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जवाहरबाग हिंसा के राज ढूंढने 101 घरों में जा रही सीबीआई
Updated Mon, 13 Nov 2017 07:48 PM IST
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CBI
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मथुरा। जवाहरबाग हिंसा की जांच कर रही सीबीआई हत्या के आरोपी सभी 101 मुल्जिमों के घरों पर जाकर पूछताछ कर रही है। रामवृक्ष से उनका जुड़ाव कैसे हुआ और कब से जवाहरबाग में थे। इन बिंदुओं पर जानकारी जुटाई जा रही है। क्या इन लोगों पर शस्त्र लाइसेंस था। यह लोग हथियार चलाना जानते थे। इस सभी बिंदुओं को भी विवेचना में शामिल किया गया है।
मथुरा के जवाहरबाग में 2 जून 2016 को हुई हिंसा में एसपी सिटी मुकुल द्विवेदी और थानाध्यक्ष संतोष कुमार यादव मारे गए थे। हिंसा के सूत्रधार रामवृक्ष यादव समेत 27 लोगों की मौत हो गई थी। पहले तो सरकार ने इस कांड की जांच के लिए न्यायिक आयोग का गठन किया था लेकिन बाद में हाईकोर्ट ने जांच सीबीआई को सौंप दी थी। अब सीबीआई इस हिंसा की जांच कर रही है। हत्या के मामले में जेल में बंद सभी 101 लोगों से सीबीआई पूछताछ कर चुकी है। अब इन सभी अभियुक्तों के घर वालों से जानकारी जुटाई जा रही है। दरअसल पुलिस ने चार्जशीट में जो 101 आरोपी बनाए थे उनमें से कइयों को दिखाया है कि वह तमंचों से फायरिंग कर रहे थे। पुलिस पर भाला और तलवार लेकर वार किया जा रहा था।
अब सीबीआई वाले यह तलाश रहे हैं कि क्या उन लोगों के नाम कोई शस्त्र लाइसेंस है। या वह गोली चला लेते थे। रामवृक्ष के संपर्क में कैसे आए। अफसरों का कहना है कि पुलिस ने जो चार्जशीट में आरोप लगाए हैं उनकी हकीकत जानी जा रही है।
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इन जेलों में बंद हैं आरोपी
आगरा, मथुरा, कानपुर, अलीगढ़, लखीमपुर खीरी, सुल्तानपुर, नैनी जेल, बरेली और बहराइच।
इन जिलों के लोग थे जवाहरबाग में
बरेली, लखीमपुर खीरी, बदायूं, शाहजहांपुर, कानपुर देहात, गोरखपुर, कन्नौज, इटावा, बुलंदशहर, आजमगढ़, इलाहाबाद, वाराणसी, झांसी, अलीगढ़, फिरोजाबाद, मैनपुरी, सहारनपुर, आगरा और मथुरा के साथ मध्यप्रदेश, राजस्थान तक के लोग थे।
इन बिंदुओं पर घर वालों से हो रही पूछताछ
- रामवृक्ष के संपर्क में वह लोग कब आए
- रामवृक्ष ने जवाहरबाग में कब और कैसे बुलाया
- घर वालों की उनसे आखिरी बार बात कब हुई
- फोन पर क्या कभी कभी बात होती थी
- रामवृक्ष के बारे में वह लोग क्या कहते थे
65 से 70 साल के लोग पुलिस पर कैसे पड़े भारी
पुलिस ने 2 जून 2016 को हुई हिंसा के बाद जवाहरबाग से 326 लोगों को पकड़ा था। इनमें से 101 को हत्या का मुल्जिम बनाया जबकि बाकी को शांति भंग में दिखाया था। जो हत्या के आरोपी बनाए गए हैं उन्हें बीस से ज्यादा लोग ऐसे हैं जिनकी उम्र साठ साल से ऊपर है।
कई तो 70 से 75 साल तक के हैं। इस मामले की विवेचना कर रही सीबीआई ने पुलिस वालों से पूछा है कि क्या यह बुजुर्ग लोग भी पुलिस पर हमला कर रहे थे। जो लोग बगैर लाठी के सहारे चल नहीं पा रहे हैं वह भला तलवार से भाले से पुलिस पर हमला कैसे कर सकते हैं। पुलिस की इस कहानी पर सीबीआई ने सवाल खड़े किए हैं। दो दिन पहले लखीमपुर खीरी के जिस रामपाल की मौत जिला अस्पताल में हुई है वह साठ साल से ऊपर का था।
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मथुरा के जवाहरबाग में 2 जून 2016 को हुई हिंसा में एसपी सिटी मुकुल द्विवेदी और थानाध्यक्ष संतोष कुमार यादव मारे गए थे। हिंसा के सूत्रधार रामवृक्ष यादव समेत 27 लोगों की मौत हो गई थी। पहले तो सरकार ने इस कांड की जांच के लिए न्यायिक आयोग का गठन किया था लेकिन बाद में हाईकोर्ट ने जांच सीबीआई को सौंप दी थी। अब सीबीआई इस हिंसा की जांच कर रही है। हत्या के मामले में जेल में बंद सभी 101 लोगों से सीबीआई पूछताछ कर चुकी है। अब इन सभी अभियुक्तों के घर वालों से जानकारी जुटाई जा रही है। दरअसल पुलिस ने चार्जशीट में जो 101 आरोपी बनाए थे उनमें से कइयों को दिखाया है कि वह तमंचों से फायरिंग कर रहे थे। पुलिस पर भाला और तलवार लेकर वार किया जा रहा था।
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अब सीबीआई वाले यह तलाश रहे हैं कि क्या उन लोगों के नाम कोई शस्त्र लाइसेंस है। या वह गोली चला लेते थे। रामवृक्ष के संपर्क में कैसे आए। अफसरों का कहना है कि पुलिस ने जो चार्जशीट में आरोप लगाए हैं उनकी हकीकत जानी जा रही है।
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इन जेलों में बंद हैं आरोपी
आगरा, मथुरा, कानपुर, अलीगढ़, लखीमपुर खीरी, सुल्तानपुर, नैनी जेल, बरेली और बहराइच।
इन जिलों के लोग थे जवाहरबाग में
बरेली, लखीमपुर खीरी, बदायूं, शाहजहांपुर, कानपुर देहात, गोरखपुर, कन्नौज, इटावा, बुलंदशहर, आजमगढ़, इलाहाबाद, वाराणसी, झांसी, अलीगढ़, फिरोजाबाद, मैनपुरी, सहारनपुर, आगरा और मथुरा के साथ मध्यप्रदेश, राजस्थान तक के लोग थे।
इन बिंदुओं पर घर वालों से हो रही पूछताछ
- रामवृक्ष के संपर्क में वह लोग कब आए
- रामवृक्ष ने जवाहरबाग में कब और कैसे बुलाया
- घर वालों की उनसे आखिरी बार बात कब हुई
- फोन पर क्या कभी कभी बात होती थी
- रामवृक्ष के बारे में वह लोग क्या कहते थे
65 से 70 साल के लोग पुलिस पर कैसे पड़े भारी
पुलिस ने 2 जून 2016 को हुई हिंसा के बाद जवाहरबाग से 326 लोगों को पकड़ा था। इनमें से 101 को हत्या का मुल्जिम बनाया जबकि बाकी को शांति भंग में दिखाया था। जो हत्या के आरोपी बनाए गए हैं उन्हें बीस से ज्यादा लोग ऐसे हैं जिनकी उम्र साठ साल से ऊपर है।
कई तो 70 से 75 साल तक के हैं। इस मामले की विवेचना कर रही सीबीआई ने पुलिस वालों से पूछा है कि क्या यह बुजुर्ग लोग भी पुलिस पर हमला कर रहे थे। जो लोग बगैर लाठी के सहारे चल नहीं पा रहे हैं वह भला तलवार से भाले से पुलिस पर हमला कैसे कर सकते हैं। पुलिस की इस कहानी पर सीबीआई ने सवाल खड़े किए हैं। दो दिन पहले लखीमपुर खीरी के जिस रामपाल की मौत जिला अस्पताल में हुई है वह साठ साल से ऊपर का था।