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4 दिन, 18 संदिग्ध, चिकित्सक हैरान
ब्यूरो, अमर उजाला
Updated Mon, 09 Feb 2015 01:18 AM IST
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चार दिन में स्वाइन फ्लू के संदिग्ध 18 मामले आने से चिकित्सक हैरान परेशान हैं। एसएन मरीजों का इलाज प्रभावित न हो इसके लिए मेडिकल कालेज में प्राचार्य ने चिकित्सकों के अवकाश रद कर दिए हैं। सोमवार को सभी फैकल्टी के चिकित्सकों की आपात बैठक बुलाई गई है।
रविवार को प्राचार्य और स्वास्थ्य विभाग की टीम ने इमरजेंसी का निरीक्षण किया। यहां दो मरीजों में फ्लू के लक्षण मिलने पर सैंपल कलेक्ट किए। आने वाले दिनों में मरीज बढ़ने की आशंका पर इमरजेंसी में 24 घंटों के लिए एक अतिरिक्त एंबुलेंस की व्यवस्था की गई है। आइसोलेशन वार्ड के अलावा इमरजेंसी में भी मास्क, सैंपल किट और दवाओं का स्टाक भी कर दिया गया है।
- प्राइवेट लैब और इमरजेंसी में संदिग्ध मामले आ रहे हैं। इनके इलाज के मद्देनजर सोमवार से चिकित्सकाें के अवकाश रद कर दिए जाएंगे। सभी फैकल्टी की मीटिंग भी बुलाई गई है।
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- डा. अजय अग्रवाल, प्राचार्य एसएन मेडिकल कालेज
- संदिग्ध मरीजों के इलाज में एसएन और स्वास्थ्य विभाग की टीम लगी हुई है। दवा और प्रोटेक्शन किट का भी स्टाक करा दिया गया है।
- डा. एचएस दानू, सीएमओ
मरीजों के परिजनों को निर्देश
- एसएन में भर्ती चार साल की बच्ची और मां के अलावा दो परिजनाें में भी फ्लू लक्षण मिले हैं। ऐसे में अन्य दो मरीजों के परिजनाें को भी आगाह कर दिया है। जांच कराने के साथ उन्हें एहतियातन दवा लेने की सीख दी है।
इमरजेंसी में 70 फीसदी बेड खाली
- इमरजेंसी में इन दिनों हालात बदले हुए हैं। जहां मरीजों की मारामारी रहती थी, वहां 70 फीसदी बेड खाली हैं। शनिवार को 19 तो रविवार को 23 मरीज ही भर्ती हुए। औसतन हर रोज यहां भर्ती मरीजों की संख्या 50 को पार करती है।
क्या है स्वाइन फ्लू:
- एसएन मेडिकल कालेज के माइक्रोबायोलॉजी विभागाध्यक्ष डा. अंकुर गोयल का कहना है कि सूअर और आदमी के इंफ्लुएंजा वायरस के संक्रमित होने से स्वाइन फ्लू होता है। इसका वायरस नाक और गले में पाया जाता है। छींकने, खांसने और इसके संपर्क में आने से यह अन्य में तेजी से फैलता है।
बच्चों पर रखें खास ध्यान
- फ्लू से बचने में साफ-सफाई जरूरी है। हाथ को साबुन से हर दो-तीन घंटे बाद साफ करें। खांसें तो मुंह पर रुमाल या फिर मास्क लगाएं। खासतौर से बच्चों पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है। फिजीशियन डा. आशीष गौतम ने बताया कि वायरल होने से बच्चाें में जुकाम-खांसी आम है। ऐसे में उसके हाथों की सफाई करें। उसके रुमाल को अन्य इस्तेमाल न करें।
इलाज से एसएन में भर्ती मरीजों को राहत
स्वाइन फ्लू से भयभीत होने की जरूरत नहीं है। एसएन में भर्ती फ्लू के तीन संदिग्ध मरीजाें की हालत में काफी सुधार आया है। छह साल का बच्चा लगभग पूरी तरह से ठीक है। कमला नगर की चार साल की बच्ची की हालत में भी सुधार आया। रविवार को वह आइसोलेशन वार्ड के परिसर में टहलती भी दिखी। मरीजों की हालत में सुधार होने पर चिकित्सकों को सैंपल की रिपोर्ट में फ्लू की संभावना कम ही नजर आ रही है। इलाज करने वाले डा. मनोज कुमार सिंह ने बताया कि तीनों मरीजों की हालत में काफी सुधार हुआ है। घबराने जैसी बात नहीं है। उम्मीद है कि इनकी रिपोर्ट नेगेटिव रहे।
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रविवार को प्राचार्य और स्वास्थ्य विभाग की टीम ने इमरजेंसी का निरीक्षण किया। यहां दो मरीजों में फ्लू के लक्षण मिलने पर सैंपल कलेक्ट किए। आने वाले दिनों में मरीज बढ़ने की आशंका पर इमरजेंसी में 24 घंटों के लिए एक अतिरिक्त एंबुलेंस की व्यवस्था की गई है। आइसोलेशन वार्ड के अलावा इमरजेंसी में भी मास्क, सैंपल किट और दवाओं का स्टाक भी कर दिया गया है।
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- प्राइवेट लैब और इमरजेंसी में संदिग्ध मामले आ रहे हैं। इनके इलाज के मद्देनजर सोमवार से चिकित्सकाें के अवकाश रद कर दिए जाएंगे। सभी फैकल्टी की मीटिंग भी बुलाई गई है।
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- डा. अजय अग्रवाल, प्राचार्य एसएन मेडिकल कालेज
- संदिग्ध मरीजों के इलाज में एसएन और स्वास्थ्य विभाग की टीम लगी हुई है। दवा और प्रोटेक्शन किट का भी स्टाक करा दिया गया है।
- डा. एचएस दानू, सीएमओ
मरीजों के परिजनों को निर्देश
- एसएन में भर्ती चार साल की बच्ची और मां के अलावा दो परिजनाें में भी फ्लू लक्षण मिले हैं। ऐसे में अन्य दो मरीजों के परिजनाें को भी आगाह कर दिया है। जांच कराने के साथ उन्हें एहतियातन दवा लेने की सीख दी है।
इमरजेंसी में 70 फीसदी बेड खाली
- इमरजेंसी में इन दिनों हालात बदले हुए हैं। जहां मरीजों की मारामारी रहती थी, वहां 70 फीसदी बेड खाली हैं। शनिवार को 19 तो रविवार को 23 मरीज ही भर्ती हुए। औसतन हर रोज यहां भर्ती मरीजों की संख्या 50 को पार करती है।
क्या है स्वाइन फ्लू:
- एसएन मेडिकल कालेज के माइक्रोबायोलॉजी विभागाध्यक्ष डा. अंकुर गोयल का कहना है कि सूअर और आदमी के इंफ्लुएंजा वायरस के संक्रमित होने से स्वाइन फ्लू होता है। इसका वायरस नाक और गले में पाया जाता है। छींकने, खांसने और इसके संपर्क में आने से यह अन्य में तेजी से फैलता है।
बच्चों पर रखें खास ध्यान
- फ्लू से बचने में साफ-सफाई जरूरी है। हाथ को साबुन से हर दो-तीन घंटे बाद साफ करें। खांसें तो मुंह पर रुमाल या फिर मास्क लगाएं। खासतौर से बच्चों पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है। फिजीशियन डा. आशीष गौतम ने बताया कि वायरल होने से बच्चाें में जुकाम-खांसी आम है। ऐसे में उसके हाथों की सफाई करें। उसके रुमाल को अन्य इस्तेमाल न करें।
इलाज से एसएन में भर्ती मरीजों को राहत
स्वाइन फ्लू से भयभीत होने की जरूरत नहीं है। एसएन में भर्ती फ्लू के तीन संदिग्ध मरीजाें की हालत में काफी सुधार आया है। छह साल का बच्चा लगभग पूरी तरह से ठीक है। कमला नगर की चार साल की बच्ची की हालत में भी सुधार आया। रविवार को वह आइसोलेशन वार्ड के परिसर में टहलती भी दिखी। मरीजों की हालत में सुधार होने पर चिकित्सकों को सैंपल की रिपोर्ट में फ्लू की संभावना कम ही नजर आ रही है। इलाज करने वाले डा. मनोज कुमार सिंह ने बताया कि तीनों मरीजों की हालत में काफी सुधार हुआ है। घबराने जैसी बात नहीं है। उम्मीद है कि इनकी रिपोर्ट नेगेटिव रहे।