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पुलिस ने सेना नायक को बना दिया हत्यारा, लुटेरा, हमलावर
amar ujala bureau
Updated Sun, 13 Aug 2017 11:46 PM IST
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एटा। रस्सी का सांप बनाने की बाजीगरी की बानगी एटा पुलिस ने पेश की है। जी हां थल सेना में नायक पद पर तैनात आशोक यादव पर पुलिस ने दो मां-बेटी के आरोपों पर साल में बलवा, हत्या का प्रयास, हत्या, लूट के पांच फर्जी मुकदमे दर्ज कर उसे अपराधी बना दिया। दो मुकदमे कोर्ट के आदेश पर दर्ज हुए हैं।
हम स्वतंत्रता दिवस का जश्न मनाने की तैयारी कर रहे हैं, लेकिन जो लोग देश की सरहदों की रक्षा कर हमें चैन की नींद सोने दे रहे हैं, उनका पुलिस विभाग में कितना सम्मान है इसकी बानगी एटा पुलिस ने पेश की है। द्वारिकापुरी कालोनी निवासी अशोक यादव सेना में नायक हैं।
कोर्ट के आदेश पर पुलिस ने श्रीनगर कालोनी के प्रेम चंद की हत्या का केस जांच किए बिना 12 दिसंबर, 2015 को दर्ज किया। बाद में पता चला कि प्रेमचंद्र की मौत दैवीय आपदा से हुई थी। परिवार ने दैवीय आपदा का क्लेम भी किया। क्लेम के कागजातों ने पुलिस को एफआर लगाने पर मजबूर कर दिया।
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दूसरा केस 26 जनवरी, 2016 को हत्या के प्रयास का दर्ज हुआ, जब सेना नायक ने ड्यूटी पर दिल्ली में होने के सबूत पेश किए तो पुलिस नेे नायक का नाम निकाल दिया।
तीसरा केस 6 नवंबर, 2016 को नायक समेत पांच पर बलवा और अन्य धाराओं में दर्ज हुआ। इस दिन आशोक 1900 किमी दूर असम में ड्यूटी पर था।
चौथा मुकदमा 29 अप्रैल, 2016 को घर में घुसकर मारपीट का दर्ज हुआ।
पांचवां मुकदमा 23 मई, 2017 को पुलिस ने कोर्ट के आदेश पर लूट का दर्ज किया है। जबकि उस दिन अशोक यादव 1900 किमी दूर असम में ड्यूटी पर था। मामला कोर्ट में लंबित है। सबूत पेश करने पर कुछ मामलों में पुलिस ने नाम निकाला, कुछ में एफआर लगाई और कुछ केस में चार्जशीट फाइल की है। फर्जी केस दर्ज होने से सेना नायक मानसिक रुप से परेशान है।
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हम स्वतंत्रता दिवस का जश्न मनाने की तैयारी कर रहे हैं, लेकिन जो लोग देश की सरहदों की रक्षा कर हमें चैन की नींद सोने दे रहे हैं, उनका पुलिस विभाग में कितना सम्मान है इसकी बानगी एटा पुलिस ने पेश की है। द्वारिकापुरी कालोनी निवासी अशोक यादव सेना में नायक हैं।
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कोर्ट के आदेश पर पुलिस ने श्रीनगर कालोनी के प्रेम चंद की हत्या का केस जांच किए बिना 12 दिसंबर, 2015 को दर्ज किया। बाद में पता चला कि प्रेमचंद्र की मौत दैवीय आपदा से हुई थी। परिवार ने दैवीय आपदा का क्लेम भी किया। क्लेम के कागजातों ने पुलिस को एफआर लगाने पर मजबूर कर दिया।
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दूसरा केस 26 जनवरी, 2016 को हत्या के प्रयास का दर्ज हुआ, जब सेना नायक ने ड्यूटी पर दिल्ली में होने के सबूत पेश किए तो पुलिस नेे नायक का नाम निकाल दिया।
तीसरा केस 6 नवंबर, 2016 को नायक समेत पांच पर बलवा और अन्य धाराओं में दर्ज हुआ। इस दिन आशोक 1900 किमी दूर असम में ड्यूटी पर था।
चौथा मुकदमा 29 अप्रैल, 2016 को घर में घुसकर मारपीट का दर्ज हुआ।
पांचवां मुकदमा 23 मई, 2017 को पुलिस ने कोर्ट के आदेश पर लूट का दर्ज किया है। जबकि उस दिन अशोक यादव 1900 किमी दूर असम में ड्यूटी पर था। मामला कोर्ट में लंबित है। सबूत पेश करने पर कुछ मामलों में पुलिस ने नाम निकाला, कुछ में एफआर लगाई और कुछ केस में चार्जशीट फाइल की है। फर्जी केस दर्ज होने से सेना नायक मानसिक रुप से परेशान है।