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महंगे शौक और अरबपति की चाह संजीव को ले डूबी
Updated Wed, 02 Aug 2017 11:47 PM IST
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संजीव गुप्ता।
- फोटो : अमर उजाला
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फिरोजाबाद। महंगे शौक अरबपति बनने की चाहत संजीव को ले डूबी। छोटे मकान से बड़ी कोठी तक के सफर में संजीव ने शार्टकट रास्ता बीसी का चुना। छोटे से चूड़ी गोदाम से व्यापार शुरू करने वाला संजीव बीसी के खेल में कदम रखते ही रातों रात करोड़पति बन गया। इसके बाद खुद के अपहरण में उसे और उसकी पत्नी, साले और भतीजा को जेल तक जाना पड़ गया।
छह भाइयों के बीच संजीव तीसरे नंबर का है। पिता शांतिस्वरूप गुप्ता चूड़ी कारोबारी थे। गली बोहरान स्थित पीपल वाली गली में उनका चूड़ी का गोदाम था। यहां पर सोने के हिल्ल की चूड़ी का काम हुआ करता था। अन्य भाइयों के साथ संजीव गुप्ता भी पिता के साथ कारोबार में हाथ बंटाते थे। शादी के बाद सभी लोगों ने अपने कारोबार अलग-अलग कर लिए थे। विनोद गुप्ता उर्फ पप्पू गुप्ता और बंटू गुप्ता पिता शांतिस्वरूप गुप्ता के साथ ही चूड़ी का कारोबार करते हैं। वहीं, संजीव गुप्ता ने चूड़ी का कारोबार छोड़कर अन्य कारोबारों में रुचि लेना शुरू कर दिया था। वहीं, कुलदीप, अभिषेक और सचिन ने भी अलग से कारोबार शुरू कर दिए। संजीव ने बीसी का धंधा शुरू कर दिया था।
पहले एक लाख से पांच लाख तक डालता था बीसी
पहले एक लाख से लेकर पांच लाख तक की बीसी डाला करता था। इसमें शहर के कई चूड़ी कारोबारियों ने हिस्सा लिया। उस वक्त संजीव गुप्ता पत्नी सारिका गुप्ता के साथ नई बस्ती स्थित जैन मंदिर के समीप बने मकान में ही निवास करता था। बाद में संजीव का उद्योगपतियों के बीच बैठना शुरू हो गया। लेनदेन ठीक होने के कारण उद्योगपतियों ने भी बीसी में भाग लेने लगे। अब यह धंधा लाखों से करोड़ों रुपयों में पहुंच गया। बीसी और अन्य कारोबारों से संजीव को जो आय हुई। इसके बाद वह करोड़ों की संपत्ति का मालिक बनने के साथ ही कर्जदार भी बन गया।
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छह भाइयों के बीच संजीव तीसरे नंबर का है। पिता शांतिस्वरूप गुप्ता चूड़ी कारोबारी थे। गली बोहरान स्थित पीपल वाली गली में उनका चूड़ी का गोदाम था। यहां पर सोने के हिल्ल की चूड़ी का काम हुआ करता था। अन्य भाइयों के साथ संजीव गुप्ता भी पिता के साथ कारोबार में हाथ बंटाते थे। शादी के बाद सभी लोगों ने अपने कारोबार अलग-अलग कर लिए थे। विनोद गुप्ता उर्फ पप्पू गुप्ता और बंटू गुप्ता पिता शांतिस्वरूप गुप्ता के साथ ही चूड़ी का कारोबार करते हैं। वहीं, संजीव गुप्ता ने चूड़ी का कारोबार छोड़कर अन्य कारोबारों में रुचि लेना शुरू कर दिया था। वहीं, कुलदीप, अभिषेक और सचिन ने भी अलग से कारोबार शुरू कर दिए। संजीव ने बीसी का धंधा शुरू कर दिया था।
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पहले एक लाख से पांच लाख तक डालता था बीसी
पहले एक लाख से लेकर पांच लाख तक की बीसी डाला करता था। इसमें शहर के कई चूड़ी कारोबारियों ने हिस्सा लिया। उस वक्त संजीव गुप्ता पत्नी सारिका गुप्ता के साथ नई बस्ती स्थित जैन मंदिर के समीप बने मकान में ही निवास करता था। बाद में संजीव का उद्योगपतियों के बीच बैठना शुरू हो गया। लेनदेन ठीक होने के कारण उद्योगपतियों ने भी बीसी में भाग लेने लगे। अब यह धंधा लाखों से करोड़ों रुपयों में पहुंच गया। बीसी और अन्य कारोबारों से संजीव को जो आय हुई। इसके बाद वह करोड़ों की संपत्ति का मालिक बनने के साथ ही कर्जदार भी बन गया।
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