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अभी नहीं तो कभी नहीं हो सकता राम मंदिर का निर्माण : वासुदेवाचार्य महाराज
Updated Wed, 18 Jul 2018 11:48 PM IST
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डैमो
वृंदावन (मथुरा)। अयोध्या राम जन्मभूमि न्यास समिति के उपाध्यक्ष जगद्गुरु स्वामी वासुदेवाचार्य विद्या भास्कर महाराज ने पत्रकारों से वार्ता में कहा कि अयोध्या में राम मंदिर का निर्माण अभी नहीं तो कभी नहीं हो सकता है। वे बुधवार को वृंदावन में बड़ा खटला आश्रम के महंत स्वामी रामेश्वराचार्य महाराज के पट्टाभिषेक समारोह में आए थे। उन्होंने कहा कि जो लोग कहते थे कि राम मंदिर आस्था का ही नहीं बल्कि कानून का मामला है और कानून के रास्ते से ही इस मसले का हल होगा। अब वही लोग सत्ता में हैं।
आज सत्ता में आने के बाद भी वह लोग राम मंदिर निर्माण का मार्ग सोमनाथ मंदिर की तर्ज पर कानून बनाकर क्यों नहीं कर रहे हैं। सत्ता में बैठे लोग क्यों बहानेबाजी कर रहे हैं। आज राष्ट्रपति, उप राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और लोकसभा अध्यक्ष सभी भगवा ध्वज के अनुयायी हैं।
इन लोगों को राम मंदिर निर्माण के लिए श्वेत पत्र जारी करना चाहिए। यदि राज्यसभा में बहुमत नहीं है तो सोमनाथ मंदिर की तर्ज पर लोकसभा-राज्यसभा का संयुक्त सत्र बुलाकर राम मंदिर निर्माण के लिए कानून बनना चाहिए।
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उन्होंने कहा कि सत्ता में आने से पहले इन लोगों ने राम मंदिर निर्माण के लिए जनता से वोट मांगा था। इन लोगों ने कोर्ट से वोट नहीं मांगा था। फिर क्यूं आज राम मंदिर निर्माण के लिए कोर्ट की दुहाई दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि चुनाव से पहले भाषा कुछ और थी और सत्ता में आने में बाद भाषा कुछ और है।
उन्होंने स्पष्ट कहा कि 2019 के लोकसभा चुनावों में इन लोगों को पूर्ण बहुमत पहले जैसा नहीं मिलेगा। यदि राम मंदिर निर्माण की इन्होंने पहल कर दी तो हो सकता है कि पूरा भारत इनके पक्ष में हो जाए। वहीं, उन्होंने केंद्र की योजनाओं का समर्थन करते हुए कहा कि आज देश में जिस तरह की योजनाएं चल रही है।
उन्हें देखते हुए 2019 में नरेंद्र मोदी को एक और मौका मिलना चाहिए। उन्होंने कहा कि गंगा-यमुना शुद्धीकरण तब तक संभव नहीं है। जब तक प्रशासनिक तौर पर संतों को गंगा-यमुना के शुद्धीकरण के कामों में हस्तक्षेप करने का मौका नहीं मिलता है।
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आज सत्ता में आने के बाद भी वह लोग राम मंदिर निर्माण का मार्ग सोमनाथ मंदिर की तर्ज पर कानून बनाकर क्यों नहीं कर रहे हैं। सत्ता में बैठे लोग क्यों बहानेबाजी कर रहे हैं। आज राष्ट्रपति, उप राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और लोकसभा अध्यक्ष सभी भगवा ध्वज के अनुयायी हैं।
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इन लोगों को राम मंदिर निर्माण के लिए श्वेत पत्र जारी करना चाहिए। यदि राज्यसभा में बहुमत नहीं है तो सोमनाथ मंदिर की तर्ज पर लोकसभा-राज्यसभा का संयुक्त सत्र बुलाकर राम मंदिर निर्माण के लिए कानून बनना चाहिए।
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उन्होंने कहा कि सत्ता में आने से पहले इन लोगों ने राम मंदिर निर्माण के लिए जनता से वोट मांगा था। इन लोगों ने कोर्ट से वोट नहीं मांगा था। फिर क्यूं आज राम मंदिर निर्माण के लिए कोर्ट की दुहाई दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि चुनाव से पहले भाषा कुछ और थी और सत्ता में आने में बाद भाषा कुछ और है।
उन्होंने स्पष्ट कहा कि 2019 के लोकसभा चुनावों में इन लोगों को पूर्ण बहुमत पहले जैसा नहीं मिलेगा। यदि राम मंदिर निर्माण की इन्होंने पहल कर दी तो हो सकता है कि पूरा भारत इनके पक्ष में हो जाए। वहीं, उन्होंने केंद्र की योजनाओं का समर्थन करते हुए कहा कि आज देश में जिस तरह की योजनाएं चल रही है।
उन्हें देखते हुए 2019 में नरेंद्र मोदी को एक और मौका मिलना चाहिए। उन्होंने कहा कि गंगा-यमुना शुद्धीकरण तब तक संभव नहीं है। जब तक प्रशासनिक तौर पर संतों को गंगा-यमुना के शुद्धीकरण के कामों में हस्तक्षेप करने का मौका नहीं मिलता है।