सौदा साबित होने लगा। ओलों ने तो कभी घना कोहरा एवं पाला मुसीबत बनता रहा। इस बार ठीक पैदावार होने के साथ अच्छी कीमत मिलने की उम्मीद अन्नदाता को थी। लेकिन मुंबई,कोलकाता की मंडियों से ही मांग नहीं आने के कारण किसानों की उम्मीदों पर पानी फिर गया। किसान के साथ कोल्ड संचालक हैरान हैं। कोल्ड में 15 प्रतिशत निकासी हुई। किसानों ने आलू की बिक्री नहीं की तो उनका किराया निकलना मुश्किल होगा। किसानों को उम्मीद है कि दरों में कुछ सुधार होगा।लेकिन अभी तो 250 रुपया पैकिट बिक रहा है। आलू उत्पादकों के चेहरों की तो हवाइयां उड़ी हुई हैं।
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आलू से जुड़ी खास बातें...
-65 से 70 हजार हेक्टेयर में बोया जाता है आलू।
-एक लाख के करीब किसान इससे सीधे ज़ुड़े हैं।
-जिले के 161 कोल्ड स्टोरेज हैं।
-14 लाख टन आलू अभी है भंडारित।
-250 रुपया प्रति पैकिट की दर से डिमांड।
आलू उत्पादक किसान आलू की निकासी के साथ बिक्री भी करना शुरू कर दें। एक माह और रुके तो बाजारों में दक्षिण (कर्नाटक व हसन क्षेत्र तमिलनाडु में पश्चिम बंगाल एवं गुजरात एवं महाराष्ट्र) का आलू दस्तक दे देगा। इसके बाद रेट मिलना मुश्किल होगा।
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बलजीत सिंह जिला उद्यान अधिकारी फिरोजाबाद।